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आखिर दो मौतों के बाद जागा वन महकमा
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी (लखीमपुर खीरी)।
Updated Mon, 22 Aug 2016 12:08 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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- आदमखोर बाघिन को पकड़ने को कसी कमर, ट्रैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट भी पहुंचे, चीफ कंजरवेटर ने मैलानी में किया कैंप
आदमखोर बाघिन के हमले से हुई ताबड़तोड़ दो मौतों के बाद आखिरकार वन महकमा जाग गया। बाघिन को पकड़ने के लिए चीफ कंजरवेटर के निर्देशन में ऑपरेशन टाइगर शुरू हो गया है। डीएफओ, एसडीओ सहित भीरा, गोला के वन रेंज अधिकारी तथा ट्रैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला मौके पर डटे हुए हैं। बाघिन को कैद करने के लिए तीन पिंजरे मौके पर पहुंचा दिए गए हैं।
उधर, लगातार दूसरे दिन बाघिन के हमले में दो मौतों के बाद ग्रामीण अब काफी दहशत में हैं। शाम को दो कैमरों को उसी गन्ने के खेत में लगा दिया गया, जहां बाघिन बाबूराम के शव को खींचकर ले गई थी। इसके अलावा तीनों पिंजरों को भी गन्ने के खेतों के पास लगाया गया है। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से बाघिन के प्रभाव वाले इलाके में न जाने की अपील की है। मैलानी रेंजर डीएस यादव के मुताबिक उन्होंने शुक्रवार को ही जंगल के आसपास तथा गन्ने के खेतों के आसपास न जाने की अपील की थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसे अनसुना कर दिया और यह हादसा हो गया। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण अपील को गंभीरता से लेते तो शायद बाबूराम की जान न जाती। चीफ कंजरवेटर इवा शर्मा भी मैलानी में कैंप किए हुए हैं और उन्हीं के निर्देशन में ऑपेरशन टाइगर चलाया जा रहा है।
टीकाराम के संस्कार में चला गया था बेटा
शुक्रवार को ग्राम छेदीपुर निवासी टीकाराम तथा शनिवार को 65 वर्षीय बाबूराम चौहान को बाघिन ने मौत के घाट उतार दिया था। बाबूराम अपने खेत में निराई कर रहे थे। इसी बीच शाम लगभग पांच बजे गन्ने के खेत से निकली बाघिन ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पास के प्रसादी के गन्ने के खेत में खींच ले गई। रात तक घर न पहुंचने पर घरवाले तथा सैकड़ों ग्रामीण पांच ट्रैक्टरों के साथ उन्हें खेत पर खोजने गए, तो उनके खेत में खुरपे तथा उनकी चप्पलें और मौके पर खून पड़ा मिला। खून के निशान के सहारे ग्रामीण परसादी के खेत मेें पहुंचे। तब तक बाघिन उनकी दाहिनी टांग खा चुकी थी। गर्दन पर भी पंजे के निशान थे और बाघिन वहीं मौजूद थी। बामुश्किल ग्रामीण बाबूराम का शव बाघिन के चंगुल से छुड़ा सके और दूर ले जाकर सड़क किनारे उनके शव को रखा। ग्रामीणों के मुताबिक बाघिन वहां भी पहुंच गई। तब उनके शव को गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास लाकर रखा गया।
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लगातार दूसरे दिन बाघिन के हमले में एक और ग्रामीण की मौत के बाद जागे वन महकमे की टीम दोपहर लगभग दो बजे मौके पर पहुंची। सबसे पहले एसडीओ साउथ खीरी आरपी सिंह, गोला रेंजर उमेश चंद्र राय, भीरा रेंजर मंगल सिंह मलिक अपने स्टाफ के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उसके बाद डीएफओ साउथ खीरी संजय बिस्वाल, लखनऊ जू के ट्रैक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला और मैलानी रेंजर डीएस यादव मौके पर पहुंचे। डीएफओ, डॉ. शुक्ला मैलानी रेंजर डीएस यादव और वन अधिकारियों ने बाघिन के पगमार्क देखे। डॉ. शुक्ला ने अपनी टीम के साथ बाघिन की लोकेशन ली। उन्होंने बताया कि बाघिन जंगल में नहीं गई है, बल्कि वह घटनास्थल के आसपास गन्ने के खेतों में ही कहीं छिपी है।
