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कोर्ट को अपनाना पड़ा सख्त रवैया
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 18 Mar 2016 11:05 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo
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- हत्यारोपी को परीक्षा के लिए दूसरे जिले भेजने का मामला
- पहले भी किया था क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण
क्षेत्राधिकार से परे जाकर आदेश पारित करना एक अधिकारी को महंगा पड़ गया है। बिना अधिकार के ही एक के बाद एक बंदी को जिला कारागार से बाहर अस्थाई रूप से निकालने के लिए आदेश पारित करना सीजेएम कोर्ट को नागवार गुजरा है। इस मामले में सीजेएम डा. दीनानाथ ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब तलब किया है।
बताते चलें कि जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बंदी गौतम को इंटरमीडिएट की परीक्षा दिलाने के लिए कोर्ट को बिना जानकारी दिए ही सीधे जेल अधीक्षक को आदेशित कर दिया। इसके कुछ समय बाद जब लोनियनपुरवा फूलबेहड़ निवासी हत्यारोपी बंदी ऋषभ शर्मा को इंटरमीडिएट परीक्षा दिलाने के लिए दूसरे जनपद में भेजने का मामला अदालत के सामने आया तो सीजेएम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया है। सीजेएम ने डीपीओ को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।
अधिकार डीएम को
पूर्व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने इस मामले में बताया कि बंदी को जिला जेल से अंतरित करने से पूर्व नियमत: कोर्ट को जानकारी दी जानी चाहिए। कानून के मुताबिक बंदी को एक जेल से दूसरी जेल भेजना अथवा अस्थाई रूप से बाहर निकालने के लिए आदेशित करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा जिला मजिस्ट्रेट को ही अधिकार प्राप्त है।
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- पहले भी किया था क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण
क्षेत्राधिकार से परे जाकर आदेश पारित करना एक अधिकारी को महंगा पड़ गया है। बिना अधिकार के ही एक के बाद एक बंदी को जिला कारागार से बाहर अस्थाई रूप से निकालने के लिए आदेश पारित करना सीजेएम कोर्ट को नागवार गुजरा है। इस मामले में सीजेएम डा. दीनानाथ ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब तलब किया है।
बताते चलें कि जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बंदी गौतम को इंटरमीडिएट की परीक्षा दिलाने के लिए कोर्ट को बिना जानकारी दिए ही सीधे जेल अधीक्षक को आदेशित कर दिया। इसके कुछ समय बाद जब लोनियनपुरवा फूलबेहड़ निवासी हत्यारोपी बंदी ऋषभ शर्मा को इंटरमीडिएट परीक्षा दिलाने के लिए दूसरे जनपद में भेजने का मामला अदालत के सामने आया तो सीजेएम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया है। सीजेएम ने डीपीओ को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है।
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अधिकार डीएम को
पूर्व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ ने इस मामले में बताया कि बंदी को जिला जेल से अंतरित करने से पूर्व नियमत: कोर्ट को जानकारी दी जानी चाहिए। कानून के मुताबिक बंदी को एक जेल से दूसरी जेल भेजना अथवा अस्थाई रूप से बाहर निकालने के लिए आदेशित करने के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा जिला मजिस्ट्रेट को ही अधिकार प्राप्त है।
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