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मधुमक्खियों के हमले से दिव्यांग चौकीदार की मौत
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मधुमक्खियों के हमले से बुद्धारम के मौत पर रोते बिलखती परिवार की महिलाएं। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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तिकुनिया। कस्बा तिकुनिया के गांव सुथना बरसोला निवासी दिव्यांग बुद्धाराम की मधुमक्खियों के हमले से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
सुथना बरसोला निवासी बुद्धाराम (55) वर्ष कृषि उत्पादन मंडी समिति तिकुनिया में चौकीदार था और गांव से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर सेहनखेड़ा अयोध्या पुरवा मार्ग पर स्थित शान भट्ठे पर अपने बेटे के साथ मजदूरी करता था। शनिवार को सुबह 10:00 बजे अपनी ट्राइसिकल से भट्ठे पर जा रहा था। वह भट्ठे से करीब 500 मीटर की दूरी पर पहुंचा ही था कि इसी बीच रोड के किनारे पीपल के पेड़ पर मंडरा रहे मधुमक्खियों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। दिव्यांग बुद्धाराम भाग भी नहीं पाया और बेहोश होकर ट्राइसिकल से गिर गया। राहगीरों ने उसके बेटे बराती लाल को सूचना दी। बराती लाल जब दौड़कर आया तो देखा उसके पिता बेहोश पड़े थे और मुख में मधुमक्खियां घुसी हुई थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसके बाद लेखपाल मोहन कश्यप ने लिखा पढ़ी की। रविवार को दिव्यांग का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
काश कोई राहगीर बचा लेता जान, दहशत में लोग
जिस वक्त बुद्धाराम पर मधुमक्खियां हमला कर रही थीं उस वक्त तक कोई राहगीर उस तरफ से नहीं निकला। बुद्धाराम के मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल सकी। उधर, मधुमक्खियों के हमले से डरे हुए लोग खेतों में काम पर जाने से डर रहे हैं।
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सुथना बरसोला निवासी बुद्धाराम (55) वर्ष कृषि उत्पादन मंडी समिति तिकुनिया में चौकीदार था और गांव से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर सेहनखेड़ा अयोध्या पुरवा मार्ग पर स्थित शान भट्ठे पर अपने बेटे के साथ मजदूरी करता था। शनिवार को सुबह 10:00 बजे अपनी ट्राइसिकल से भट्ठे पर जा रहा था। वह भट्ठे से करीब 500 मीटर की दूरी पर पहुंचा ही था कि इसी बीच रोड के किनारे पीपल के पेड़ पर मंडरा रहे मधुमक्खियों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। दिव्यांग बुद्धाराम भाग भी नहीं पाया और बेहोश होकर ट्राइसिकल से गिर गया। राहगीरों ने उसके बेटे बराती लाल को सूचना दी। बराती लाल जब दौड़कर आया तो देखा उसके पिता बेहोश पड़े थे और मुख में मधुमक्खियां घुसी हुई थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसके बाद लेखपाल मोहन कश्यप ने लिखा पढ़ी की। रविवार को दिव्यांग का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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काश कोई राहगीर बचा लेता जान, दहशत में लोग
जिस वक्त बुद्धाराम पर मधुमक्खियां हमला कर रही थीं उस वक्त तक कोई राहगीर उस तरफ से नहीं निकला। बुद्धाराम के मदद के लिए चिल्लाता रहा लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल सकी। उधर, मधुमक्खियों के हमले से डरे हुए लोग खेतों में काम पर जाने से डर रहे हैं।
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