डीएफओ ने बताया कि बाघिन को पकड़ने की रणनीति बना ली गई है। इसके लिए तीन पिंजरे मंगा लिए गए हैं। बाघिन की लोकेशन लेने के लिए दुधवा से दो हाथी भी बुलाए जा रहे हैं। रेंजर डीएस यादव ने बताया कि बाघिन को या तो पिंजरे में कैद किया जाएगा या फिर उसे ट्रैंक्युलाइज करके पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघिन अब और किसी ग्रामीण को अपना शिकार न बना सके इसके पूर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाघिन टीकाराम और बाबूराम का शिकार करने के बाद दोनों को खींचकर गन्ने के खेत में ले गई, इससे लगता है कि बाघिन ने जंगल के बजाए फिलहाल गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। डॉ. उत्कर्ष शुक्ला के मुताबिक फिलहाल बाघिन की लोकेशन घटनास्थल वाले गन्ने के खेतों में ही होने की संभावना है। उन्होंने पूर क्षेत्र का पैदल जायजा लेने और पगमार्क देखने के बाद यह बात बताई। उधर चीफ कंजर्वेटर इवा शर्मा भी मैलानी में कैंप किए हुए हैं और उन्हीं के निर्देशन में ऑपेरशन टाइगर चलाया जा रहा है।
विधवा बेटी का छिन गया सहारा
बाबूराम अपनी विधवा बेटी अनीता के साथ ही खेत में छप्पर डालकर रहते थे। बेटी का वही सहारा थे। बाबूराम की मौत के बाद उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वह कहती है कि उसका सहारा छिन गया। अब उसका गुजर-बसर कैसे होगा। यह चिंता उसे खाए जा रही है।
पीएसी भी आएगी आज
मौके पर वन अधिकारियों के अलावा एसओ मैलानी अजय यादव भी मयफोर्स डटे रहे। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की भीड़ मौके पर एकत्रित होने से ऑपरेशन टाइगर में दिक्कतें हो रही हैं। बार-बार कहने के बावजूद ग्रामीण मौके से दूर नहीं जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सोमवार को पीएसी भी गांव में पहुंच जाएगी।
बाघ की तलाश में दुधवा से मैलानी भेजे गए दो हाथी
पलियाकलां। मैलानी में बाघ द्वारा दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतारे जाने के बाद जागे पार्क प्रशासन ने अब बाघ की तलाश तेज कर दी है। इसके लिए दुधवा नेशनल पार्क से दो हाथियों को मैलानी भेजा गया है।
बीते दिवस मैलानी क्षेत्र के छेदीपुर गांव में बाघ द्वारा दो लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। जिसके लिए पार्क प्रशासन ने दुधवा नेशनल पार्क से दो हाथियों को वहां भेजा है। यह हाथी ट्रकों से मैलानी गए हैं। दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि ने बताया कि दो अलग-अलग ट्रकों से इन हाथियों को मैलानी भेजा गया है। हाथियों के जरिये कांबिंग कर बाघ की लोकेशन पता की जाएगी।
पांच दिन में किशोरी समेत तीन लोग बने बाघ-बाघिन का निवाला
लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज में अलग-अलग घटनाओं में बाघ और बाघिन एक किशोरी समेत तीन लोगों को निवाला बना चुके हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों की माने तो मैलानी रेंज की गदनिया बीट में सुरजनपुर कपरहा कुआं गांव की किशोरी सरस्वती पर हमला करने वाला बाघ नर था जबकि खरेहटा बीट के छेदीपुर गांव में 24 घंटे के अंदर दो लोगों टीकाराम और बाबूराम का शिकार एक ही बाघिन ने किया।
