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दिन भर खड़े रहे कतार में फिर भी जेब रही खाली
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 01 Dec 2016 11:43 PM IST
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बैंक
- फोटो : अमर उजाला
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-बैंकों में पर्याप्त करेंसी नहीं, वेतन
और पेंशन पाने से रहे वंचित
-शहर में कुछ एटीएम ही चले, कैश को रही मारामारी
माह के पहले दिन बैंक खातों में वेतन और पेंशन पहुंचने के बाद भी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब खाली रही। बैंकों में घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी उन्हें कैश नहीं मिल पाया। अधिकतर बैंकों में कैश न होने की बात कहकर ग्राहकों टरका दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में भी कैश न होने से कामकाज ठप रहा।
माह का पहला दिन होने के कारण गुरुवार को बैंकों में धन निकासी करने वाले लोगों की भीड़ कुछ ज्यादा ही थी। अधिकतर कर्मचारियों और पेंशनरों का वेतन उनके खातों में भेजा जा चुका है। गुरुवार को जब कर्मचारी बैंक से अपना पैसा निकालने पहुंचे तो अधिकतर बैंकों में कैश की कमी के चलते थोड़ा-थोड़ा पैसा निकाला जा सका। बैंक खातों में पैसा होने के बावजूद जेब खाली रही।
बुधवार को अधिकतर एटीएम बंद रहे जो चल रहे थे उनमें लंबी-लंबी कतार लगी रहीं। कुछ में दोपहर तक तो कुछ में शाम तक कैश खत्म हो जाने से लोगों को निराशा हुई। स्टेट बैंक में अपनी पेंशन लेने पहुंचे कई रिटायर्ड कर्मचारियों को बताया गया कि अब तक उनकी पेंशन उनके खाते में नहीं पहुंची है। इससे वे निराश हुए।
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गोला गोकर्णनाथ। नोटबंदी के 23 दिन बाद भी बैंकों में कैश की समस्या बरकरार है। जिससे खातेदारों को पर्याप्त धन का भुगतान नहीं हो पा रहा है वहीं माह की पहली तारीख होने पर कर्मचारियों को बैंकों से अपने वेतन का भुगतान भी पूरा नहीं मिल पाया। बैंक मैनेजरों की माने तो बैंकों को आरबीआई से पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है जिससे वह चाह कर भी अपने ग्राहकों और खातेदारों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। कैश की कमी के कारण बैंकों के नगर में गिनती के एटीएम चल पा रहे हैं। वह भी कुछ देर के बाद कैश खत्म होने पर बंद हो जाते हैं।
इलाहाबाद बैंक में मैनेजर रूपेश कुमार ने बताया कि कैश की कमी के कारण वह खातेदारों को दो हजार और सैलरी पेमेंट में चार हजार रुपये का भुगतान कर पाए हैं। वहीं एसबीआई में खातेदारों, सैलरी पेमेंट में 10 हजार रुपये दिए गए। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन, कारपोरेशन, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया आदि बैंकों में कैश कमी के चलते जरूरतमंदों को निर्धारित धनराशि से कम भुगतान लेकर संतोष करना पड़ा है।
तिकुनियां। कस्बे की बैंकों में कैश न होने के चलते ग्राहक रोज लौट रहे हैं इसके चलते किसान और मजदूर दोनो के सामने आर्थिक संकट आ गया है। लोगों का आरोप है कि रसूखदार लोगों को भारी भरकम कैश दिया जा रहा है।
सिकंद्राबाद। कस्बे की पंजाब नेशनल बैँक में गुरुवार को छठे दिन भी सैकड़ों ग्राहकों को बिना कैश के बैरंग वापस होना पड़ा। उन्हें भुगतान मिला उसमें 20 रुपये के नोटों की गड्डियां थी। इनमें अधिकतर नोट फटे निकले। करीब दो बजे बैंक में कैश खत्म हो गया। सैकड़ों लोग कैश न मिलने से मायूस हुए।
लाइन में लगे लोगों पर पुलिस ने लाठियां भांजी
