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फिर पुराने ठिकाने पर पहुंची आदमखोर बाघिन
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी।
Updated Mon, 29 Aug 2016 12:03 AM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
दो दिनों से नहीं मिली थी कोई लोकेशन, ट्रेंक्युलाइज करने को डटे वनकर्मी
दो दिनों तक चकमा देने के बाद आदमखोर बाघिन रविवार को फिर अपने पुराने ठिकाने गन्ने के खेतों में पहुंच गई। अब वनकर्मी बाघिन को घेरकर उसे ट्रेंक्युलाइज करने की कोशिश में जुटी है।
आदमखोर बाघिन की धमक जिले से लेकर लखनऊ शासन और प्रशासन तक पहुंच गई है। 21 अगस्त से बाघिन को पकड़ने के लिए वन महकमा जुटा हुआ है। मुख्य वन संरक्षक इवा शर्मा भी दो दिनों तक मैलानी में कैंप किए रहीं। इसके अलावा शनिवार को प्रमुख सचिव वन संजीव सरन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उमेंद्र शर्मा, मुख्य वन संरक्षक इवा शर्मा ने छेदीपुर का दौरा कर बाघिन को पकड़ने के लिए अब तक की गई कार्रवाई का जायजा लिया तथा आगे की कार्रवाई के लिए वनकर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश देकर चले गए।
रविवार को बाघिन दोपहर में साढ़े तीन बजे गन्ने के उस खेत से निकली, जहां उसने टीकाराम की जान ली थी और वहां से जंगल के किनारे बने कच्चे रास्ते से होते हुए फिर परसादी के उसी गन्ने के खेत में चली गई, जहां वह बाबूराम को मारकर खींच ले गई थी। तीन दिन पहले एक कुत्ते को मारकर भी बाघिन परसादी के खेत में घसीट ले गई थी। वन विभाग के मुताबिक बाघिन की लोकेशन मिलने के बाद रविवार को दो अलग-अलग जगहों पर पड्डे बांधे जाएंगे, ताकि बाघिन को ट्रेंक्युलाइज किया जा सके। ट्रेंक्युलाइल करने के लिए वनकर्मियों के अलावा डीएफओ संजय बिस्वाल, एसडीओ आरपी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी मैलानी डीएस यादव, गोला, मोहम्मदी भीरा, शारदानगर आदि रेंज के रेंजर, पूर्व रेंजर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट आफताब वली खां और लखनऊ चिड़ियाघर के हेड वेटरनरी सर्जन डॉ उत्कर्ष शुक्ला अपनी टीम के साथ मौके पर डटे हुए हैं। ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू को रविवार को आठ दिन हो गए हैं। बाघिन के पकड़ में न आने से ग्रामीण खेतों में नहीं जा पा रहे हैं, इससे उनकी फसलें चौपट होने के कगार पर पहुंच गईं हैं।
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छेदीपुर में लोगों का तांता
मैलानी। आदमखोर बाघिन को देखने के लिए छेदीपुर में आसपास ही नहीं दूरदराज के क्षेत्रों तक के सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। जिससे ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू में खलल पड़ रहा है। वनकर्मी जहां पर अपना अभियान शुरू करते हैं, वहां से कुछ दूरी पर खासी भीड़ लग जाती है। इससे ऑपरेशन में बाधा पैदा होती है। डीएफओ संजय बिस्वाल का कहना है कि इससे उनका ऑपरेशन गड़बड़ा जाता है। लोगों की आवाजाही और शोरगुल से बाघिन को पकड़ने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि आमजन की आवाजाही और शोरगुल से बाघिन गन्ने के खेतों या जंगल से बाहर नहीं निकलती है। इसके अलावा बाघिन किसी देखने वाले पर हमला न कर दे, यह चिंता भी सताती रहती है।
बाघिन को सुरक्षित पकड़ने के लिए बनीं चार टीमें