मालूम हो कि 15 अगस्त को मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ वन ब्लाक जंगल में लकड़ी बीनने गई सुरजनपुर कपरहा कुआं गांव निवासी हिंछलाल की 13 वर्षीय बेटी सरस्वती पर बाघ ने हमला कर उसकी जान ले ली थी। इसके बाद इसी रेंज के गदनिया बीट के छेदीपुर गांव में 19 अगस्त को टीकाराम और 20 अगस्त को बाबूराम को बाघिन ने निवाला बनाया। इस तरह पांच दिन के अंदर दो अलग अलग गांवों के तीन लोगों को बाघ-बाघिन ने अपना शिकार बनाया है।
वनाधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने पगमार्क देखकर इस बात की पुष्टि की है कि लक्ष्मी का शिकार बाघ ने जबकि टीकाराम और बाबूराम का शिकार बाघिन ने किया है। फिलहाल ताबाड़तोड़ बाघ-बाघिन के हमलों से जंगल से सटे गांव के लोग बुरी तरह दहशत में हैं।
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आदमखोर बाघिन के हमले से हुई ताबड़तोड़ दो मौतों के बाद आखिरकार वन महकमा जाग गया। बाघिन को पकड़ने के लिए चीफ कंजरवेटर के निर्देशन में ऑपरेशन टाइगर शुरू हो गया है। डीएफओ, एसडीओ सहित भीरा, गोला के वन रेंज अधिकारी तथा ट्रैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्कर्ष शुक्ला मौके पर डटे हुए हैं। बाघिन को कैद करने के लिए तीन पिंजरे मौके पर पहुंचा दिए गए हैं।
उधर, लगातार दूसरे दिन बाघिन के हमले में दो मौतों के बाद ग्रामीण अब काफी दहशत में हैं। शाम को दो कैमरों को उसी गन्ने के खेत में लगा दिया गया, जहां बाघिन बाबूराम के शव को खींचकर ले गई थी। इसके अलावा तीनों पिंजरों को भी गन्ने के खेतों के पास लगाया गया है। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से बाघिन के प्रभाव वाले इलाके में न जाने की अपील की है। मैलानी रेंजर डीएस यादव के मुताबिक उन्होंने शुक्रवार को ही जंगल के आसपास तथा गन्ने के खेतों के आसपास न जाने की अपील की थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसे अनसुना कर दिया और यह हादसा हो गया। उनका कहना है कि यदि ग्रामीण अपील को गंभीरता से लेते तो शायद बाबूराम की जान न जाती। चीफ कंजरवेटर इवा शर्मा भी मैलानी में कैंप किए हुए हैं और उन्हीं के निर्देशन में ऑपेरशन टाइगर चलाया जा रहा है।
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शुक्रवार को ग्राम छेदीपुर निवासी टीकाराम तथा शनिवार को 65 वर्षीय बाबूराम चौहान को बाघिन ने मौत के घाट उतार दिया था। बाबूराम अपने खेत में निराई कर रहे थे। इसी बीच शाम लगभग पांच बजे गन्ने के खेत से निकली बाघिन ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पास के प्रसादी के गन्ने के खेत में खींच ले गई। रात तक घर न पहुंचने पर घरवाले तथा सैकड़ों ग्रामीण पांच ट्रैक्टरों के साथ उन्हें खेत पर खोजने गए, तो उनके खेत में खुरपे तथा उनकी चप्पलें और मौके पर खून पड़ा मिला। खून के निशान के सहारे ग्रामीण परसादी के खेत मेें पहुंचे। तब तक बाघिन उनकी दाहिनी टांग खा चुकी थी। गर्दन पर भी पंजे के निशान थे और बाघिन वहीं मौजूद थी। बामुश्किल ग्रामीण बाबूराम का शव बाघिन के चंगुल से छुड़ा सके और दूर ले जाकर सड़क किनारे उनके शव को रखा। ग्रामीणों के मुताबिक बाघिन वहां भी पहुंच गई। तब उनके शव को गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास लाकर रखा गया।
