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इमला और ब्लैकबोर्ड से कराई नकल
ब्यूरो /निघासन।
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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- हाल बेसिक स्कूल में चल रही परीक्षाओं का
- बीईओ के गोद लिए स्कूल में अव्यवस्थाएं
सोमवार से प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों में परीक्षाएं चली रहीं है। इन परीक्षाओं का हाल बेहद खराब है। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जब स्कूलों में चल रही परीक्षाओं का जायजा लिया तो बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई। किसी स्कूल में गुरुजी इमला बोल रहे थे तो किसी स्कूल में ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को सवाल हल कराए जा रहे थे। सबसे अधिक अव्यवस्था परागी पुरवा तथा बोझिया स्थित खंड शिक्षा अधिकारी के गोद लिए स्कूल में मिली। एक शिक्षक इमला बोलते हुए मिले। परागी पुरवा में एक ही कमरे में दो अध्यापक तथा बोझिया में एक अध्यापिका बच्चों को बुलाकर प्रश्न पत्र हल कराते देखीं गई। वहां लुधौरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को सिटिंग प्लान के अनुसार तथा प्रवेश पत्र देकर बैठाया गया था।
सुबह 9.32 बजे बीआरसी कार्यालय स्थित प्राथमिक विद्यालय
इस स्कूल में सभी बच्चे कतारबद्ध बैठे थे। शिक्षक और शिक्षिकाएं कापी वितरण करने के बाद बच्चों को पेपर दे रहे थे। स्कूल के प्रधानाध्यापक अपनी बाइक को कमरे से बाहर निकाल रहे थे।
सुबह 9.42 बजे परागी पुरवा
यहां पर कक्षा दो में दो अध्यापक बैठे थे। कक्षा तीन और चार खाली थीं। वहां पर बच्चों को कापी दी गई थी, लेकिन पेपर नहीं मिला था। कक्षा दो में बैठे एक गुरुजी बच्चों को इमला बोलकर लिखवा रहे थे। बीईओ के गोद लिए इस स्कूल में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ था।
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सुबह 9.47 बजे बोझिया
बोझिया के उच्च प्राथमिक विद्यालय में गुरुजी बाहर घूम रहे थे। एक अध्यापिका कक्षा छह और सात वालों को अपने पास बुलाकर बच्चों को बता रहीं थी। पड़ोस में स्थित प्राथमिक विद्यालय में सभी बच्चे पेपर दे रहे थे। अध्यापक बच्चों की कापी में हस्ताक्षर कर रहे थे।
सुबह 10 बजे सुक्खन पुरवा
इस विद्यालय के कक्षा पांच में गुरुजी बच्चों का पेपर ब्लैक बोर्ड पर हल करवा रहे थे। विद्यालय में अचानक टीम के प्रवेश करते ही अध्यापक अवधेश पाल टीम को देखकर बोर्ड पर हल गणित के सवाल को मिटाने में जुट गए। इसी प्रांगण में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कमरे से बाहर निकलकर फोन पर बात कर रहे थे। टीम को आता हुआ देखकर आननफानन में बच्चों के पास पहुंचे और उनको क्रमबद्ध करने में लग गए।
10.25 बजे प्राथमिक विद्यालय भिडौरा
यहां पर सभी अध्यापक बातों में मशगूल थे। बच्चे बरामदे में कापी और पेपर लेकर एक दूसरे के साथ खेल रहे थे। यही हाल सिंगाही के बाढियन टोला मोहल्ला में स्थित प्राथमिक विद्यालय का था। यहां पर परीक्षा लेने वालों का पता नहीं था। बच्चे एक दूसरे की कापी के सहारे लिख रहे थे।
दोपहर 2.20 बजे उच्च प्राथमिक विद्यालय लुधौरी
प्रधानाध्यापक पवन उपाध्याय ने अन्य बोर्ड परीक्षाओं की तरह बच्चों के प्रवेश पत्र जारी किया था। परीक्षा के लिए तीन कमरे बनाए गए थे। कक्षा छह बाद में सात और फिर आठ के बच्चों को कमरे में बैठाया गया था। कमरे के बाहर दीवार पर स्कीम के साथ सीटिंग प्लान भी चस्पा था। अनुपस्थित बच्चों की जगह टाट पर छूटी हुई थी। बिना प्रवेश पत्र कोई भी बच्चा इंट्री नहीं कर सकता था।
इमला और बोर्ड पर लिखाने वाले अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा के दौरान ब्लाक क्षेत्र के सभी स्कूलों को चेक किया जाएगा। अव्यवस्था फैलाने वाले शिक्षक और शिक्षकों को बक्शा नहीं जाएगा। - संजय शुक्ला खंड शिक्षा अधिकारी
अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं आते हैं। उन बच्चों को नाम लिखना सिखा रहे थे। इमला नहीं बोल रहे थे। बोर्ड पर गणित के सवाल पहले से लिखे थे उनको मिटा रहे थे। - संबंधित स्कूल के अध्यापक
