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संस्कृत के बिना असंभव है संस्कारित समाज की कल्पना
लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 10 Jan 2016 05:55 PM IST
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संस्था संस्कृत भारती के तत्वावधान में शहर के मुड़िया महंत मंदिर में आयोजित संस्कृत भाषा बोधन शिविर का रविवार को समापन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने संस्कृत भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
शिविर के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ.ओपी गुप्ता ने कहा कि संस्कृत विश्व की समस्त भाषाओं की जननी है संस्कृत के बिना संस्कारित समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। संस्कृत के उच्चारण से कई प्रकार के रोगों का निवारण हो सकता है। संस्कृत भाषा बोलने से जो ध्वनि तरंगें निकलती हैं वे वातावरण को पवित्र और विषाणु रहत बनाती हैं।
यहां विशिष्टि अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मनोरंजन कर अधिकारी दयाशंकर मिश्र ने संस्कृत को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया। संस्कृत भारती के प्रांत सहमंत्री डॉ.ओंकार नारायण दुबे ने दीक्षांत भाषण में कहाकि संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना अपने हृदय को संतोष देना मात्र है। संस्कृत के अभाव में संस्कृति की रक्षा असंभव है। अत: सबको संस्कृत अवश्य बोलनी होगी। अन्यथा सामाजिक समस्याएं बढ़ती रहेंगी।
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यहां वर्ग शिक्षिका मीनाकुमारी ने बताया कि इस वर्ग में गीत नाटक, खेल आदि के माध्यम से युवाओं को संस्कृत बोलना सिखाया गया। कार्यक्रम का संचालन सुधा वर्मा एवं स्वागत भाषण आकांक्षा श्रीवास्तव ने पढ़ा। कार्यक्रम में डॉ.सत्येंद्र दुबे, हरिप्रकाश त्रिपाठी, राजकिशोर दीक्षित, मनोज मिश्रा, पंकज कृष्ण शास्त्री, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, शरद श्रीवास्तव, और अशोक तोलानी सहित तमाम लोग उपस्थित थे।
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शिविर के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ.ओपी गुप्ता ने कहा कि संस्कृत विश्व की समस्त भाषाओं की जननी है संस्कृत के बिना संस्कारित समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। संस्कृत के उच्चारण से कई प्रकार के रोगों का निवारण हो सकता है। संस्कृत भाषा बोलने से जो ध्वनि तरंगें निकलती हैं वे वातावरण को पवित्र और विषाणु रहत बनाती हैं।
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यहां विशिष्टि अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मनोरंजन कर अधिकारी दयाशंकर मिश्र ने संस्कृत को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया। संस्कृत भारती के प्रांत सहमंत्री डॉ.ओंकार नारायण दुबे ने दीक्षांत भाषण में कहाकि संस्कृत के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना अपने हृदय को संतोष देना मात्र है। संस्कृत के अभाव में संस्कृति की रक्षा असंभव है। अत: सबको संस्कृत अवश्य बोलनी होगी। अन्यथा सामाजिक समस्याएं बढ़ती रहेंगी।
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यहां वर्ग शिक्षिका मीनाकुमारी ने बताया कि इस वर्ग में गीत नाटक, खेल आदि के माध्यम से युवाओं को संस्कृत बोलना सिखाया गया। कार्यक्रम का संचालन सुधा वर्मा एवं स्वागत भाषण आकांक्षा श्रीवास्तव ने पढ़ा। कार्यक्रम में डॉ.सत्येंद्र दुबे, हरिप्रकाश त्रिपाठी, राजकिशोर दीक्षित, मनोज मिश्रा, पंकज कृष्ण शास्त्री, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, शरद श्रीवास्तव, और अशोक तोलानी सहित तमाम लोग उपस्थित थे।