{"_id":"898f6ef88eb7963296043a39bfcc9e4b","slug":"dear-s-child-injured-in-forest-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घायल पाढ़े का इलाज कराकर जंगल में छोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घायल पाढ़े का इलाज कराकर जंगल में छोड़ा
लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 07 Mar 2015 04:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुत्तों के हमले से घायल एक पाढ़े को वनकर्मियों ने इलाज कराने के बाद जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। यह पाढ़ा कुत्तों के हमले से घायल होने के बाद मोहम्मदी रेंज के अल्लीपुर गांव निवासी डालचंद्र के घर में घुस गया था। सूचना मिलने पर वनकर्मियों ने मौके पर पहुंच कर उसका इलाज कराया।
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि यह पाढ़ा पांच मार्च की सुबह जंगल से भटकर गन्ने के खेतों में आ गया। जहां कुत्तों ने हमलाकर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। किसी तरह भाग कर यह पाढ़ा अल्लीपुर गांव निवासी डालचंद्र के घर में घुस गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मी पाढ़े को डालचंद्र के घर से उठाकर महेशपुर रेंज लाए। परीक्षण के दौरान पाया गया कि पाढ़े के अगले पैर में घाव है।
वनकर्मियों ने तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाकर पाढ़े का इलाज कराया। डीएफओ ने बताया कि पाढ़े के स्वस्थ होने के बाद इसे महेशपुर रेंज के देवीपुर बीट के जंगल में छोड़ दिया गया। रेस्क्यू टीम में फारेस्टर कुदरत अली, राम प्रकाश, रामआसरे राठौर, फारेस्ट गार्ड जयराम और वाचर सोहन वनकर्मी शामिल रहे।
विज्ञापन
डीएफओ ने बताया कि पाढ़े की आयु करीब चार-पांच साल है और इसका वजन करीब 50 किलोग्राम है। उन्होंने बताया कि पाढ़ा (हाग डियर) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुसूची तीन में शामिल है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में यह बहुत कम संख्या में मिलते हैं।
विज्ञापन
डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि यह पाढ़ा पांच मार्च की सुबह जंगल से भटकर गन्ने के खेतों में आ गया। जहां कुत्तों ने हमलाकर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। किसी तरह भाग कर यह पाढ़ा अल्लीपुर गांव निवासी डालचंद्र के घर में घुस गया। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंचे वनकर्मी पाढ़े को डालचंद्र के घर से उठाकर महेशपुर रेंज लाए। परीक्षण के दौरान पाया गया कि पाढ़े के अगले पैर में घाव है।
विज्ञापन
वनकर्मियों ने तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाकर पाढ़े का इलाज कराया। डीएफओ ने बताया कि पाढ़े के स्वस्थ होने के बाद इसे महेशपुर रेंज के देवीपुर बीट के जंगल में छोड़ दिया गया। रेस्क्यू टीम में फारेस्टर कुदरत अली, राम प्रकाश, रामआसरे राठौर, फारेस्ट गार्ड जयराम और वाचर सोहन वनकर्मी शामिल रहे।
विज्ञापन
डीएफओ ने बताया कि पाढ़े की आयु करीब चार-पांच साल है और इसका वजन करीब 50 किलोग्राम है। उन्होंने बताया कि पाढ़ा (हाग डियर) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुसूची तीन में शामिल है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में यह बहुत कम संख्या में मिलते हैं।