ईसानगर। कस्बे की बैंक में ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही ने लाइन में लगे ग्राहकों पर लाठियां भांजना शुरू कर दीं। इससे कुछ समय के लिए बैंक में अफरा-तफरी का माहौल रहा। सिपाही के गुस्से का शिकार हुए लोगों ने एसओ को प्रार्थनापत्र देकर सिपाही के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की हौ। हसनपुर कटौली की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में पिछले तीन दिनों से कैश न होने से लोग परेशान थे। गुरुवार को बैंक खुलने से पहले ही लोगों की लाइन लग गई थी। बैंक खुलने के बाद करीब 11 बजे बैंक पर मौजूद सिपाही जेपी सिंह बेतरतीब लगी लाइन पर बिफर पड़ा। सिपाही ने लाठियां भांजना शुरू कर दीं। सिपाही के दुर्व्यवहार से बैंक में मौजूद गुस्साई भीड़ ने जमकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। भुक्तभोगी मोहम्मद रहीश, रोशनजहां, शाहबाज, आजाद, महबूब, एजाज, बृजेश कुमार, कुलदीप कुमार, फिरोज अली, कफील अहमद, जयशंकर, महबूबा, रामलाल ने एसओ को तहरीर देकर सिपाही के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। एसओ शिवानंद यादव ने बताया कि सिपाही के विरुद्ध जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
विधायक ने बैंकों में भुगतान का जायजा लिया
ईसानगर। धौरहरा के बसपा विधायक शमशेर बहादुर ने बैंक मैनेजर वीके सैनी से कैश और भुगतान की जानकारी ली। चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली।
बैंक में घुसने से मना करने पर पुलिस से भिड़ी महिला
बग्घून। ककरहा बैंक में दोपहर को गांव भगौतीपुर निवासी जयसिंह की पत्नी केतुका गांव गोकन निवासी अपने दामाद वीर सिंह के साथ खाते में रुपये जमा करने आई थी। बैंक में घुसते समय बाहर तैनात पुलिस कर्मियों ने उसे लाइन में लगने को कहकर अंदर जाने से मना कर दिया। इस पर केतुका बिफर पड़ी। बात बढ़ने पर पुलिस कर्मियों के साथ उसकी और उसके दामाद की हाथापाई होने लगी। किसी तरह लोगों के हस्तक्षेप करने पर मामला शांत हुआ।
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और पेंशन पाने से रहे वंचित
-शहर में कुछ एटीएम ही चले, कैश को रही मारामारी
माह के पहले दिन बैंक खातों में वेतन और पेंशन पहुंचने के बाद भी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब खाली रही। बैंकों में घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी उन्हें कैश नहीं मिल पाया। अधिकतर बैंकों में कैश न होने की बात कहकर ग्राहकों टरका दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में भी कैश न होने से कामकाज ठप रहा।
माह का पहला दिन होने के कारण गुरुवार को बैंकों में धन निकासी करने वाले लोगों की भीड़ कुछ ज्यादा ही थी। अधिकतर कर्मचारियों और पेंशनरों का वेतन उनके खातों में भेजा जा चुका है। गुरुवार को जब कर्मचारी बैंक से अपना पैसा निकालने पहुंचे तो अधिकतर बैंकों में कैश की कमी के चलते थोड़ा-थोड़ा पैसा निकाला जा सका। बैंक खातों में पैसा होने के बावजूद जेब खाली रही।
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बुधवार को अधिकतर एटीएम बंद रहे जो चल रहे थे उनमें लंबी-लंबी कतार लगी रहीं। कुछ में दोपहर तक तो कुछ में शाम तक कैश खत्म हो जाने से लोगों को निराशा हुई। स्टेट बैंक में अपनी पेंशन लेने पहुंचे कई रिटायर्ड कर्मचारियों को बताया गया कि अब तक उनकी पेंशन उनके खाते में नहीं पहुंची है। इससे वे निराश हुए।
