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Lakhimpur Kheri News: कुत्ते के काटने के बाद सामान्य घाव को भी न करें नजरअंदाज

Sun, 28 Sep 2025 05:56 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 28 Sep 2025 05:56 AM IST
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Do not ignore even a minor wound after a dog bite
लखीमपुर खीरी। कुत्ते के काटने के मामले में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अक्सर लोग छोटे घाव को सामान्य समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, लेकिन यह गंभीर संक्रमण और रेबीज जैसी खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकता है। मरीज की जान भी जा सकती है।
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सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और इससे बचाव के उपायों को बढ़ावा देने के लिए 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मानाया जाता है। संक्रमित जानवरों खासकर कुत्तों के काटने व रेबीज ग्रसित बिल्ली, बंदर, नेवला, सियार और अन्य गर्म रक्त वाले स्तनधारी जानवरों के काटने से रेबीज हो सकता है। यदि समय पर उपचार न किया जाए तो व्यक्ति की जान जा सकती है।
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बताया कि कुत्ते काटने की वैक्सीन सभी सीएचसी व पीएचसी पर लगाई जाती हैं। शहरी क्षेत्र के सभी अर्बन पीएचसी, जिला महिला चिकित्सालय में एआरवी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं, जिला अस्पताल ओयल को मॉडल एंटी रेबीज क्लीनिक के रूप में विकसित किया गया है, जहां 24 घंटे कुत्ते व जानवरों के काटने का उपचार किया जाता है। जनपद की यह एक मात्र चिकित्सा इकाई है, जहां रेबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिन की सुविधा उपलब्ध है।
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इस कारण हमलावर होते हैं कुत्ते
कुत्ते के काटने के करने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें जब कुत्ते को डर, गुस्सा, खुद की या अपने बच्चों की सुरक्षा करना होता है तो वह हमलावर हो जाते हैं। बेसहारा कुत्ते आमतौर पर अधिक खतरनाक होते हैं, क्योंकि वे बिना टीकाकरण के होते हैं। इससे रेबीज वायरस होने की आशंका अधिक रहती है।
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वर्ष वैक्सीन की लगी डोज

2023 - 69881
2024 - 79033
2025 - 54403 (अब तक)
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ये होते हैं रेबीज के लक्षण
बुखार, सरदर्द, पारी से डर (हाईड्रोफोबिया), तेज हवा से डर (एरोफोबिया), भ्रम, बैचेनी, गले की मांसपेशियों में एठन, लकवा आदि शामिल हैं। ऐसे मामलों में अंततः मरीज की मृत्यु हो जाती है। रेबीज कभी दूसरा अवसर नही देता है। लक्षण प्रकट होने के 8 से 10 दिन में रोगी की मौत हो जाती है।

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बचाव एवं रोकथाम
-कुत्ते के काटते ही घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से 15-20 मिनट तक अच्छे से धोएं। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाएं। यदि जरूरत हो तो रेबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिन भी लगवाएं। पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराएं। बच्चों को बेसहारा कुत्तों से दूर रखें।
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