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हत्यारोपी पत्नी को उम्रकैद, जुर्माना भी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 24 Oct 2016 11:28 PM IST
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जेल में भिड़े कैदी
- फोटो : Demo Pic
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घरेलू झगडे़ के चलते पति की हत्या का मामला
आए दिन की कलह और झगड़े के चलते नाबालिग पुत्र के साथ मिलकर पति की हत्या करने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने हत्यारोपी पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम बद्रीपुरवा निवासी नरेंद्र तिवारी के घर में आए दिन उसकी पत्नी विद्यावती से घरेलू कामकाज को लेकर झगड़ा होता था। आरोप है कि 15 जनवरी 2011 की रात दस बजे फिर झगड़ा हुआ तो नरेंद्र की पत्नी विद्यावती ने अपने नाबालिग लड़के की मदद से अंगौछे से पति नरेंद्र की गला घोटकर हत्या कर दी। अगले दिन नरेंद्र के ममेरे भाई सरस्वती प्रसाद शुक्ला ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि हत्या करते हुए गांव के कौशल किशोर और होली ने देखा है। अदालती सुनवाई के दौरान नाबालिग पुत्र की फाइल अलग करते हुए किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वहीं कौशल और होली अपने बयान से मुकर गए तो शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने अर्जी देकर इनके नाम गवाही सूची से कटवा दिए। बाद में अभियोजन के समर्थन में सरस्वती प्रसाद, डॉ. एचजी सिंह, एचसीपी धनीराम वर्मा, एसआई आरपी रावत और इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह की गवाही कोर्ट में दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। कोर्ट ने विद्यावती को दोषसिद्ध करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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आए दिन की कलह और झगड़े के चलते नाबालिग पुत्र के साथ मिलकर पति की हत्या करने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने हत्यारोपी पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम बद्रीपुरवा निवासी नरेंद्र तिवारी के घर में आए दिन उसकी पत्नी विद्यावती से घरेलू कामकाज को लेकर झगड़ा होता था। आरोप है कि 15 जनवरी 2011 की रात दस बजे फिर झगड़ा हुआ तो नरेंद्र की पत्नी विद्यावती ने अपने नाबालिग लड़के की मदद से अंगौछे से पति नरेंद्र की गला घोटकर हत्या कर दी। अगले दिन नरेंद्र के ममेरे भाई सरस्वती प्रसाद शुक्ला ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि हत्या करते हुए गांव के कौशल किशोर और होली ने देखा है। अदालती सुनवाई के दौरान नाबालिग पुत्र की फाइल अलग करते हुए किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। वहीं कौशल और होली अपने बयान से मुकर गए तो शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर ने अर्जी देकर इनके नाम गवाही सूची से कटवा दिए। बाद में अभियोजन के समर्थन में सरस्वती प्रसाद, डॉ. एचजी सिंह, एचसीपी धनीराम वर्मा, एसआई आरपी रावत और इंस्पेक्टर योगेंद्र सिंह की गवाही कोर्ट में दर्ज कराई तथा बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। कोर्ट ने विद्यावती को दोषसिद्ध करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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