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बवाल की वजह कुछ और भी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:28 PM IST
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बवाल
- फोटो : अमर उजाला
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- 2014 की घटना से जोड़कर देख रहे लोग
वीडियो वायरल होने से फैले रोष में वर्ष 2014 एक लड़की के अपहरण की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। इसी के चलते शांत हो चुका माहौल दोबारा गर्मा गया और शहर को कर्फ्यू को झेलना पड़ा।
हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक इस शहर में न कभी कर्फ्यू के हालात बने और न ही बनने की कल्पना की जा सकती है। यह दीगर बात है कि 1984 में सिख दंगों के कारण जिले में कर्फ्यू लगाया गया, लेकिन यहां कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई थी। लेकिन बुधवार को शहर के अमनचैन को नजर लग गई। दबी जुबान लोगों में यह चर्चा रही कि 2014 में लड़की के अगवा करने के मामले में दबा आक्रोश अब फूटा। दरअसल 2014 में एक इंग्लिश स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा को अगवा कर लिया गया था, जिसमें एक शिक्षक और कुछ रसूखदार लोगों का नाम आया था। बाद में लड़की को ढूंढ निकाला गया। तब मामले को लेकर दो वर्गों में तनाव की स्थित पैदा हुई थी। तत्कालीन एसपी सत्येंद्र कुमार सिंह को भी आरोपों का सामना करना पड़ा। बाद में उसी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक के खिलाफ न सिर्फ केस दर्ज हुआ, बल्कि उसके घर की कुर्की और गिरफ्तारी भी हुई। उसका साथ देने में एक शो-रूम संचालक का भी नाम आया था। गोली चलने और तोड़फोड़ की घटना को लोग उसी से जोड़ के देख रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष की लड़कियों, महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी का वीडियो वायरल हुआ तो ढाई साल पहले के जख्म एक बार फिर हरे हुए और बदले की भावना उभर आई।
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वीडियो वायरल होने से फैले रोष में वर्ष 2014 एक लड़की के अपहरण की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। इसी के चलते शांत हो चुका माहौल दोबारा गर्मा गया और शहर को कर्फ्यू को झेलना पड़ा।
हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक इस शहर में न कभी कर्फ्यू के हालात बने और न ही बनने की कल्पना की जा सकती है। यह दीगर बात है कि 1984 में सिख दंगों के कारण जिले में कर्फ्यू लगाया गया, लेकिन यहां कोई भी अप्रिय घटना नहीं हुई थी। लेकिन बुधवार को शहर के अमनचैन को नजर लग गई। दबी जुबान लोगों में यह चर्चा रही कि 2014 में लड़की के अगवा करने के मामले में दबा आक्रोश अब फूटा। दरअसल 2014 में एक इंग्लिश स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा को अगवा कर लिया गया था, जिसमें एक शिक्षक और कुछ रसूखदार लोगों का नाम आया था। बाद में लड़की को ढूंढ निकाला गया। तब मामले को लेकर दो वर्गों में तनाव की स्थित पैदा हुई थी। तत्कालीन एसपी सत्येंद्र कुमार सिंह को भी आरोपों का सामना करना पड़ा। बाद में उसी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक के खिलाफ न सिर्फ केस दर्ज हुआ, बल्कि उसके घर की कुर्की और गिरफ्तारी भी हुई। उसका साथ देने में एक शो-रूम संचालक का भी नाम आया था। गोली चलने और तोड़फोड़ की घटना को लोग उसी से जोड़ के देख रहे हैं। अब सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष की लड़कियों, महिलाओं पर अश्लील टिप्पणी का वीडियो वायरल हुआ तो ढाई साल पहले के जख्म एक बार फिर हरे हुए और बदले की भावना उभर आई।
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