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डीएफओ ने बताया कि बाघिन को पकड़ने की रणनीति बना ली गई है। इसके लिए तीन पिंजरे मंगा लिए गए हैं। बाघिन की लोकेशन लेने के लिए दुधवा से दो हाथी भी बुलाए जा रहे हैं। रेंजर डीएस यादव ने बताया कि बाघिन को या तो पिंजरे में कैद किया जाएगा या फिर उसे ट्रैंक्युलाइज करके पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बाघिन अब और किसी ग्रामीण को अपना शिकार न बना सके इसके पूर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाघिन टीकाराम और बाबूराम का शिकार करने के बाद दोनों को खींचकर गन्ने के खेत में ले गई, इससे लगता है कि बाघिन ने जंगल के बजाए फिलहाल गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। डॉ. उत्कर्ष शुक्ला के मुताबिक फिलहाल बाघिन की लोकेशन घटनास्थल वाले गन्ने के खेतों में ही होने की संभावना है। उन्होंने पूर क्षेत्र का पैदल जायजा लेने और पगमार्क देखने के बाद यह बात बताई। उधर चीफ कंजर्वेटर इवा शर्मा भी मैलानी में कैंप किए हुए हैं और उन्हीं के निर्देशन में ऑपेरशन टाइगर चलाया जा रहा है।
विधवा बेटी का छिन गया सहारा
बाबूराम अपनी विधवा बेटी अनीता के साथ ही खेत में छप्पर डालकर रहते थे। बेटी का वही सहारा थे। बाबूराम की मौत के बाद उसका रो-रोकर बुरा हाल है। वह कहती है कि उसका सहारा छिन गया। अब उसका गुजर-बसर कैसे होगा। यह चिंता उसे खाए जा रही है।
पीएसी भी आएगी आज
मौके पर वन अधिकारियों के अलावा एसओ मैलानी अजय यादव भी मयफोर्स डटे रहे। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की भीड़ मौके पर एकत्रित होने से ऑपरेशन टाइगर में दिक्कतें हो रही हैं। बार-बार कहने के बावजूद ग्रामीण मौके से दूर नहीं जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सोमवार को पीएसी भी गांव में पहुंच जाएगी।
बाघ की तलाश में दुधवा से मैलानी भेजे गए दो हाथी
पलियाकलां। मैलानी में बाघ द्वारा दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतारे जाने के बाद जागे पार्क प्रशासन ने अब बाघ की तलाश तेज कर दी है। इसके लिए दुधवा नेशनल पार्क से दो हाथियों को मैलानी भेजा गया है।
बीते दिवस मैलानी क्षेत्र के छेदीपुर गांव में बाघ द्वारा दो लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है। जिसके लिए पार्क प्रशासन ने दुधवा नेशनल पार्क से दो हाथियों को वहां भेजा है। यह हाथी ट्रकों से मैलानी गए हैं। दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि ने बताया कि दो अलग-अलग ट्रकों से इन हाथियों को मैलानी भेजा गया है। हाथियों के जरिये कांबिंग कर बाघ की लोकेशन पता की जाएगी।
पांच दिन में किशोरी समेत तीन लोग बने बाघ-बाघिन का निवाला
लखीमपुर खीरी। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज में अलग-अलग घटनाओं में बाघ और बाघिन एक किशोरी समेत तीन लोगों को निवाला बना चुके हैं। वन विभाग और विशेषज्ञों की माने तो मैलानी रेंज की गदनिया बीट में सुरजनपुर कपरहा कुआं गांव की किशोरी सरस्वती पर हमला करने वाला बाघ नर था जबकि खरेहटा बीट के छेदीपुर गांव में 24 घंटे के अंदर दो लोगों टीकाराम और बाबूराम का शिकार एक ही बाघिन ने किया।
मालूम हो कि 15 अगस्त को मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ वन ब्लाक जंगल में लकड़ी बीनने गई सुरजनपुर कपरहा कुआं गांव निवासी हिंछलाल की 13 वर्षीय बेटी सरस्वती पर बाघ ने हमला कर उसकी जान ले ली थी। इसके बाद इसी रेंज के गदनिया बीट के छेदीपुर गांव में 19 अगस्त को टीकाराम और 20 अगस्त को बाबूराम को बाघिन ने निवाला बनाया। इस तरह पांच दिन के अंदर दो अलग अलग गांवों के तीन लोगों को बाघ-बाघिन ने अपना शिकार बनाया है।
वनाधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने पगमार्क देखकर इस बात की पुष्टि की है कि लक्ष्मी का शिकार बाघ ने जबकि टीकाराम और बाबूराम का शिकार बाघिन ने किया है। फिलहाल ताबाड़तोड़ बाघ-बाघिन के हमलों से जंगल से सटे गांव के लोग बुरी तरह दहशत में हैं।