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चीनी न खाने वाले लोगों के बीच गुड़ से बने उत्पादों की मांग बढ़ी
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ओडीओपी में चयनित गुड़ से बनाई गई मिठाई।
एक जिला एक उत्पाद में शामिल गुड़ के कई उत्पाद बनाकर खीरी दो दिलाई नई पहचान
कोरोना काल में मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर चेतनवीर ने शुरू किया अपना कामधंधा
लखीमपुर खीरी। जब कोरोना काल में रोजगार बचा पाना लोगों के सामने एक चुनौती थी, तब मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर चेतनवीर सिंह ने गुड़ के नए उत्पाद बनाकर जिले को एक पहचान दिलाई। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल गुड़ से बनी काजू-बादाम लगी मिठाई, सोंठ गुड़ बनाने से लेकर गुड़ का भूरा लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यह उत्पाद उन लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं जो चीनी नहीं खा सकते।
मकसोहा परसिया घाट निवासी चेतनवीर सिंह मर्चेंट नेवी में थर्ड इंजन ऑफिसर थे। कोरोना काल में नौकरी छोड़कर गांव में ही गुड़ कोल्हू चलाने का निर्णय लिया। इसके लिए मुजफ्फरनगर जाकर उन्होंने गुड़ व्यवसाय के गुर सीखे। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य देने के लिए जूस रिकवरी मीटर खरीदा, जिससे गन्ने से कितना गुड़ तैयार होगा, इसका आसानी से आकलन करके वह किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करते हैं।
250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल खरीदते हैं गन्ना
वर्तमान में ज्यादातर गुड़ कोल्हू संचालक किसानों से 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीदकर घाटे में जाने की बात कहते हैं, वहीं चेतनवीर किसानों को 250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देकर उन्हें मुनाफा कराते हैं।
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आधुनिक मशीनों से लैस गुड़ कोल्हू पर 20 लाख आई लागत
चेतनवीर बताते हैं कि ओडीओपी में गुड़ के शामिल होने से सरकार द्वारा भी इसे प्रमोट किया जा रहा है, जिससे क्वालिटी गुड़ बनाने के लिए आधुनिक मशीनों को लगाने के लिए बाजार को भी खंगाला। उन्होंने बताया कि ड्रायर की कीमत 10 लाख रुपये थी तो उन्होंने टिन की चादर मुजफ्फरनगर से और गियर दिल्ली के मायापुरी से खरीदा। इससे मात्र चार लाख रुपये में ड्रायर तैयार हो गया। चेतन ने बताया कि जैविक गुड़ बना रहे हैं। लखनऊ में हुए गुड़ महोत्सव में भी प्रतिभाग कर चुके हैं। हालांकि चेतनवीर को फूड का लाइसेंस मिलने में आ रही अड़चन ने अब तक मायूस किया है, क्योंकि एफएसएसएआई से लाइसेंस मिलने के बाद ही अपने उत्पादों को दूसरे जनपदों में सप्लाई कर पाएंगे।
यह गुड़ कोल्हू खास तकनीकी सुविधाओं से है लैस
आमतौर पर गांवों में लगे देशी गुड़ कोल्हू से अलग चेतनवीर ने अपने गुड़ कोल्हू को खास तकनीकी सुविधाओं से लैस किया है, जिससे इसके संचालन पर मौसम का भी कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है। आधा बीघा जमीन में इसका आसानी से संचालन किया जा रहा है। खोई सूखने के लिए अतिरिक्त खेत की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसमें खोई को सुखाने के लिए ड्रायर सिस्टम लगाया गया है, जिससे अतिरिक्त लेवरों की समस्या नहीं होती। चिमनी से निकलने वाले धुएं को ड्रायर में ले जाते हैं, जिससे खोई सूखती है और धुएं के साथ वायुमंडल में जाने वाला हानिकारक प्रदूषण भी कम होता है। गन्ना में शुगर लेवल चेक करने के बाद ही गन्ना खरीद और मूल्य निर्धारण होता है। कढ़ाई में एक्स्ट्रा स्टीम हीटिंग सिस्टम लगा होने से जूस का लगभग 30 से 35 प्रतिशत वाष्पित होने से उत्पादन क्षमता में वृद्घि होती है। इस कोल्हू को चलाने में छह से आठ लोगों की जरूतर पड़ती है, जबकि सामान्य कोल्हू के संचालन में 12 से 13 लेवर की जरूरत पड़ती है।
जनपद की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के कारण इससे जुड़े उद्योगों के फलने-फूलने की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद में गुड़ को शामिल किया है, जिसके बाद युवा उद्यमी आगे आएं हैं। गुणवत्तापरक उत्पादन के लिहाज से गुड़ का उत्पादन अभी पहचान बनाने की प्रक्रिया में है, जिसमें चेतनवीर सिंह ने अच्छा प्रयास किया है। चीनी से परहेज कर रहे लोग गुड़ उत्पादों की डिमांड कर रहे हैं।
