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कैद में असहज महसूस कर रहा खीरी का बाघ
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 01 Sep 2016 11:11 PM IST
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tiger
- फोटो : amar ujala
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छेदीपुर का बाघ लखनऊ प्राणि उद्यान के डॉक्टरों की निगरानी में
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज अंतर्गत छेदीपुर गांव से ट्रैंक्विलाइज कर पकड़ा गया बाघ नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ में पूरी तरह स्वस्थ है। उसे बुधवार शाम को होश आ गया था। गुरुवार सुबह उसे खाने को मांस दिया गया। जिसे उसने अनमनेपन से खाया। बाघ प्राणि उद्यान में अपने को असहज महसूस कर रहा है।
प्राणि उद्यान के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि बाघ का दाहिना कैनाइन टूटा है। उसकी दाहिनी आंख भी खराब है। बाघ को गुरुवार सुबह खाने के लिए मांस दिया गया। उसने मांस को अनमनेपन से खाया है। बाघ को इस समय डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। बाघ के स्वास्थ्य का खास ध्यान रखा जा रहा है। इस बाघ को प्राणि उद्यान में ही रखा जाएगा। प्राणि उद्यान के माहौल में एर्जस्ट होने में इसे कुछ समय लग सकता है। फिलहाल बाघ स्वस्थ है।
मालूम हो कि छेदीपुर से ट्रैंक्विलाइज कर पकड़े गए बाघ ने अलग-अलग घटनाओं में चार ग्रामीणों पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। इसे गुरुवार को दोपहर बाद ट्रैंक्विलाइज कर लखनऊ प्राणि उद्यान भेजा गया था।
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जिले में तीन बाघों को ट्रैंक्विलाइज कर चुके हैं डॉ. उत्कर्ष
नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला जिले में अब तक तीन आदमखोर बाघों को ट्रैंक्विलाइज कर चुके हैं। छेदीपुर के पहले उन्होंने भीरा और कांपटांडा में भी आदमखोर हो चुके बाघों को ट्रैंक्विलाइज किया था। डॉ. उत्कर्ष ने उत्तर प्रदेश में करीब 140 रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम तक पहुंचाया।
बाघ की पहचान में चूक हुई या पकड़ने में जल्दबाजी
लखीमपुर खीरी। छेदीपुर में बाघ पकड़ा गया, लेकिन बाघिन को लेकर ग्रामीणों के बीच अभी संशय बरकरार है। छेदीपुर में बाघ के हमले में टीकाराम की मौत के बाद वन विभाग ने हमलावर जानवर को बाघिन घोषित कर दिया था। विभाग टीकाराम से लेकर जानकी प्रसाद की मौत तक इसे बाघिन ही मानकर चलता रहा। अधिकारियों ने यहां ताक दावा कर दिया कि बाघिन गर्भवती है। ट्रैंक्विलाइज होने के बाद जब पता चला कि बाघ पकड़ा गया है तो ग्रामीण विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि 12 दिन के अंदर तीन हत्याएं करने वाला जानवर ही पकड़ा गया है। कुछ लोग अभी भी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी मान रहे है। इसके चलते उनमें दहशत बरकरार है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ के पगमार्क स्पष्ट न होने के कारण सही पहचान करने में चूक हुई है। बाघ को ट्रैंक्विलाइज करने वाले डॉ. उत्कर्ष शुक्ला का कहना है कि बाघ ने महज 500 मीटर के दायरे में तीन लोगों की जान ली। यह बाघ इस दायरे से बाहर निकला ही नहीं। इस बीच इस क्षेत्र में कोई दूसरा बाघ दिखाई भी नहीं पड़ा। इससे स्पष्ट है कि तीन हत्या का आरोपी बाघ ही पकड़ा गया है। फिलहाल छेदीपुर इलाके को बाघ के आतंक से निजात मिल गई है।
उधर, राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि मैलानी रेंज के महुरेना, खरेहटा और भरिगवां बीटों में दो बाघों के सक्रिय होने के संकेत मिले थे। इस जोड़े का ठिकाना महुरेना बीट के सिद्ध बाबा स्थान पर बताया जाता है। बाघ ने सबसे पहले 15 अगस्त को कपरहाकुंआ गांव की किशोरी सरस्वती को अपना निवाला बनाया। बाद में इससे एक किलोमीटर दूर छेदीपुर गांव में टीकाराम और बाबूराम और इसके बाद कठिना पुल के पास जानकी प्रसाद पर हमला कर उन्हें मार डाला। सरस्वती पर हमले के बाद जो पगमार्क मिले थे वह टीकाराम और बाबूराम पर हमले के बाद मिले पगमार्क से भिन्न थे। वन विभाग ने भी इस बात को स्वीकार किया था। इससे साफ जाहिर है कि इलाके के खेतों में दो बाघ मौजूद थे।
बाघ को पकड़ने में वन विभाग ने लगा दिए नौ दिन