बांकेगंज। दक्षिण खीरी वनप्रभाग के मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में दो किसानों की हत्या करने वाली खूनी बाघिन को घेरने और गिरफ्तार करने की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। रणनीति के तहत वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूटीआई, ट्रेंक्युलाइजिंग सहित चार टीमें गठित की गईं है। बाघिन के गर्भवती होने की संभावना के चलते उसे नुकसान पहुंचाए बिना पकड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
शनिवार प्रमुख सचिव वन संजीव सरन के दौरे के बाद बाघिन को पकड़ने के प्रयास में तेजी आई है। बाघिन की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा जंगल के अंदर और बाहरी हिस्सों में बाघिन के संभावित ठिकानों पर बीस जोड़ी आटोमेशन कैमरे भी लगाए जा रहे है। यह कैमरे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना निदेशक दबीर हसन की देखरेख में लगवाए जाएंगे। इसके अलावा वन विभाग ने बाघिन को पकड़ने के लिए चार पिंजरे भी लगाए गए हैं।
ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू के दौरान ग्रामीण या बाहरी लोग घटनास्थल के आसपास न जाएं। ग्रामीण भी खेतों में समूह में जाएं, क्योंकि जब तक बाघिन पकड़ में नहीं आती है, तब तक खेतों में जाना कतई सुरक्षित नहीं है। बाघिन और किसी ग्रामीण की जान न ले सके, इसके लिए वन विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है। हम आदमखोर बाघिन को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं।
-संजय बिस्वाल, डीएफओ साउथ खीरी और इंचार्ज ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू
छेदीपुर क्षेत्र में टाइगर की सक्रियता को देखते हुए छेदीपुर ही नहीं आसपास के गांवों तक में वनकर्मी पूरी तरह अलर्ट हैं। गांवों में टाइगर से बचाव के जागरूकता संबंधी पोस्टर, पंफलेट, फ्लेक्स और बैनर लगवा दिए गए हैं। साथ ही छेदीपुर में ग्रामीणों की कमेटी भी बना दी गई है, जो लोगों को जागरूक करने के साथ ही वनकर्मियों का सहयोग कर रही है। नाइट पेट्रोलिंग भी तेज कर दी गई है। ताकि ग्रामीण रात को भी सुरक्षित रह सकें।
-डीएस यादव, वन क्षेत्राधिकारी, मैलानी रेंज
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दो दिनों तक चकमा देने के बाद आदमखोर बाघिन रविवार को फिर अपने पुराने ठिकाने गन्ने के खेतों में पहुंच गई। अब वनकर्मी बाघिन को घेरकर उसे ट्रेंक्युलाइज करने की कोशिश में जुटी है।
आदमखोर बाघिन की धमक जिले से लेकर लखनऊ शासन और प्रशासन तक पहुंच गई है। 21 अगस्त से बाघिन को पकड़ने के लिए वन महकमा जुटा हुआ है। मुख्य वन संरक्षक इवा शर्मा भी दो दिनों तक मैलानी में कैंप किए रहीं। इसके अलावा शनिवार को प्रमुख सचिव वन संजीव सरन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उमेंद्र शर्मा, मुख्य वन संरक्षक इवा शर्मा ने छेदीपुर का दौरा कर बाघिन को पकड़ने के लिए अब तक की गई कार्रवाई का जायजा लिया तथा आगे की कार्रवाई के लिए वनकर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश देकर चले गए।
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रविवार को बाघिन दोपहर में साढ़े तीन बजे गन्ने के उस खेत से निकली, जहां उसने टीकाराम की जान ली थी और वहां से जंगल के किनारे बने कच्चे रास्ते से होते हुए फिर परसादी के उसी गन्ने के खेत में चली गई, जहां वह बाबूराम को मारकर खींच ले गई थी। तीन दिन पहले एक कुत्ते को मारकर भी बाघिन परसादी के खेत में घसीट ले गई थी। वन विभाग के मुताबिक बाघिन की लोकेशन मिलने के बाद रविवार को दो अलग-अलग जगहों पर पड्डे बांधे जाएंगे, ताकि बाघिन को ट्रेंक्युलाइज किया जा सके। ट्रेंक्युलाइल करने के लिए वनकर्मियों के अलावा डीएफओ संजय बिस्वाल, एसडीओ आरपी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी मैलानी डीएस यादव, गोला, मोहम्मदी भीरा, शारदानगर आदि रेंज के रेंजर, पूर्व रेंजर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट आफताब वली खां और लखनऊ चिड़ियाघर के हेड वेटरनरी सर्जन डॉ उत्कर्ष शुक्ला अपनी टीम के साथ मौके पर डटे हुए हैं। ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू को रविवार को आठ दिन हो गए हैं। बाघिन के पकड़ में न आने से ग्रामीण खेतों में नहीं जा पा रहे हैं, इससे उनकी फसलें चौपट होने के कगार पर पहुंच गईं हैं।