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गोला गोकर्णनाथ। नोटबंदी के 23 दिन बाद भी बैंकों में कैश की समस्या बरकरार है। जिससे खातेदारों को पर्याप्त धन का भुगतान नहीं हो पा रहा है वहीं माह की पहली तारीख होने पर कर्मचारियों को बैंकों से अपने वेतन का भुगतान भी पूरा नहीं मिल पाया। बैंक मैनेजरों की माने तो बैंकों को आरबीआई से पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है जिससे वह चाह कर भी अपने ग्राहकों और खातेदारों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं। कैश की कमी के कारण बैंकों के नगर में गिनती के एटीएम चल पा रहे हैं। वह भी कुछ देर के बाद कैश खत्म होने पर बंद हो जाते हैं।
इलाहाबाद बैंक में मैनेजर रूपेश कुमार ने बताया कि कैश की कमी के कारण वह खातेदारों को दो हजार और सैलरी पेमेंट में चार हजार रुपये का भुगतान कर पाए हैं। वहीं एसबीआई में खातेदारों, सैलरी पेमेंट में 10 हजार रुपये दिए गए। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन, कारपोरेशन, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया आदि बैंकों में कैश कमी के चलते जरूरतमंदों को निर्धारित धनराशि से कम भुगतान लेकर संतोष करना पड़ा है।
तिकुनियां। कस्बे की बैंकों में कैश न होने के चलते ग्राहक रोज लौट रहे हैं इसके चलते किसान और मजदूर दोनो के सामने आर्थिक संकट आ गया है। लोगों का आरोप है कि रसूखदार लोगों को भारी भरकम कैश दिया जा रहा है।
सिकंद्राबाद। कस्बे की पंजाब नेशनल बैँक में गुरुवार को छठे दिन भी सैकड़ों ग्राहकों को बिना कैश के बैरंग वापस होना पड़ा। उन्हें भुगतान मिला उसमें 20 रुपये के नोटों की गड्डियां थी। इनमें अधिकतर नोट फटे निकले। करीब दो बजे बैंक में कैश खत्म हो गया। सैकड़ों लोग कैश न मिलने से मायूस हुए।
लाइन में लगे लोगों पर पुलिस ने लाठियां भांजी
ईसानगर। कस्बे की बैंक में ड्यूटी पर तैनात एक सिपाही ने लाइन में लगे ग्राहकों पर लाठियां भांजना शुरू कर दीं। इससे कुछ समय के लिए बैंक में अफरा-तफरी का माहौल रहा। सिपाही के गुस्से का शिकार हुए लोगों ने एसओ को प्रार्थनापत्र देकर सिपाही के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की हौ। हसनपुर कटौली की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में पिछले तीन दिनों से कैश न होने से लोग परेशान थे। गुरुवार को बैंक खुलने से पहले ही लोगों की लाइन लग गई थी। बैंक खुलने के बाद करीब 11 बजे बैंक पर मौजूद सिपाही जेपी सिंह बेतरतीब लगी लाइन पर बिफर पड़ा। सिपाही ने लाठियां भांजना शुरू कर दीं। सिपाही के दुर्व्यवहार से बैंक में मौजूद गुस्साई भीड़ ने जमकर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। भुक्तभोगी मोहम्मद रहीश, रोशनजहां, शाहबाज, आजाद, महबूब, एजाज, बृजेश कुमार, कुलदीप कुमार, फिरोज अली, कफील अहमद, जयशंकर, महबूबा, रामलाल ने एसओ को तहरीर देकर सिपाही के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। एसओ शिवानंद यादव ने बताया कि सिपाही के विरुद्ध जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
विधायक ने बैंकों में भुगतान का जायजा लिया
ईसानगर। धौरहरा के बसपा विधायक शमशेर बहादुर ने बैंक मैनेजर वीके सैनी से कैश और भुगतान की जानकारी ली। चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली।
बैंक में घुसने से मना करने पर पुलिस से भिड़ी महिला
बग्घून। ककरहा बैंक में दोपहर को गांव भगौतीपुर निवासी जयसिंह की पत्नी केतुका गांव गोकन निवासी अपने दामाद वीर सिंह के साथ खाते में रुपये जमा करने आई थी। बैंक में घुसते समय बाहर तैनात पुलिस कर्मियों ने उसे लाइन में लगने को कहकर अंदर जाने से मना कर दिया। इस पर केतुका बिफर पड़ी। बात बढ़ने पर पुलिस कर्मियों के साथ उसकी और उसके दामाद की हाथापाई होने लगी। किसी तरह लोगों के हस्तक्षेप करने पर मामला शांत हुआ।