आदमखोर हो चुके बाघ को पकड़ने में वन विभाग को नौ दिन लग गए। 21 अगस्त से आपरेशन रेस्क्यू टाइगर शुरू हुआ था। ऑपरेशन से जुड़े लोग केवल दिखावे के लिए ड्रामा करते रहे। ट्रैंक्विलाइज करने के लिए किसी अधिकारी के नामित न किए जाने के कारण एक्सपर्ट कन्नी काटते रहे। तकनीकी कारणों से बाघ को आदमखोर घोषित करने में भी देरी हुई। जानकी प्रसाद की मौत के बाद बाघ के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया गया। उसी वारंट पर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और पीपी सिंह को गोली मारने के लिए नामित किया गया। डेथ वारंट जारी होने के कुछ ही घंटे बाद बाघ ट्रैंक्विलाइज हो गया।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज अंतर्गत छेदीपुर गांव से ट्रैंक्विलाइज कर पकड़ा गया बाघ नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान लखनऊ में पूरी तरह स्वस्थ है। उसे बुधवार शाम को होश आ गया था। गुरुवार सुबह उसे खाने को मांस दिया गया। जिसे उसने अनमनेपन से खाया। बाघ प्राणि उद्यान में अपने को असहज महसूस कर रहा है।
प्राणि उद्यान के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि बाघ का दाहिना कैनाइन टूटा है। उसकी दाहिनी आंख भी खराब है। बाघ को गुरुवार सुबह खाने के लिए मांस दिया गया। उसने मांस को अनमनेपन से खाया है। बाघ को इस समय डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। बाघ के स्वास्थ्य का खास ध्यान रखा जा रहा है। इस बाघ को प्राणि उद्यान में ही रखा जाएगा। प्राणि उद्यान के माहौल में एर्जस्ट होने में इसे कुछ समय लग सकता है। फिलहाल बाघ स्वस्थ है।
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मालूम हो कि छेदीपुर से ट्रैंक्विलाइज कर पकड़े गए बाघ ने अलग-अलग घटनाओं में चार ग्रामीणों पर हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। इसे गुरुवार को दोपहर बाद ट्रैंक्विलाइज कर लखनऊ प्राणि उद्यान भेजा गया था।
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जिले में तीन बाघों को ट्रैंक्विलाइज कर चुके हैं डॉ. उत्कर्ष
नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के उपनिदेशक डॉ. उत्कर्ष शुक्ला जिले में अब तक तीन आदमखोर बाघों को ट्रैंक्विलाइज कर चुके हैं। छेदीपुर के पहले उन्होंने भीरा और कांपटांडा में भी आदमखोर हो चुके बाघों को ट्रैंक्विलाइज किया था। डॉ. उत्कर्ष ने उत्तर प्रदेश में करीब 140 रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम तक पहुंचाया।
बाघ की पहचान में चूक हुई या पकड़ने में जल्दबाजी
लखीमपुर खीरी। छेदीपुर में बाघ पकड़ा गया, लेकिन बाघिन को लेकर ग्रामीणों के बीच अभी संशय बरकरार है। छेदीपुर में बाघ के हमले में टीकाराम की मौत के बाद वन विभाग ने हमलावर जानवर को बाघिन घोषित कर दिया था। विभाग टीकाराम से लेकर जानकी प्रसाद की मौत तक इसे बाघिन ही मानकर चलता रहा। अधिकारियों ने यहां ताक दावा कर दिया कि बाघिन गर्भवती है। ट्रैंक्विलाइज होने के बाद जब पता चला कि बाघ पकड़ा गया है तो ग्रामीण विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि 12 दिन के अंदर तीन हत्याएं करने वाला जानवर ही पकड़ा गया है। कुछ लोग अभी भी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी मान रहे है। इसके चलते उनमें दहशत बरकरार है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघ के पगमार्क स्पष्ट न होने के कारण सही पहचान करने में चूक हुई है। बाघ को ट्रैंक्विलाइज करने वाले डॉ. उत्कर्ष शुक्ला का कहना है कि बाघ ने महज 500 मीटर के दायरे में तीन लोगों की जान ली। यह बाघ इस दायरे से बाहर निकला ही नहीं। इस बीच इस क्षेत्र में कोई दूसरा बाघ दिखाई भी नहीं पड़ा। इससे स्पष्ट है कि तीन हत्या का आरोपी बाघ ही पकड़ा गया है। फिलहाल छेदीपुर इलाके को बाघ के आतंक से निजात मिल गई है।
उधर, राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह का कहना है कि मैलानी रेंज के महुरेना, खरेहटा और भरिगवां बीटों में दो बाघों के सक्रिय होने के संकेत मिले थे। इस जोड़े का ठिकाना महुरेना बीट के सिद्ध बाबा स्थान पर बताया जाता है। बाघ ने सबसे पहले 15 अगस्त को कपरहाकुंआ गांव की किशोरी सरस्वती को अपना निवाला बनाया। बाद में इससे एक किलोमीटर दूर छेदीपुर गांव में टीकाराम और बाबूराम और इसके बाद कठिना पुल के पास जानकी प्रसाद पर हमला कर उन्हें मार डाला। सरस्वती पर हमले के बाद जो पगमार्क मिले थे वह टीकाराम और बाबूराम पर हमले के बाद मिले पगमार्क से भिन्न थे। वन विभाग ने भी इस बात को स्वीकार किया था। इससे साफ जाहिर है कि इलाके के खेतों में दो बाघ मौजूद थे।
बाघ को पकड़ने में वन विभाग ने लगा दिए नौ दिन
आदमखोर हो चुके बाघ को पकड़ने में वन विभाग को नौ दिन लग गए। 21 अगस्त से आपरेशन रेस्क्यू टाइगर शुरू हुआ था। ऑपरेशन से जुड़े लोग केवल दिखावे के लिए ड्रामा करते रहे। ट्रैंक्विलाइज करने के लिए किसी अधिकारी के नामित न किए जाने के कारण एक्सपर्ट कन्नी काटते रहे। तकनीकी कारणों से बाघ को आदमखोर घोषित करने में भी देरी हुई। जानकी प्रसाद की मौत के बाद बाघ के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया गया। उसी वारंट पर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला और पीपी सिंह को गोली मारने के लिए नामित किया गया। डेथ वारंट जारी होने के कुछ ही घंटे बाद बाघ ट्रैंक्विलाइज हो गया।