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आखिर चोरी की ही निकली इनोवा
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 02 Feb 2016 11:53 PM IST
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आलोक कार सेल्स पर चोरी की गाड़ियों के बेचने के मामले में पुलिस के प्रयास आखिर रंग लाए। आरोपियों ने डीआईजी से फर्जी शिकायत कर पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच भी बैठा दी लेकिन चोरी की गाड़ियों की खरीदफरोख्त करने वाले रैकेट का खुलासा करने में लगे पुलिस कर्मियों ने हार नहीं मानी। मालिकाना विवाद को लेकर करीब पांच महीने पहले जब्त की गई इनोवा आखिरकार चोरी की निकली। लखनऊ के फोरेंसिक लैब ने अपनी जांच में इनोवा के चोरी होने की पुष्टि की। रिपोर्ट के बाद कोतवाली पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। विवेचक ने रजिस्ट्रेशन निरस्त कराने के लिए एआरटीओ प्रशासन को पत्र भेजा है।
अगस्त 2015 में कोतवाली पुलिस ने चोरी की तीन लग्जरी गाड़ियां बरामद कर आलोक कार सेल्स के प्रोपराइटर आलोक श्रीवास्तव निवासी मोहल्ला भुईफोरवानाथ को गिरफ्तार कर चालान भेजा था। कुछ दिन बाद एक इनोवा कार यूपी 78 बीसी 8677 के स्वामित्व पर विवाद के चलते कोतवाली पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया था। यह कार भी आलोक कार सेल्स से खरीदी गई थी। इसी बीच अमरोहा में भी इसी नंबर की एक और कार बरामद हुई। ऐसे में पुलिस ने इनोवा को जांच में शामिल कर लिया। कार मालिक होने का दावा करने वाले मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील ने मुरादाबाद निवासी किसी मकबूल से गाड़ी खरीदने की बात कहते हुए फर्जी कागजों के आधार पर किसी व्यक्ति को मकबूल बनाकर कोर्ट में खड़ा कर गाड़ी रिलीज करा ली। एनओसी की मदद से शकील ने परिवहन विभाग से रजिस्ट्रेशन नंबर भी ले लिया। पुलिस ने जांच जारी रखी तो पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ फंसाने का आरोप लगाते हुए डीआईजी से शिकायत की गई। उन्होंने पुलिस कर्मियों की जांच कराई। फिर भी एसएसआई रामअवतार यादव और विवेचक राजबली सिंह ने जांच जारी रखते हुए कार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा। वहां चेसिस नंबर में छेड़छाड़ और इंजन नंबर कूटरचित पाया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी शकील और मकबूल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया हैै।
प्रयोगशाला जांच में इनोवा की चेसिस और इंजन नंबर में छेड़छाड़ पाई गई है। यानी कार चोरी की है, इसकी पुष्टि हो गई है। आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
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- महेंद्र सिंह सचान, एसएसआई, सदर कोतवाली
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अगस्त 2015 में कोतवाली पुलिस ने चोरी की तीन लग्जरी गाड़ियां बरामद कर आलोक कार सेल्स के प्रोपराइटर आलोक श्रीवास्तव निवासी मोहल्ला भुईफोरवानाथ को गिरफ्तार कर चालान भेजा था। कुछ दिन बाद एक इनोवा कार यूपी 78 बीसी 8677 के स्वामित्व पर विवाद के चलते कोतवाली पुलिस ने कार को कब्जे में ले लिया था। यह कार भी आलोक कार सेल्स से खरीदी गई थी। इसी बीच अमरोहा में भी इसी नंबर की एक और कार बरामद हुई। ऐसे में पुलिस ने इनोवा को जांच में शामिल कर लिया। कार मालिक होने का दावा करने वाले मोहल्ला प्यारेपुर निवासी शकील ने मुरादाबाद निवासी किसी मकबूल से गाड़ी खरीदने की बात कहते हुए फर्जी कागजों के आधार पर किसी व्यक्ति को मकबूल बनाकर कोर्ट में खड़ा कर गाड़ी रिलीज करा ली। एनओसी की मदद से शकील ने परिवहन विभाग से रजिस्ट्रेशन नंबर भी ले लिया। पुलिस ने जांच जारी रखी तो पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ फंसाने का आरोप लगाते हुए डीआईजी से शिकायत की गई। उन्होंने पुलिस कर्मियों की जांच कराई। फिर भी एसएसआई रामअवतार यादव और विवेचक राजबली सिंह ने जांच जारी रखते हुए कार को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा। वहां चेसिस नंबर में छेड़छाड़ और इंजन नंबर कूटरचित पाया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी शकील और मकबूल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया हैै।
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प्रयोगशाला जांच में इनोवा की चेसिस और इंजन नंबर में छेड़छाड़ पाई गई है। यानी कार चोरी की है, इसकी पुष्टि हो गई है। आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
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- महेंद्र सिंह सचान, एसएसआई, सदर कोतवाली