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Lakhimpur Kheri News: डॉक्टर नदारद, मायूस होकर लौट रहे मरीज
Wed, 12 Jun 2024 03:06 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 12 Jun 2024 03:06 AM IST
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दोपहर ड़ढ़े बजे के बाद ओपीडी हॉल में बैठे मरीज, ओपीडी कक्ष में लटकते ताले।संवाद
ओयल। जिला अस्पताल एमसीएच विंग की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। चिकित्सक मनमाने समय पर आते हैं और समय से पहले ही चले जाते हैं।
एमसीएच विंग ओयल स्थित जिला अस्पताल में रोजाना दो से ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं। मगर यहां के अधिकांश डॉक्टर निर्धारित समय से पहले ही कक्ष छोड़कर चले जाते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर 1147 नए मरीजों ने पंजीकरण करवाया। दोपहर 1.30 बजे की गई पड़ताल में अस्पताल में तैनात अधिकांश डॉक्टरों के कक्ष में ताला लटकता नजर आया।
वहीं कुछ तो ओपीडी कक्ष खुला छोड़कर ही चले गए थे। डॉक्टरों के इस रवैये से जनपद के दूरदराज इलाके से जिला अस्पताल पहुंचे मरीज निराश होकर लौट गए। मरीजों ने बताया कि सुबह भी डॉक्टर समय से ओपीडी में नहीं आते। उनके कक्ष में बैठे सहयोगी पूछने पर बताते हैं कि डॉक्टर साहब राउंड पर हैं।
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इस बारे में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर राजकुमार कोली ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे के बाद ओपीडी में मरीज नहीं बचे थे, इसलिए डॉक्टर कॉल पर वार्डों में मरीज देखने गए थे।
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एमसीएच विंग ओयल स्थित जिला अस्पताल में रोजाना दो से ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं। मगर यहां के अधिकांश डॉक्टर निर्धारित समय से पहले ही कक्ष छोड़कर चले जाते हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर 1147 नए मरीजों ने पंजीकरण करवाया। दोपहर 1.30 बजे की गई पड़ताल में अस्पताल में तैनात अधिकांश डॉक्टरों के कक्ष में ताला लटकता नजर आया।
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वहीं कुछ तो ओपीडी कक्ष खुला छोड़कर ही चले गए थे। डॉक्टरों के इस रवैये से जनपद के दूरदराज इलाके से जिला अस्पताल पहुंचे मरीज निराश होकर लौट गए। मरीजों ने बताया कि सुबह भी डॉक्टर समय से ओपीडी में नहीं आते। उनके कक्ष में बैठे सहयोगी पूछने पर बताते हैं कि डॉक्टर साहब राउंड पर हैं।
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इस बारे में जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर राजकुमार कोली ने बताया कि दोपहर डेढ़ बजे के बाद ओपीडी में मरीज नहीं बचे थे, इसलिए डॉक्टर कॉल पर वार्डों में मरीज देखने गए थे।

दोपहर ड़ढ़े बजे के बाद ओपीडी हॉल में बैठे मरीज, ओपीडी कक्ष में लटकते ताले।संवाद