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- बीईओ के गोद लिए स्कूल में अव्यवस्थाएं
सोमवार से प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों में परीक्षाएं चली रहीं है। इन परीक्षाओं का हाल बेहद खराब है। मंगलवार को अमर उजाला टीम ने जब स्कूलों में चल रही परीक्षाओं का जायजा लिया तो बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई। किसी स्कूल में गुरुजी इमला बोल रहे थे तो किसी स्कूल में ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को सवाल हल कराए जा रहे थे। सबसे अधिक अव्यवस्था परागी पुरवा तथा बोझिया स्थित खंड शिक्षा अधिकारी के गोद लिए स्कूल में मिली। एक शिक्षक इमला बोलते हुए मिले। परागी पुरवा में एक ही कमरे में दो अध्यापक तथा बोझिया में एक अध्यापिका बच्चों को बुलाकर प्रश्न पत्र हल कराते देखीं गई। वहां लुधौरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को सिटिंग प्लान के अनुसार तथा प्रवेश पत्र देकर बैठाया गया था।
सुबह 9.32 बजे बीआरसी कार्यालय स्थित प्राथमिक विद्यालय
इस स्कूल में सभी बच्चे कतारबद्ध बैठे थे। शिक्षक और शिक्षिकाएं कापी वितरण करने के बाद बच्चों को पेपर दे रहे थे। स्कूल के प्रधानाध्यापक अपनी बाइक को कमरे से बाहर निकाल रहे थे।
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सुबह 9.42 बजे परागी पुरवा
यहां पर कक्षा दो में दो अध्यापक बैठे थे। कक्षा तीन और चार खाली थीं। वहां पर बच्चों को कापी दी गई थी, लेकिन पेपर नहीं मिला था। कक्षा दो में बैठे एक गुरुजी बच्चों को इमला बोलकर लिखवा रहे थे। बीईओ के गोद लिए इस स्कूल में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ था।
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सुबह 9.47 बजे बोझिया
बोझिया के उच्च प्राथमिक विद्यालय में गुरुजी बाहर घूम रहे थे। एक अध्यापिका कक्षा छह और सात वालों को अपने पास बुलाकर बच्चों को बता रहीं थी। पड़ोस में स्थित प्राथमिक विद्यालय में सभी बच्चे पेपर दे रहे थे। अध्यापक बच्चों की कापी में हस्ताक्षर कर रहे थे।
सुबह 10 बजे सुक्खन पुरवा
इस विद्यालय के कक्षा पांच में गुरुजी बच्चों का पेपर ब्लैक बोर्ड पर हल करवा रहे थे। विद्यालय में अचानक टीम के प्रवेश करते ही अध्यापक अवधेश पाल टीम को देखकर बोर्ड पर हल गणित के सवाल को मिटाने में जुट गए। इसी प्रांगण में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कमरे से बाहर निकलकर फोन पर बात कर रहे थे। टीम को आता हुआ देखकर आननफानन में बच्चों के पास पहुंचे और उनको क्रमबद्ध करने में लग गए।
10.25 बजे प्राथमिक विद्यालय भिडौरा
यहां पर सभी अध्यापक बातों में मशगूल थे। बच्चे बरामदे में कापी और पेपर लेकर एक दूसरे के साथ खेल रहे थे। यही हाल सिंगाही के बाढियन टोला मोहल्ला में स्थित प्राथमिक विद्यालय का था। यहां पर परीक्षा लेने वालों का पता नहीं था। बच्चे एक दूसरे की कापी के सहारे लिख रहे थे।
दोपहर 2.20 बजे उच्च प्राथमिक विद्यालय लुधौरी
प्रधानाध्यापक पवन उपाध्याय ने अन्य बोर्ड परीक्षाओं की तरह बच्चों के प्रवेश पत्र जारी किया था। परीक्षा के लिए तीन कमरे बनाए गए थे। कक्षा छह बाद में सात और फिर आठ के बच्चों को कमरे में बैठाया गया था। कमरे के बाहर दीवार पर स्कीम के साथ सीटिंग प्लान भी चस्पा था। अनुपस्थित बच्चों की जगह टाट पर छूटी हुई थी। बिना प्रवेश पत्र कोई भी बच्चा इंट्री नहीं कर सकता था।
इमला और बोर्ड पर लिखाने वाले अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा के दौरान ब्लाक क्षेत्र के सभी स्कूलों को चेक किया जाएगा। अव्यवस्था फैलाने वाले शिक्षक और शिक्षकों को बक्शा नहीं जाएगा। - संजय शुक्ला खंड शिक्षा अधिकारी
अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं आते हैं। उन बच्चों को नाम लिखना सिखा रहे थे। इमला नहीं बोल रहे थे। बोर्ड पर गणित के सवाल पहले से लिखे थे उनको मिटा रहे थे। - संबंधित स्कूल के अध्यापक