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संदिग्ध हालात में बंदी की मौत
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 01 Jan 2015 07:37 PM IST
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जिला कारागार में निरुद्ध दहेज हत्या के विचाराधीन बंदी 55 वर्षीय तरवारी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। जेल से जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंचे परिवार वालों ने मृतक के चेहरे पर चोट के गहरे निशान दिखाए और जमकर हंगामा काटा। उधर जेल प्रशासन ने बंदी के बीमार होने और अचानक गिरकर मौत होने की बात कही है। शव का तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
थाना धौरहरा क्षेत्र के ग्राम लालापुरवा निवासी 55 वर्षीय तरवारी लाल और उसकी पत्नी शांति देवी तथा पुत्र गंगाराम दहेज हत्या के मामले में सात महीने पहले जून में जिला कारागार में बंद हुए थे। शाम लगभग 4.25 बजे उसे कारागार से गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टराें ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के दूसरे बेटे रामू का कहना है कि शव के माथे और ठोढ़ी पर गहरे चोट के निशान हैं। उसका बाईं तरफ का चेहरा काला पड़ गया है। पूरा शरीर खून से लथपथ है। खबर दिए जाने पर उसके गांव रिश्तेदारी के तमाम लोग जिला अस्पताल आ गए। उनके साथ भाजपा नेता विनोद धौरहरा भी थे। सभी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर हंगामा किया।
बहू के मरने पर जेल आया था तरवारी
थाना क्षेत्र धौरहरा के ग्राम लालापुरवा निवासी तरवारी लाल के पुत्र गंगाराम की शादी क्षेत्र के गांव वाली से हुई थी। गंगाराम की पत्नी नीलू ने सात माह पूर्व घर में ही संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगा ली थी। इस मामले में गंगाराम के अलावा उसके पिता तरवारी और मां शांति देवी को नामजद किया गया था। इन तीनों के विरुद्ध मामला न्यायालय में विचाराधीन था तीनों तभी से जेल में बंद थे।
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पैनल में यह डॉक्टर हुए शामिल
मृतक के शव का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल के डॉ. राजीव राजपूत, डॉ. एसके मिश्रा और डॉ. बृजमोहन ने किया। पैनल की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
बीमारी से हुई मौत : जेल अधीक्षक
कारागार अधीक्षक एचआर दोहरे ने बताया कि तरवारी लाल को लगभग सात माह पूर्व जिला कारागार में लाया गया था। वह ब्लड प्रेशर का मरीज था। जेल अस्पताल में कई दिन से उसका इलाज चल रहा था। वह बिस्तर से गिरा तो उसके चेहरे पर चोट आ गई थी। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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थाना धौरहरा क्षेत्र के ग्राम लालापुरवा निवासी 55 वर्षीय तरवारी लाल और उसकी पत्नी शांति देवी तथा पुत्र गंगाराम दहेज हत्या के मामले में सात महीने पहले जून में जिला कारागार में बंद हुए थे। शाम लगभग 4.25 बजे उसे कारागार से गंभीर हालत में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टराें ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के दूसरे बेटे रामू का कहना है कि शव के माथे और ठोढ़ी पर गहरे चोट के निशान हैं। उसका बाईं तरफ का चेहरा काला पड़ गया है। पूरा शरीर खून से लथपथ है। खबर दिए जाने पर उसके गांव रिश्तेदारी के तमाम लोग जिला अस्पताल आ गए। उनके साथ भाजपा नेता विनोद धौरहरा भी थे। सभी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर हंगामा किया।
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बहू के मरने पर जेल आया था तरवारी
थाना क्षेत्र धौरहरा के ग्राम लालापुरवा निवासी तरवारी लाल के पुत्र गंगाराम की शादी क्षेत्र के गांव वाली से हुई थी। गंगाराम की पत्नी नीलू ने सात माह पूर्व घर में ही संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगा ली थी। इस मामले में गंगाराम के अलावा उसके पिता तरवारी और मां शांति देवी को नामजद किया गया था। इन तीनों के विरुद्ध मामला न्यायालय में विचाराधीन था तीनों तभी से जेल में बंद थे।
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पैनल में यह डॉक्टर हुए शामिल
मृतक के शव का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल के डॉ. राजीव राजपूत, डॉ. एसके मिश्रा और डॉ. बृजमोहन ने किया। पैनल की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
बीमारी से हुई मौत : जेल अधीक्षक
कारागार अधीक्षक एचआर दोहरे ने बताया कि तरवारी लाल को लगभग सात माह पूर्व जिला कारागार में लाया गया था। वह ब्लड प्रेशर का मरीज था। जेल अस्पताल में कई दिन से उसका इलाज चल रहा था। वह बिस्तर से गिरा तो उसके चेहरे पर चोट आ गई थी। हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।