- संजय सिंह, उपायुक्त, उद्योग
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कोरोना काल में मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर चेतनवीर ने शुरू किया अपना कामधंधा
लखीमपुर खीरी। जब कोरोना काल में रोजगार बचा पाना लोगों के सामने एक चुनौती थी, तब मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर चेतनवीर सिंह ने गुड़ के नए उत्पाद बनाकर जिले को एक पहचान दिलाई। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल गुड़ से बनी काजू-बादाम लगी मिठाई, सोंठ गुड़ बनाने से लेकर गुड़ का भूरा लोगों को खूब पसंद आ रहा है। यह उत्पाद उन लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं जो चीनी नहीं खा सकते।
मकसोहा परसिया घाट निवासी चेतनवीर सिंह मर्चेंट नेवी में थर्ड इंजन ऑफिसर थे। कोरोना काल में नौकरी छोड़कर गांव में ही गुड़ कोल्हू चलाने का निर्णय लिया। इसके लिए मुजफ्फरनगर जाकर उन्होंने गुड़ व्यवसाय के गुर सीखे। किसानों को गन्ने का उचित मूल्य देने के लिए जूस रिकवरी मीटर खरीदा, जिससे गन्ने से कितना गुड़ तैयार होगा, इसका आसानी से आकलन करके वह किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करते हैं।
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250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल खरीदते हैं गन्ना
वर्तमान में ज्यादातर गुड़ कोल्हू संचालक किसानों से 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना खरीदकर घाटे में जाने की बात कहते हैं, वहीं चेतनवीर किसानों को 250 से 270 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देकर उन्हें मुनाफा कराते हैं।
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आधुनिक मशीनों से लैस गुड़ कोल्हू पर 20 लाख आई लागत
चेतनवीर बताते हैं कि ओडीओपी में गुड़ के शामिल होने से सरकार द्वारा भी इसे प्रमोट किया जा रहा है, जिससे क्वालिटी गुड़ बनाने के लिए आधुनिक मशीनों को लगाने के लिए बाजार को भी खंगाला। उन्होंने बताया कि ड्रायर की कीमत 10 लाख रुपये थी तो उन्होंने टिन की चादर मुजफ्फरनगर से और गियर दिल्ली के मायापुरी से खरीदा। इससे मात्र चार लाख रुपये में ड्रायर तैयार हो गया। चेतन ने बताया कि जैविक गुड़ बना रहे हैं। लखनऊ में हुए गुड़ महोत्सव में भी प्रतिभाग कर चुके हैं। हालांकि चेतनवीर को फूड का लाइसेंस मिलने में आ रही अड़चन ने अब तक मायूस किया है, क्योंकि एफएसएसएआई से लाइसेंस मिलने के बाद ही अपने उत्पादों को दूसरे जनपदों में सप्लाई कर पाएंगे।
यह गुड़ कोल्हू खास तकनीकी सुविधाओं से है लैस
आमतौर पर गांवों में लगे देशी गुड़ कोल्हू से अलग चेतनवीर ने अपने गुड़ कोल्हू को खास तकनीकी सुविधाओं से लैस किया है, जिससे इसके संचालन पर मौसम का भी कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है। आधा बीघा जमीन में इसका आसानी से संचालन किया जा रहा है। खोई सूखने के लिए अतिरिक्त खेत की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसमें खोई को सुखाने के लिए ड्रायर सिस्टम लगाया गया है, जिससे अतिरिक्त लेवरों की समस्या नहीं होती। चिमनी से निकलने वाले धुएं को ड्रायर में ले जाते हैं, जिससे खोई सूखती है और धुएं के साथ वायुमंडल में जाने वाला हानिकारक प्रदूषण भी कम होता है। गन्ना में शुगर लेवल चेक करने के बाद ही गन्ना खरीद और मूल्य निर्धारण होता है। कढ़ाई में एक्स्ट्रा स्टीम हीटिंग सिस्टम लगा होने से जूस का लगभग 30 से 35 प्रतिशत वाष्पित होने से उत्पादन क्षमता में वृद्घि होती है। इस कोल्हू को चलाने में छह से आठ लोगों की जरूतर पड़ती है, जबकि सामान्य कोल्हू के संचालन में 12 से 13 लेवर की जरूरत पड़ती है।
जनपद की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के कारण इससे जुड़े उद्योगों के फलने-फूलने की सबसे अधिक संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद में गुड़ को शामिल किया है, जिसके बाद युवा उद्यमी आगे आएं हैं। गुणवत्तापरक उत्पादन के लिहाज से गुड़ का उत्पादन अभी पहचान बनाने की प्रक्रिया में है, जिसमें चेतनवीर सिंह ने अच्छा प्रयास किया है। चीनी से परहेज कर रहे लोग गुड़ उत्पादों की डिमांड कर रहे हैं।
- संजय सिंह, उपायुक्त, उद्योग