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सिंडीकेट बनाकर 63 लाख हड़पने की रची थी साजिश
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 09 Aug 2017 11:14 PM IST
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नकहा ब्लॉक के प्रभारी बीडीओ, प्रमुख से लेकर कई कर्मचारी शामिल
गुपचुप विज्ञप्ति प्रकाशन से लेकर कार्यदायी संस्था कर ली थी नामित
नकहा ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत से वर्ष 2016-17 में बनाई गई कार्ययोजना के कार्यो को अवशेष दर्शाते हुए इस वर्ष की कार्ययोजना में उन्हीं कार्यों को पुन: शामिल करके 63.20 लाख रुपये हड़पने की साजिश का भंडाफोड़ होने से अधिकारी-कर्मचारी बेनकाब हुए हैं। तो वहीं सिंडीकेट माड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसने फर्जी तरीके से टेंडर प्रक्रिया कर ली थी। इसमें मनु कांसट्रक्शन कंपनी काशीनगर का नाम सामने आया है। जबकि लखनऊ के एक अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित कराई गई, जिसका जिले में सर्कुलेशन न के बराबर है। सीडीओ अमित सिंह बंसल ने इस प्रकरण में तत्कालीन प्रभारी बीडीओ रामप्रकाश शुक्ला, ब्लाक प्रमुख पवन गुप्ता, आरईएस के अवर अभियंता पीपी सिंह और पटल सहायक अजय प्रकाश श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ब्लाक के गिन्हौना से शैलगांव चौराहे तक, शैलगांव चौराहे से भीरा घासी डामर रोड तक, बाजुडीहा डामर रोड से अंबुआपुर बार्डर तक और भटपुरवा गांव से अशोगापुर गांव तक खडंजा कार्य कराने का प्रस्ताव किया गया, जबकि शैलगांव में प्राइमरी स्कूल तक आरसीसी कार्य कराने का प्रस्ताव कार्ययोजना में शामिल किया। 2016-17 में इन कार्यों पर 63.20 लाख रुपये अनुमानित लागत दर्शाते हुए टेंडर प्रक्रिया कूटरचित तरीके से कराई गई, जिसमें प्रभारी बीडीओ (एडीओ सांख्यिकी) की भूमिका अहम रही। जबकि उनके पास वित्तीय अधिकार ही नहीं थे। इसके बाद पिछले वर्ष की कार्ययोजना को नया रूप देकर वर्ष 2017-18 की कार्ययोजना में शामिल करते हुए डीपीआरओ से लेकर डीएम तक से अनुमति प्राप्त कर ली गई, लेकिन इस दौरान किसी को भनक तक नहीं लगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर अधिकारियों और सफेदपोश से मिलकर बने सिंडीकेट ने सुनियोजित तरीके से अपनी कूटरचित योजना को अंजाम दे दिया। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख ने चार अगस्त 2017 को सीडीओ से मिलकर पिछले वर्ष के अवशेष भुगतान की मांग कर डाली। बस इसके बाद सीडीओ ने सक्रिय होते हुए मौके पर जाकर जांच-पड़ताल की तो फर्जीवाड़े की परत दर परत सामने आ गई हैं।
अन्य ब्लॉकों में भी कराएंगे जांच
गनीमत है कि अभी तक भुगतान नहीं हुआ था, जिससे घोटाला होने से बच गया। इस मामले में दोषी प्रभारी बीडीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अन्य के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाएगी। इसी तर्ज पर अन्य ब्लाकों में कराए गए कार्यों की भौतिक जांच कराई जाएगी।
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अमित सिंह बंसल, सीडीओ
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गुपचुप विज्ञप्ति प्रकाशन से लेकर कार्यदायी संस्था कर ली थी नामित
नकहा ब्लॉक में क्षेत्र पंचायत से वर्ष 2016-17 में बनाई गई कार्ययोजना के कार्यो को अवशेष दर्शाते हुए इस वर्ष की कार्ययोजना में उन्हीं कार्यों को पुन: शामिल करके 63.20 लाख रुपये हड़पने की साजिश का भंडाफोड़ होने से अधिकारी-कर्मचारी बेनकाब हुए हैं। तो वहीं सिंडीकेट माड्यूल का खुलासा हुआ है, जिसने फर्जी तरीके से टेंडर प्रक्रिया कर ली थी। इसमें मनु कांसट्रक्शन कंपनी काशीनगर का नाम सामने आया है। जबकि लखनऊ के एक अखबार में विज्ञप्ति प्रकाशित कराई गई, जिसका जिले में सर्कुलेशन न के बराबर है। सीडीओ अमित सिंह बंसल ने इस प्रकरण में तत्कालीन प्रभारी बीडीओ रामप्रकाश शुक्ला, ब्लाक प्रमुख पवन गुप्ता, आरईएस के अवर अभियंता पीपी सिंह और पटल सहायक अजय प्रकाश श्रीवास्तव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
ब्लाक के गिन्हौना से शैलगांव चौराहे तक, शैलगांव चौराहे से भीरा घासी डामर रोड तक, बाजुडीहा डामर रोड से अंबुआपुर बार्डर तक और भटपुरवा गांव से अशोगापुर गांव तक खडंजा कार्य कराने का प्रस्ताव किया गया, जबकि शैलगांव में प्राइमरी स्कूल तक आरसीसी कार्य कराने का प्रस्ताव कार्ययोजना में शामिल किया। 2016-17 में इन कार्यों पर 63.20 लाख रुपये अनुमानित लागत दर्शाते हुए टेंडर प्रक्रिया कूटरचित तरीके से कराई गई, जिसमें प्रभारी बीडीओ (एडीओ सांख्यिकी) की भूमिका अहम रही। जबकि उनके पास वित्तीय अधिकार ही नहीं थे। इसके बाद पिछले वर्ष की कार्ययोजना को नया रूप देकर वर्ष 2017-18 की कार्ययोजना में शामिल करते हुए डीपीआरओ से लेकर डीएम तक से अनुमति प्राप्त कर ली गई, लेकिन इस दौरान किसी को भनक तक नहीं लगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस कदर अधिकारियों और सफेदपोश से मिलकर बने सिंडीकेट ने सुनियोजित तरीके से अपनी कूटरचित योजना को अंजाम दे दिया। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख ने चार अगस्त 2017 को सीडीओ से मिलकर पिछले वर्ष के अवशेष भुगतान की मांग कर डाली। बस इसके बाद सीडीओ ने सक्रिय होते हुए मौके पर जाकर जांच-पड़ताल की तो फर्जीवाड़े की परत दर परत सामने आ गई हैं।
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अन्य ब्लॉकों में भी कराएंगे जांच
गनीमत है कि अभी तक भुगतान नहीं हुआ था, जिससे घोटाला होने से बच गया। इस मामले में दोषी प्रभारी बीडीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। अन्य के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाएगी। इसी तर्ज पर अन्य ब्लाकों में कराए गए कार्यों की भौतिक जांच कराई जाएगी।
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अमित सिंह बंसल, सीडीओ