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छेदीपुर में लोगों का तांता
मैलानी। आदमखोर बाघिन को देखने के लिए छेदीपुर में आसपास ही नहीं दूरदराज के क्षेत्रों तक के सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। जिससे ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू में खलल पड़ रहा है। वनकर्मी जहां पर अपना अभियान शुरू करते हैं, वहां से कुछ दूरी पर खासी भीड़ लग जाती है। इससे ऑपरेशन में बाधा पैदा होती है। डीएफओ संजय बिस्वाल का कहना है कि इससे उनका ऑपरेशन गड़बड़ा जाता है। लोगों की आवाजाही और शोरगुल से बाघिन को पकड़ने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि आमजन की आवाजाही और शोरगुल से बाघिन गन्ने के खेतों या जंगल से बाहर नहीं निकलती है। इसके अलावा बाघिन किसी देखने वाले पर हमला न कर दे, यह चिंता भी सताती रहती है।
बाघिन को सुरक्षित पकड़ने के लिए बनीं चार टीमें
बांकेगंज। दक्षिण खीरी वनप्रभाग के मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव में दो किसानों की हत्या करने वाली खूनी बाघिन को घेरने और गिरफ्तार करने की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। रणनीति के तहत वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूटीआई, ट्रेंक्युलाइजिंग सहित चार टीमें गठित की गईं है। बाघिन के गर्भवती होने की संभावना के चलते उसे नुकसान पहुंचाए बिना पकड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
शनिवार प्रमुख सचिव वन संजीव सरन के दौरे के बाद बाघिन को पकड़ने के प्रयास में तेजी आई है। बाघिन की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा जंगल के अंदर और बाहरी हिस्सों में बाघिन के संभावित ठिकानों पर बीस जोड़ी आटोमेशन कैमरे भी लगाए जा रहे है। यह कैमरे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना निदेशक दबीर हसन की देखरेख में लगवाए जाएंगे। इसके अलावा वन विभाग ने बाघिन को पकड़ने के लिए चार पिंजरे भी लगाए गए हैं।
ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू के दौरान ग्रामीण या बाहरी लोग घटनास्थल के आसपास न जाएं। ग्रामीण भी खेतों में समूह में जाएं, क्योंकि जब तक बाघिन पकड़ में नहीं आती है, तब तक खेतों में जाना कतई सुरक्षित नहीं है। बाघिन और किसी ग्रामीण की जान न ले सके, इसके लिए वन विभाग पूरी सतर्कता बरत रहा है। हम आदमखोर बाघिन को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं।
-संजय बिस्वाल, डीएफओ साउथ खीरी और इंचार्ज ऑपरेशन टाइगर रेस्क्यू
छेदीपुर क्षेत्र में टाइगर की सक्रियता को देखते हुए छेदीपुर ही नहीं आसपास के गांवों तक में वनकर्मी पूरी तरह अलर्ट हैं। गांवों में टाइगर से बचाव के जागरूकता संबंधी पोस्टर, पंफलेट, फ्लेक्स और बैनर लगवा दिए गए हैं। साथ ही छेदीपुर में ग्रामीणों की कमेटी भी बना दी गई है, जो लोगों को जागरूक करने के साथ ही वनकर्मियों का सहयोग कर रही है। नाइट पेट्रोलिंग भी तेज कर दी गई है। ताकि ग्रामीण रात को भी सुरक्षित रह सकें।
-डीएस यादव, वन क्षेत्राधिकारी, मैलानी रेंज