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फर्जी दस्तावेजों से नौकरी करने वाला एक और शिक्षक बर्खास्त
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लखीमपुर खीरी। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों से शिक्षक बनने के एक और मामले का खुलासा हुआ है। बीएसए बुद्ध प्रिय सिंह ने आरोपी शिक्षक को बर्खास्त कर दिया है। उसकी नियुक्ति 30 अगस्त 2016 को निघासन क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मिठुई में की हुई थी, दो सितंबर 2016 को शिक्षक ने कार्यभार ग्रहण किया था।
फर्रूखाबाद के थाना मोहम्मदाबाद के गांव खाता निवासी शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति 16448 शिक्षक भर्ती के तहत हुई थी, शिक्षक पात्रता प्रमाण पत्र (टीईटी प्राथमिक स्तर) और विशिष्ट बीटीसी प्रमाण पत्र का सत्यापन प्रतापगढ़ के अतरसंड स्थित डायट के प्राचार्य से कराया गया। सत्यापन में दोनों प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए, जिसमें डायट प्राचार्य ने हस्ताक्षर फर्जी होने की पुष्टि कर दी। इसके बाद बीएसए ने छह जून 2017 को आरोपी शिक्षक का वेतन रोकने का आदेश दिया, 22 जून 2017 को पत्र के माध्यम से आरोपी शिक्षक को बीएसए ने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, लेकिन तय समय सीमा में शिक्षक उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अंतिम नोटिस जारी होने पर शिक्षक ने दोबारा अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की, जिस पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी के माध्यम से सत्यापन कराया गया। सचिव ने 29 अक्तूबर 2018 को रिपोर्ट भेजी, जिसमें टीईटी परीक्षा प्रमाण पत्र के मूल अभिलेख न मिलने की टिप्पणी की गई है। बीएसए ने बताया कि आरोपी शिक्षक को कई बार पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसलिए शैलेंद्र सिंह को धोखेबाजी और जालसाजी से अभिलेखों का उपयोग करके फर्जी और कूटरचित अभिलेखों से नियुक्ति हासिल करने का दोषी पाया गया है।
आरोपी शिक्षक की विशिष्ट बीटीसी और टीईटी प्रमाण पत्र फर्जी एवं कूटरचित पाए गए हैं। इसलिए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति/पदस्थापन प्रारंभ से निरस्त करते हुए सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश बीईओ निघासन को दिए गए हैं।
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- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए
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फर्रूखाबाद के थाना मोहम्मदाबाद के गांव खाता निवासी शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति 16448 शिक्षक भर्ती के तहत हुई थी, शिक्षक पात्रता प्रमाण पत्र (टीईटी प्राथमिक स्तर) और विशिष्ट बीटीसी प्रमाण पत्र का सत्यापन प्रतापगढ़ के अतरसंड स्थित डायट के प्राचार्य से कराया गया। सत्यापन में दोनों प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए, जिसमें डायट प्राचार्य ने हस्ताक्षर फर्जी होने की पुष्टि कर दी। इसके बाद बीएसए ने छह जून 2017 को आरोपी शिक्षक का वेतन रोकने का आदेश दिया, 22 जून 2017 को पत्र के माध्यम से आरोपी शिक्षक को बीएसए ने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, लेकिन तय समय सीमा में शिक्षक उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अंतिम नोटिस जारी होने पर शिक्षक ने दोबारा अभिलेखों का सत्यापन कराने की मांग की, जिस पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी के माध्यम से सत्यापन कराया गया। सचिव ने 29 अक्तूबर 2018 को रिपोर्ट भेजी, जिसमें टीईटी परीक्षा प्रमाण पत्र के मूल अभिलेख न मिलने की टिप्पणी की गई है। बीएसए ने बताया कि आरोपी शिक्षक को कई बार पक्ष रखने के लिए मौका दिया गया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इसलिए शैलेंद्र सिंह को धोखेबाजी और जालसाजी से अभिलेखों का उपयोग करके फर्जी और कूटरचित अभिलेखों से नियुक्ति हासिल करने का दोषी पाया गया है।
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आरोपी शिक्षक की विशिष्ट बीटीसी और टीईटी प्रमाण पत्र फर्जी एवं कूटरचित पाए गए हैं। इसलिए सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति/पदस्थापन प्रारंभ से निरस्त करते हुए सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश बीईओ निघासन को दिए गए हैं।
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- बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए