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विश्व वन्यजीव दिवस : बेहतर माहौल से दुर्लभ वन्यजीवों का आशियाना बना दुधवा

Fri, 03 Mar 2023 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 03 Mar 2023 12:15 AM IST
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Dudhwa became home to rare wildlife due to better environment
दुधवा की स्वस्थ पारिस्थितिकी से बढ़ा हिरन प्रजाति का कुनबा।
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। खीरी और बहराइच जिले के 2200 सौ वर्ग किलोमीटर भूभाग पर फैला दुधवा टाइगर रिजर्व केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, दुर्लभ वन्यजीवों लिए भी दुनिया में प्रसिद्ध है। दुधवा की पारिस्थितिकी इतनी अनुकूल है कि देश के अंदर पाई जाने वाली वन्यजीवों की प्रजातियों में अधिकांश प्रजातियां दुधवा टाइगर रिजर्व में मौजूद हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में वुडलैंड 66, ग्रासलैंड 21 और 13 फीसदी वेटलैंड है। यह सब मिलकर वन्यजीवों के प्राकृतवास के लिए अनुकूल वातावरण पैदा करता है। यहां 107 से अधिक बाघ हैं तो हिरनों की भी बड़ी संख्या है। दुधवा टाइगर रिजर्व में एक साथ पांच प्रजातियों बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा सांभर और काकड़ प्रजातियों के हिरन यहां पाए जाते हैं। एक साथ इतनी प्रजातियों के हिरन देश में दूसरी किसी जगह नहीं मिलते। इनके अलावा बड़ी संख्या में तेंदुए भी यहां मौजूद हैं। बाघों के भोजन के लिए हिरन ही नहीं जंगली सुअर की भी बड़ी संख्या है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में 400 प्रजातियों के पक्षी सूचीबद्ध हैं। इनमें सबसे दुर्लभ बंगाल फ्लोरिकन की मौजूदगी दुधवा को विशेष बनाती है। भले ही इनकी संख्या कम हो लेकिन इनका दुधवा में मौजूद रहना ही खास है। दुधवा की पारिस्थितिकी की अनुकूलता का ही यह परिणाम है कि हर साल नेपाल से बड़ी संख्या में जंगली हाथी आकर यहां प्रवास करते हैं। हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर ठंडे देशों के हजारों रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदे आकर दुधवा दुधवा के जलाशयों में चार माह के लिए अपना बसेरा बनाते हैं। बड़ी संख्या में भालू भी यहां पाए जाते हैं।
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तीन साल पहले यहां ट्री फ्रॉग और दुर्लभ प्रजाति के आर्किड नामक पौधे की खोज की गई थी। दुधवा की गेरूआ नदी में बड़ी संख्या में डॉल्फिन हैं। इसी के चलते कतर्निया घाट ( वन्यजीव प्रभाग) में डॉल्फिन रेस्क्यू सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया है। कतर्निया घाट में मगरमच्छ प्रजनन केंद्र संचालित है। जो मगरमच्छों और घड़ियालों की संख्या बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
दुधवा में फल-फूल रहा गैंडों का परिवार
दुधवा टाइगर रिजर्व में वर्ष 1984 में शुरू की गई गैंडा पुनर्वासन योजना अपनी सफलता की बुलंदी छू चुकी है। पांच गैंडों से शुरू की गई इस परियोजना में संख्या बढ़कर 45 हो गई है। अब इन्हें सौर ऊर्जा चालित बाड़ से आजाद कर जंगल में स्वछंद छोड़ने की तैयारी है। जिसके लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है।


दुधवा की अनुकूल पारिस्थितिकी के चलते यह जैवविविधता के मामले में देश का सबसे समृद्ध टाइगर रिजर्व है। यहां थलचर,जलतर और नवचर सभी प्रकार के दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
- बी प्रभाकर, दुधवा टाइगर रिजर्व

दुधवा की स्वस्थ पारिस्थितिकी से बढ़ा हिरन प्रजाति का कुनबा।

दुधवा की स्वस्थ पारिस्थितिकी से बढ़ा हिरन प्रजाति का कुनबा।

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