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चार दुराचारियों को उम्रकैद
ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:09 AM IST
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दुष्कर्म
- फोटो : अमर उजाला
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जुर्माने की रकम से पीड़िता को मिलेगी आधी रकम
दलित महिला के साथ घर में घुसकर दुराचार करने के मामले में अपर जिला जज लालता प्रसाद ने चार दुराचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि नीमगांव थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दलित महिला के घर पर नीमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सिकंद्राबाद निवासी धर्मेंद्र उर्फ मुन्ने, राजू, विनीत, पेंटर उर्फ राजेश ने 11 जनवरी 2009 की शाम को धावा बोल दिया। आरोप है कि चारों ने असलहों के बल पर घर में घुसकर विवाहिता को बंधक बना लिया और उससे दुराचार किया। पीड़िता ने इस मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीओ बसंत लाल ने जांच करने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता की गवाही के साथ ही मुन्ना और बशीर ने अपनी गवाही दी थी तथा तत्कालीन सीओ बंसत लाल ने भी अपने बयान दर्ज कराए थे। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दलित उत्पीड़न में मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए उन्हे झूठा फंसाए जाने की दलील पेश की लेकिन शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी तथा सामूहिक दुराचार को जघन्य अपराध बताया। अपना फैसला सुनाते हुए अदालत ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही चारों पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता को जुर्माने की आधी रकम को बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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अदालत से फैसला आने के बाद चारों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल भेज दिया गया।
दलित महिला के साथ घर में घुसकर दुराचार करने के मामले में अपर जिला जज लालता प्रसाद ने चार दुराचारियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि नीमगांव थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दलित महिला के घर पर नीमगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सिकंद्राबाद निवासी धर्मेंद्र उर्फ मुन्ने, राजू, विनीत, पेंटर उर्फ राजेश ने 11 जनवरी 2009 की शाम को धावा बोल दिया। आरोप है कि चारों ने असलहों के बल पर घर में घुसकर विवाहिता को बंधक बना लिया और उससे दुराचार किया। पीड़िता ने इस मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीओ बसंत लाल ने जांच करने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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अदालती सुनवाई के दौरान पीड़िता की गवाही के साथ ही मुन्ना और बशीर ने अपनी गवाही दी थी तथा तत्कालीन सीओ बंसत लाल ने भी अपने बयान दर्ज कराए थे। वहीं बचाव पक्ष की ओर से दलित उत्पीड़न में मिलने वाली मुआवजा राशि के लिए उन्हे झूठा फंसाए जाने की दलील पेश की लेकिन शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी तथा सामूहिक दुराचार को जघन्य अपराध बताया। अपना फैसला सुनाते हुए अदालत ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही चारों पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला है। अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता को जुर्माने की आधी रकम को बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
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अदालत से फैसला आने के बाद चारों को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल भेज दिया गया।