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पूर्व प्रधान के जाली हस्ताक्षर कर हड़प लिए लाखों

Tue, 09 Feb 2016 10:28 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Tue, 09 Feb 2016 10:28 PM IST
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Former head of the forged signatures to steal millions
जिले की धौरहरा ब्लाक की तीन ग्राम पंचायतों अमेठी, जंगलवाली और चहमलपुर में पूर्व प्रधान के जाली हस्ताक्षर बनाकर करीब पौने आठ लाख से अधिक धनराशि हड़पने का मामला सामने आया है। प्रथम दृष्टया पंचायत सेक्रेटरी पर आरोप लगने के बाद जब अधिकारियों ने इसकी जांच की तो रकम हड़पने की बात सामने आने पर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गबन की पुष्टि होने पर सीडीओ नितीश कुमार ने पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है।
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डीपीआरओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक पंचायत सेक्रेटरी अनिल कुमार के पास अमेठी, जंगलवाली, चहमलपुर, बसंतापुर, वाली और शेरपुर ग्राम पंचायत का चार्ज है। पंचायत सेक्रेटरी ने अमेठी ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान जुगुल किशोर का जाली हस्ताक्षर बनाकर ग्राम निधि के खाते से 21 जनवरी को 14वें वित्त आयोग का 1.96 लाख और 27 जनवरी को 3.40 लाख रुपये निकाल लिए। इसी तरह जंगलवाली ग्राम पंचायत की ग्राम निधि के खाते से 1.40 लाख रुपये निकाल लिया। इसी तरह चहमलपुर ग्राम पंचायत की निधि से 21 जनवरी को एक लाख रुपये की धनराशि निकाल ली। इस बीच अमेठी के पूर्व प्रधान जुगुल किशोर और जंगलवाली की पूर्व प्रधान मीना देवी को जब पंचायत सेक्रेटरी द्वारा जाली हस्ताक्षर कर ग्राम निधि के खाते से लाखों की रकम निकाले जाने की भनक लगी तो उनके होश उड़ गए। बताया जाता है कि जब जंगलवाली ग्राम पंचायत की पूर्व प्रधान मीना देवी ने इस संबंध में पंचायत सेक्रेटरी से पूछा तो उसने नई प्रधान शांति देवी के हस्ताक्षर से चेक जारी होने की बात कही। साथ ही नई प्रधान शांति देवी के हस्ताक्षर से भी एक नया चेक जारी कर दिया। पंचायत सेक्रेटरी द्वारा ग्राम निधि के खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर धनराशि निकालने की बाबत दोनों पूर्व प्रधानों ने सीडीओ नितीश कुमार से पूरे मामले की शिकायत की। जिसके बाद सीडीओ के निर्देश पर डीपीआरओ ने संबंधित ग्राम पंचायतों से जुड़ीं बैकों से विवरण जुटाया। जिसमें पूर्व प्रधानों के आरोप सही पाए गए हैं। सीडीओ ने बताया कि पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित कर उसके खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
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धनराशि की निकासी पर रोक के बावजूद हुआ गबन
डीपीआरओ ने बताया कि 14वें वित्त आयोग से आवंटित धनराशि को आरटीजीएस के जरिए ग्राम पंचायतों 995 ग्राम पंचायतों के खाते में भेज दिया गया है। लेकिन 172 ग्राम पंचायतों के बढ़ने के कारण सभी 1167 ग्राम पंचायतों में इस धनराशि को नए सिरे से आवंटित करना था। धनराशि के खर्च को लेकर अभी कोई गाइड लाइन भी नहीं आई है। इसलिए बजट निकालने पर रोक लगाई गई थी।
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बैंक मैनेजर की भूमिका भी सवालों में
डीपीआरओ ने बताया कि 14वें वित्त आयोग से मिली धनराशि के निकलने पर रोक लगाई गई थी। इस बाबत बैंकों को भी सूचित कर दिया गया था, लेकिन अमेठी, जंगलवाली और चहमलपुर ग्राम पंचायत की निधि से धनराशि निकाल ली गई। इसमें बैंक मैनेजर की भूमिका संदेह के घेरे में है। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।


तीन ग्राम पंचायतों की ग्राम निधि के खाते से पूर्व प्रधान के फर्जी हस्ताक्षर से लाखों रुपये की धनराशि निकालने का मामला सामने आया है। इसमें पंचायत सेक्रेटरी को निलंबित कर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है। इसमें बैंक मैनेजर की भूमिका की जांच कराई जाएगी।
-नितीश कुमार, सीडीओ 
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