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...शोपीस बनकर रह जाएंगी डबल स्टोरी बैरकें

Fri, 10 Jul 2015 06:11 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Fri, 10 Jul 2015 06:11 PM IST
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... Double Story barracks will become showpiece
जिला कारागार में क्षमता से दोगुने बंदी निरुद्ध हैं। जिन्हें नई बैरकों में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए कारागार प्रशासन की कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम पिछले चार साल से नए बैरकों का निर्माण कर रहा है। 240 बंदियों के  लिए नए बैरकें  बनकर तैयार भी हो गई हैं, लेकिन शासन की कारागार की सारी जमीन को घेरने के निर्देश से इसमें बाधा पैदा हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश के बाद कार्यदाई संस्था ने काम रोक दिया है और बजट को दोबारा पुनरीक्षित करने का प्रस्ताव भेज दिया है। इससे बंदियों के रहने के लिए बनाई गईं डबल स्टोरी बैरकों समेत तमाम बैरकें सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।
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जिला कारागार में 725 बंदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में कारागार में 1500 बंदी निरुद्ध हैं। करीब चार साल पहले बंदियों के लिए अलग से डबल स्टोरी बनाने की मंजूरी मिली। जिसके बाद 30-30 बंदियों की क्षमता वाले चार डबल स्टोरी बैरक, पाकशाला, शौचालय आदि के  निर्माण का कार्य शुरू किया गया। इसके साथ ही इतनी क्षमता की ही एक अन्य बैरक का निर्माण कार्य शुरू किया गया। मौजूदा समय में 240 बंदियों के रहने के लिए नई बैरकें बनकर तैयार हो गई हैं। बैरकों की पेंटिंग का कार्य आखिरी स्टेज पर पहुंच गया है। लेकिन अभी पुरानी बैरकों से बंदियों को नई बैरकों में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि शासन का निर्देश है कि कारागार की बाउंड्रीवाल का दायरा बढ़ाकर सारी जमीन की घेराबंदी कर ली जाए। कारागार से सटे तालाब को भी मेनवॉल के भीतर करना है। शासन के इस फरमान के बाद बैरकों का निर्माण कर रही कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम ने मेनवॉल के निर्माण का काम रोक कर दिया है। बैरकें भी अभी हैंडओवर नहीं हो पाई हैं। अधिकारियों का कहना है कि कार्यदाई संस्था द्वारा बजट के पुनरीक्षण के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर नया बजट नहीं जारी होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।
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जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि डबल स्टोरी बैरक बनकर पूरी तरह तैयार है लेकिन राजकीय निर्माण निगम का पुनरीक्षण प्रस्ताव पर शासन से दिशा-निर्देश आना बाकी है। यह तय है कि मेनवॉल का काम पूरा होने के बाद ही नए बैरकों में बंदियों को शिफ्ट किया जाएगा।
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