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खेत से मिली खोपड़ी, हड्डियां और गोलू के कपड़े
अजान/ममरी
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:14 PM IST
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नौ दिनों से लापता ग्राम जड़ौरा निवासी रोहनलाल वर्मा के बेटे दिव्यांशु उर्फ गोलू की तलाश में जुटी एसओजी टीम और हैदराबाद पुलिस ने एक सूचना पर गुरुवार को जड़ौरा निवासी राजमीरा के गन्ने के खेत से खोपड़ी, हड्डियां और गोलू के कपड़े बरामद किए हैं। मौके से मिले कपड़ों को देखकर आशंका व्यक्त की जा रही है कि खोपड़ी लापता दिव्यांश की हो सकती है। पुलिस ने हड्डियों और कंकाल को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
दिव्यांश 25 अगस्त को संदिग्ध हालात में गांव के बाग से लापता हो गया था, जिसकी गुमशुदगी 27 अगस्त को रोहनलाल ने थाना हैदराबाद में दर्ज कराई थी। इसी दिन दिव्यांश के चाचा रामकुमार और प्रधान अनुराग मिश्रा के मोबाइल पर मैसेज आया था, जिसे लेकर गोला में काफी बवाल हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सुभाष वर्मा और कमलेश पटेल को पूछताछ के लिए ले जाने के बाद पुलिस बुधवार की शाम दिव्यांश के पिता रोहनलाल, चाचा रामकुमार, धनीराम तथा गांव के एक व्यक्ति मुस्तकीन को अपने साथ थाने ले गई थी। बाद में रोहनलाल को छोड़ दिया था। रात को करीब 11 बजे पुलिस गांव भी आई थी। उसके बाद गुरुवार की सुबह नौ बजे एसआई कौशल किशोर यादव, आरक्षी राजेश सिंह, राजेश बहादुर सिंह टीम के साथ आए तो गांव के बाहर दिव्यांश के चाचा सदाराम को बुलाकर उनसे बातचीत की। फिर गांव के रामू, लालाराम, संतराम, संजय मास्टर, छोट्टन, अनूप मिश्रा, छुन्नू, शिव प्रकाश, टेनी आदि के साथ राजमीरा के खेत की तलाशी कराई तो वहां एक खोपड़ी, हाथ, पैर की कुछ हड्डियां और कपड़े मिले। कपड़ों की शिनाख्त दिव्यांश के पिता और परिवार वालों से कराने के बाद हड्डियां और खोपड़ी को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
एसपी अरविंद सेन ने बताया कि कपड़े लापता बालक के हैं, लेकिन खोपड़ी के बारे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। बालक के चाचा को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
गश खाकर गिरा पिता
अजान। जड़ौरा में खेत से मिले टीशर्ट और नेकर दिखाने पर रोहनलाल गश खाकर गिर गए, जबकि दिव्यांश की बहनें कपड़े देखते ही दहाड़े मारकर रोने लगीं।
गोपनीय जांच से अपहृताओं के हौसले बुलंद रहे
अजान। जड़ौरा के प्रधान अनुराग मिश्रा और दिव्यांश के चाचा रामकुमार के मोबाइल पर जिस दिन मैसेज आया था, यदि पुलिस उसी दिन मोबाइल नंबर ट्रेस कर सक्रिय हो जाती तो शायद उसी दिन कुछ पता चल जाता लेकिन पुलिस ने इसे गोपनीय जांच बताते हुए छुपाए रखा, जिससे अपहरणकर्ताओं के हौसले बुलंद रहे।
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कहीं तांत्रिक का कारनामा तो नहीं
अजान। गांव वालों की माने तो घटना के पीछे किसी तांत्रिक का भी हाथ हो सकता है, क्योंकि जिस स्थान से खोपड़ी, हड्डियां और कपड़े बरामद किए गए हैं। उसी स्थान पर 31 अगस्त को कांबिंग के दौरान पड़े मिले बालों को पुलिस ने कब्जे में लिया था। तब वहां पुलिस को न तो कोई खोपड़ी मिली और न ही कोई दुर्गंध आई थी। उसके चार दिन बाद वहां पर खोपड़ी कहां से आई। इससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि खोपड़ी वहां पर बाद में डाली गई है, जिसमें किसी तांत्रिक हाथ हो सकता है। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि मामला जमीन जायदाद से भी जुड़ा हो सकता है।
