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मेहमान पक्षियों से जलाशय गुलजार
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी) से सटी नगरा झील में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदे। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की महुरेना बीट जंगल से सटा नगरा ताल इन दिनों रंग-बिरंगे मेहमान पक्षियों के कलरव से गुलजार होने लगा है। सर्दियों की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर मेहमान पक्षी यहां आ गए हैं।
सर्दियों की आहट के साथ ही ठंडे देशों से आए प्रवासी पक्षियों ने बांकेगंज कस्बा के निकट जंगल से सटे नगरा ताल जिसे धनुषाकार होनेेे के करण धनुहा ताल भी कहते हैं को अपना बसेरा बना लिया है। वन विभाग ने इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। वन कर्मियों की टीम गठित कर निगरानी की जा रही है। सर्दियों के मौसम में नगरा ताल चार महीने तक रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहता है। ये परिंदे सरोवर के चारों तरफ लगे घने पेड़ों पर अपने घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं और अंडे देते हैं। जाड़ा खत्म होने तक इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं। तब यह प्रवासी पक्षी झुंड में अपने वतन लौट जाते हैं।
डीडी डीटीआर बफरजोन डॉ अनिल कुमार पटेल का कहना है कि मैलानी रेंज की नगरिया झील में ठंडे देशों से प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। वन कर्मियों की टीम उन जलाशयों पर बराबर निगरानी कर रही है जहां प्रवासी पक्षी आते हैं। नगरा झील के लिए वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं। जो बारी-बारी से चौबीस घंटे निगरानी करेंगी। पकड़े जाने पर शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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यहां मिलता है अनुकूल वातावरण
नगरा का विशालकाय जलाशय घने जंगल, घास के मैदान इन्हें प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं। जलाशयों और जंगलों से इन्हें पर्याप्त और पसंदीदा भोजन और घोंसले बनाने के लिए घने पेड़ मिलते हैं। मौसम भी अनुकूल रहता है। यही कारण है कि प्रवासी पक्षी हर साल बड़ी संख्या में यहां आते हैं।
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नगरा झील में आते हैं यह विदेशी पक्षी
बांकेगंज कस्बा से सटे नगरा तालाब में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन, लद्दाख, तिब्बत से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट विल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राहमानी डक, कूट, मूर हेन, अबलक गुर्चिया बत्तख आदि शामिल हैं। संवाद
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सर्दियों की आहट के साथ ही ठंडे देशों से आए प्रवासी पक्षियों ने बांकेगंज कस्बा के निकट जंगल से सटे नगरा ताल जिसे धनुषाकार होनेेे के करण धनुहा ताल भी कहते हैं को अपना बसेरा बना लिया है। वन विभाग ने इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। वन कर्मियों की टीम गठित कर निगरानी की जा रही है। सर्दियों के मौसम में नगरा ताल चार महीने तक रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहता है। ये परिंदे सरोवर के चारों तरफ लगे घने पेड़ों पर अपने घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं और अंडे देते हैं। जाड़ा खत्म होने तक इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं। तब यह प्रवासी पक्षी झुंड में अपने वतन लौट जाते हैं।
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डीडी डीटीआर बफरजोन डॉ अनिल कुमार पटेल का कहना है कि मैलानी रेंज की नगरिया झील में ठंडे देशों से प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। वन कर्मियों की टीम उन जलाशयों पर बराबर निगरानी कर रही है जहां प्रवासी पक्षी आते हैं। नगरा झील के लिए वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं। जो बारी-बारी से चौबीस घंटे निगरानी करेंगी। पकड़े जाने पर शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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यहां मिलता है अनुकूल वातावरण
नगरा का विशालकाय जलाशय घने जंगल, घास के मैदान इन्हें प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हैं। जलाशयों और जंगलों से इन्हें पर्याप्त और पसंदीदा भोजन और घोंसले बनाने के लिए घने पेड़ मिलते हैं। मौसम भी अनुकूल रहता है। यही कारण है कि प्रवासी पक्षी हर साल बड़ी संख्या में यहां आते हैं।
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नगरा झील में आते हैं यह विदेशी पक्षी
बांकेगंज कस्बा से सटे नगरा तालाब में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन, लद्दाख, तिब्बत से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट विल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राहमानी डक, कूट, मूर हेन, अबलक गुर्चिया बत्तख आदि शामिल हैं। संवाद