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धने कोहरे से लिपटी रही शहर की सुबह
लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 24 Jan 2016 05:12 PM IST
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पिछले एक सप्ताह से चल रहे शीतलहर के बाद शनिवार और रविवार को घूप निकलने से मामूली राहत मिली। गुनगुनी धूप निकलने के बावजूद सर्द हवाओं का दौर रविवार को भी जारी रहा। सुबह पूरा जिला घने कोहरे की चादर से लिपटा रहा। कोहरे के कारण दृश्यता कम हो जाने से हेड लाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े। बर्फीली हवाओं के कारण सुबह और शाम काफी गलन रही। लोगों को ठंड से बचाव के अलाव, हीटर या ब्लोअर का सहारा लेना पड़ा।
रविवार को अधिकतम तापमान 16.00 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6.00 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। तापमान में यह बढ़ोतरी धूप निकलने के चलते हुई है। इसके बावजूद सुबह-शाम होने वाली भीषण ठंड के कारण लोग बुरी तरह बेहाल है। लगातार दो दिनों से धूप निकलने के कारण बाजार में रौनक बढ़ गई है लेकिन शाम होते ही ठंड के कारण लोग घरों में दुबक जाते हैं। भीषण ठंड के कारण मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है।
सुबह अपने गांवों से मजदूरी करने के लिए आने वाले लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। दिन भर इधर उधर अपना समय गुजारते हैं। रात को कूड़ा करकट इकट्ठा कर अलाव के सहारे अपनी रात काटने को मजबूर हैं। प्रशासनिक स्तर से अभी तक अलाव जलाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है। कंबल वितरण का काम भी ठप सा है। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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उधर ईसानगर, धौरहरा और तिकुनियां क्षेत्रों के बाढ़ और कटान से विस्थापित पीड़ित खुले आसमान के नीचे बर्फीली हवाओं के थपेड़े झेलने को मजबूर हैं। उनको अभी तक छत भी नसीब नहीं हो पाई है। सड़क किनारे झिल्लियां तान कर वह किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले कुछ और दिनों तक ठंड का यह दौर जारी रहने की आशंका है। इधर कोहरे ने भी कहर ढाना शुरू कर दिया है। यह कोहरा फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है जबकि कोहरे से सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है।
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रविवार को अधिकतम तापमान 16.00 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6.00 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। तापमान में यह बढ़ोतरी धूप निकलने के चलते हुई है। इसके बावजूद सुबह-शाम होने वाली भीषण ठंड के कारण लोग बुरी तरह बेहाल है। लगातार दो दिनों से धूप निकलने के कारण बाजार में रौनक बढ़ गई है लेकिन शाम होते ही ठंड के कारण लोग घरों में दुबक जाते हैं। भीषण ठंड के कारण मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है।
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सुबह अपने गांवों से मजदूरी करने के लिए आने वाले लोगों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। दिन भर इधर उधर अपना समय गुजारते हैं। रात को कूड़ा करकट इकट्ठा कर अलाव के सहारे अपनी रात काटने को मजबूर हैं। प्रशासनिक स्तर से अभी तक अलाव जलाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है। कंबल वितरण का काम भी ठप सा है। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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उधर ईसानगर, धौरहरा और तिकुनियां क्षेत्रों के बाढ़ और कटान से विस्थापित पीड़ित खुले आसमान के नीचे बर्फीली हवाओं के थपेड़े झेलने को मजबूर हैं। उनको अभी तक छत भी नसीब नहीं हो पाई है। सड़क किनारे झिल्लियां तान कर वह किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले कुछ और दिनों तक ठंड का यह दौर जारी रहने की आशंका है। इधर कोहरे ने भी कहर ढाना शुरू कर दिया है। यह कोहरा फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है जबकि कोहरे से सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है।