तो घूरे पर मिला पत्र सही था
गोलू के घर के बाहर घूरे पर 31 अगस्त को एक पत्र मिला था, जिसमें लिखा था कि खेत में पड़ी है गोलू की लाश, उठा लो। यदि खोपड़ी और हड्डियां उसी की है तो आशं्का जताई जा रही है कि पत्र काफी हद तक सही था।
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दिव्यांश 25 अगस्त को संदिग्ध हालात में गांव के बाग से लापता हो गया था, जिसकी गुमशुदगी 27 अगस्त को रोहनलाल ने थाना हैदराबाद में दर्ज कराई थी। इसी दिन दिव्यांश के चाचा रामकुमार और प्रधान अनुराग मिश्रा के मोबाइल पर मैसेज आया था, जिसे लेकर गोला में काफी बवाल हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सुभाष वर्मा और कमलेश पटेल को पूछताछ के लिए ले जाने के बाद पुलिस बुधवार की शाम दिव्यांश के पिता रोहनलाल, चाचा रामकुमार, धनीराम तथा गांव के एक व्यक्ति मुस्तकीन को अपने साथ थाने ले गई थी। बाद में रोहनलाल को छोड़ दिया था। रात को करीब 11 बजे पुलिस गांव भी आई थी। उसके बाद गुरुवार की सुबह नौ बजे एसआई कौशल किशोर यादव, आरक्षी राजेश सिंह, राजेश बहादुर सिंह टीम के साथ आए तो गांव के बाहर दिव्यांश के चाचा सदाराम को बुलाकर उनसे बातचीत की। फिर गांव के रामू, लालाराम, संतराम, संजय मास्टर, छोट्टन, अनूप मिश्रा, छुन्नू, शिव प्रकाश, टेनी आदि के साथ राजमीरा के खेत की तलाशी कराई तो वहां एक खोपड़ी, हाथ, पैर की कुछ हड्डियां और कपड़े मिले। कपड़ों की शिनाख्त दिव्यांश के पिता और परिवार वालों से कराने के बाद हड्डियां और खोपड़ी को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
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एसपी अरविंद सेन ने बताया कि कपड़े लापता बालक के हैं, लेकिन खोपड़ी के बारे में जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। बालक के चाचा को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
गश खाकर गिरा पिता
अजान। जड़ौरा में खेत से मिले टीशर्ट और नेकर दिखाने पर रोहनलाल गश खाकर गिर गए, जबकि दिव्यांश की बहनें कपड़े देखते ही दहाड़े मारकर रोने लगीं।
गोपनीय जांच से अपहृताओं के हौसले बुलंद रहे
अजान। जड़ौरा के प्रधान अनुराग मिश्रा और दिव्यांश के चाचा रामकुमार के मोबाइल पर जिस दिन मैसेज आया था, यदि पुलिस उसी दिन मोबाइल नंबर ट्रेस कर सक्रिय हो जाती तो शायद उसी दिन कुछ पता चल जाता लेकिन पुलिस ने इसे गोपनीय जांच बताते हुए छुपाए रखा, जिससे अपहरणकर्ताओं के हौसले बुलंद रहे।
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कहीं तांत्रिक का कारनामा तो नहीं
अजान। गांव वालों की माने तो घटना के पीछे किसी तांत्रिक का भी हाथ हो सकता है, क्योंकि जिस स्थान से खोपड़ी, हड्डियां और कपड़े बरामद किए गए हैं। उसी स्थान पर 31 अगस्त को कांबिंग के दौरान पड़े मिले बालों को पुलिस ने कब्जे में लिया था। तब वहां पुलिस को न तो कोई खोपड़ी मिली और न ही कोई दुर्गंध आई थी। उसके चार दिन बाद वहां पर खोपड़ी कहां से आई। इससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि खोपड़ी वहां पर बाद में डाली गई है, जिसमें किसी तांत्रिक हाथ हो सकता है। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि मामला जमीन जायदाद से भी जुड़ा हो सकता है।
तो घूरे पर मिला पत्र सही था
गोलू के घर के बाहर घूरे पर 31 अगस्त को एक पत्र मिला था, जिसमें लिखा था कि खेत में पड़ी है गोलू की लाश, उठा लो। यदि खोपड़ी और हड्डियां उसी की है तो आशं्का जताई जा रही है कि पत्र काफी हद तक सही था।