{"_id":"b30e177d8e1a512c2f1595721c3b9074","slug":"two-sacks-and-carried-in-a-backpack-recovered-135-turtles-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो बोरियों और एक बैग में ले जाए जा रहे 135 कछुए बरामद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दो बोरियों और एक बैग में ले जाए जा रहे 135 कछुए बरामद
मझगईं
Updated Sun, 09 Aug 2015 07:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निघासन से पलिया आ रही बस से वन विभाग ने दो बोरियों और एक बैग में ले जाए जा रहे 135 कछुए बरामद किए। इन्हें ले जाने वाली एक महिला और युवक का वन अधिनियम के तहत चालान भेज दिया गया है।
रविवार की सुबह वनक्षेत्राधिकारी राधेश्याम को मुखबिर से सूचना मिली कि महिला समेत दो लोग निघासन से बस में कछुए लेकर पलिया जा रहे हैं। इस पर वन विभाग सतर्क हो गया और वन चौकी के पास घेराबंदी कर दी गई। बस को रोककर चेक किया गया तो दो बोरी और एक बैग से जिंदा कछुए बरामद हुए। गिनती की गई तो इनकी संख्या135 निकली। वन विभाग ने 18 वर्षीय युवक और एक महिला को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक ने अपना नाम मिथुन पुत्र महेश और महिला ने राजकुमारी पत्नी प्यारे निवासी ग्राम खैराहनी, थाना निघासन बताया। वन दरोगा के मुताबिक ये कछुए मैलानी पहुंचाए जाने थे, जहां से एक व्यक्ति इन्हें आगे ले जाता। दोनों का वन अधिनियम में चालान भेज दिया गया है।
सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवाएं बनाने में इस्तेमाल किया जाता है कछुआ
पलियाकलां। कछुओं का इस्तेमाल सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवाएं बनाने में किया जाता है। जिसके चलते कछुओं की मांग काफी बढ़ी है और महानगरों में कछुओं की तस्करी का पूरा नेटवर्क चलाया जाता है। विशेषकर कोलकाता में इनकी बिक्री काफी ऊंचे दामों पर होती है। नीम-हकीम, कछुओं को तस्करों से खरीदते हैं फिर वे मुंह मांगे दामों पर दवा बनाकर रोगियों को बेच देते हैं।
विज्ञापन
तराई में तालाबों, पोखरों की संख्या अधिक है और यहां नदियां भी हैं जिनमें कछुओं की तादाद काफी है। तस्करों ने इस गोरखधंधे को कामयाब और सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय लोगों को काम पर लगाया है जो कछुओं को तलाश कर एकत्र करते हैं और फिर उन्हें तस्करों द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचा देते हैं। जंगलों से भी बड़े पैमाने पर कछुए निकाले जाने की खबरें अक्सर मिला करती हैं। तराई में तस्करों के इस मकड़जाल में फंसकर तस्करी करने वालों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
कछुए के मांस को सुखा कर बनाई जाती है दवा
कछुए के मांस को अलग किया जाता है फिर उसे सुखाया जाता है। सुखाने के बाद मांस की बिक्री होती है और फिर उससे दवा तैयार की जाती है। बताते हैं कि करीब दस किलो के कछुए में आधा किलो सूखा मांस निकलता है जिसकी कीमत एक हजार रुपये प्रति किग्रा होती है।
विज्ञापन
रविवार की सुबह वनक्षेत्राधिकारी राधेश्याम को मुखबिर से सूचना मिली कि महिला समेत दो लोग निघासन से बस में कछुए लेकर पलिया जा रहे हैं। इस पर वन विभाग सतर्क हो गया और वन चौकी के पास घेराबंदी कर दी गई। बस को रोककर चेक किया गया तो दो बोरी और एक बैग से जिंदा कछुए बरामद हुए। गिनती की गई तो इनकी संख्या135 निकली। वन विभाग ने 18 वर्षीय युवक और एक महिला को पकड़ लिया। पकड़े गए युवक ने अपना नाम मिथुन पुत्र महेश और महिला ने राजकुमारी पत्नी प्यारे निवासी ग्राम खैराहनी, थाना निघासन बताया। वन दरोगा के मुताबिक ये कछुए मैलानी पहुंचाए जाने थे, जहां से एक व्यक्ति इन्हें आगे ले जाता। दोनों का वन अधिनियम में चालान भेज दिया गया है।
विज्ञापन
सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवाएं बनाने में इस्तेमाल किया जाता है कछुआ
पलियाकलां। कछुओं का इस्तेमाल सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवाएं बनाने में किया जाता है। जिसके चलते कछुओं की मांग काफी बढ़ी है और महानगरों में कछुओं की तस्करी का पूरा नेटवर्क चलाया जाता है। विशेषकर कोलकाता में इनकी बिक्री काफी ऊंचे दामों पर होती है। नीम-हकीम, कछुओं को तस्करों से खरीदते हैं फिर वे मुंह मांगे दामों पर दवा बनाकर रोगियों को बेच देते हैं।
विज्ञापन
तराई में तालाबों, पोखरों की संख्या अधिक है और यहां नदियां भी हैं जिनमें कछुओं की तादाद काफी है। तस्करों ने इस गोरखधंधे को कामयाब और सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय लोगों को काम पर लगाया है जो कछुओं को तलाश कर एकत्र करते हैं और फिर उन्हें तस्करों द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचा देते हैं। जंगलों से भी बड़े पैमाने पर कछुए निकाले जाने की खबरें अक्सर मिला करती हैं। तराई में तस्करों के इस मकड़जाल में फंसकर तस्करी करने वालों की तादाद दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।
कछुए के मांस को सुखा कर बनाई जाती है दवा
कछुए के मांस को अलग किया जाता है फिर उसे सुखाया जाता है। सुखाने के बाद मांस की बिक्री होती है और फिर उससे दवा तैयार की जाती है। बताते हैं कि करीब दस किलो के कछुए में आधा किलो सूखा मांस निकलता है जिसकी कीमत एक हजार रुपये प्रति किग्रा होती है।