{"_id":"5a43d80c4f1c1b6e468bcf47","slug":"141514395660-lakhimpur-kheri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फूस काटने के दौरान हुआ था जोगेंदर पर हमला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फूस काटने के दौरान हुआ था जोगेंदर पर हमला
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांकेगंज।
किशनपुर सेंक्चुरी इलाके में पहली बार बाघिन के हमले में हुई युवक की मौत के बाद आसपास के लोग दहशत में हैं। इस मामले में वन विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। वन विभाग रिजर्व फॉरेस्ट में भी अवैध रूप से इंसानी घुसपैठ रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। वन विभाग की मानें तो जोगेंदर पर बाघिन के हमले की घटना उस समय हुई जब वह किशनपुर सेंक्चुरी के सुल्तानपुर बीट की कंपार्टमेंट 16 के नाचताल से घास फाटा क्षेत्र में फूस काटने के लिए जंगल के अंदर गया था। ग्रामीणों ने वन विभाग को जंगल के बाहर हमला बताकर शव जंगल में खींच ले जाने की बात बताई थी।
वन विभाग के मुताबिक किशनपुर सेंक्चुरी कोर जोन की सुल्तानपुर बीट के कंपार्टमेंट 16 में जिस जगह जोगेंदर का शव पड़ा था, उसी जगह फूस भी कटा पड़ा था। इससे वन विभाग को यकीन है कि जोगेंदर पर हमला जंगल के अंदर हुआ न कि बाहर, वह भी चोरी से फूस काटने के दौरान। जोगेंदर के लापता होने की सूचना उसके पिता जगदीश सिंह ने सबसे पहले सोमवार की शाम ही वन विभाग की तारकोठी चौकी को दी थी। वन कर्मियों ने इसके बाबत अनभिज्ञता तो जाहिर की, लेकिन उसे तलाश करने की कोई जहमत नहीं उठाई।
मंगलवार सुबह घासफाटा में जोगिंदर का अधखाया शव मिलने के बाद भी ग्रामीणों ने वन विभाग और पुलिस को एक साथ सूचित किया। पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी की पुलिस तो आननफानन में मौके पर पहुंच गई, और शव को जंगल से बाहर लाकर पंचनामा कर भर उसे पोस्टमार्टम के लिए पीलीभीत भेज दिया, जबकि वन विभाग की टीम दो घंटे बाद मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर बाघिन के हमले की पुष्टि की।
विज्ञापन
किशनपुर सेंक्चुरी के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाघिन के हमले की घटना निश्चित रूप से घास फाटा जंगल के अंदर फूस काटने के दौरान ही हुई है। क्योंकि काफी बारीकी से छानबीन के बाद भी जंगल के बाहर खेतों में किसी बाघ या बाघिन के पगचिन्ह नहीं मिले, जबकि घास फाटा घटनास्थल पर हमलावर हुई बाघिन के स्पष्ट पगचिन्ह कई जगह मिले हैं।
वन विभाग की लापरवाही से जंगल में हो रही घुसपैठ
वन कर्मियों की लापरवाही से किशनपुर जैसे संरक्षित वन क्षेत्र में घास-फूस, जलौनी लकड़ी आदि काटने के लिए अवैध रूप से घुसपैठ हो रही है। वन कर्मियों की लापरवाही का फायदा उठाकर जोगिंदर सिंह जंगल के अंदर फूस काटने के लिए गया और वहां बैठी बाघिन का निवाला बन गया।
मुआवजे के लिए गढ़ी जा रही कहानी
वन विभाग जंगल से बाहर बाघ-बाघिन के हमले में मारे जाने पर पांच लाख रुपये का मुआवजा देता है। जंगल के अंदर यदि घटना होती है, तब मुआवजा नहीं बनता है। वन विभाग से मुआवजे की राशि पाने के लिए जोगेंदर के परिवार वाले उसके जंगल से सटे खेत देखने जाने और खेत में ही बाघिन का हमला होने की बात कह रहे हैं, ताकि मुआवजा मिलने में कोई रुकावट न आए। इससे पहले भी मैलानी और महेशपुर रेंज में भी ऐसे ही दो मामले लटके हुए हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघिन के हमले में जोगिंदर सिंह की मौत मामले की जांच कराई जा रही है। देखा जा रहा है कि जोगेंदर पर बाघिन का हमला जंगल के अंदर हुआ या बाहर। तथ्यों का खुलासा और स्थित स्पष्ट होने पर ही मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ अनिल पटेल, प्रभारी डीडी, दुधवा नेशनल पार्क
विज्ञापन
किशनपुर सेंक्चुरी इलाके में पहली बार बाघिन के हमले में हुई युवक की मौत के बाद आसपास के लोग दहशत में हैं। इस मामले में वन विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। वन विभाग रिजर्व फॉरेस्ट में भी अवैध रूप से इंसानी घुसपैठ रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। वन विभाग की मानें तो जोगेंदर पर बाघिन के हमले की घटना उस समय हुई जब वह किशनपुर सेंक्चुरी के सुल्तानपुर बीट की कंपार्टमेंट 16 के नाचताल से घास फाटा क्षेत्र में फूस काटने के लिए जंगल के अंदर गया था। ग्रामीणों ने वन विभाग को जंगल के बाहर हमला बताकर शव जंगल में खींच ले जाने की बात बताई थी।
वन विभाग के मुताबिक किशनपुर सेंक्चुरी कोर जोन की सुल्तानपुर बीट के कंपार्टमेंट 16 में जिस जगह जोगेंदर का शव पड़ा था, उसी जगह फूस भी कटा पड़ा था। इससे वन विभाग को यकीन है कि जोगेंदर पर हमला जंगल के अंदर हुआ न कि बाहर, वह भी चोरी से फूस काटने के दौरान। जोगेंदर के लापता होने की सूचना उसके पिता जगदीश सिंह ने सबसे पहले सोमवार की शाम ही वन विभाग की तारकोठी चौकी को दी थी। वन कर्मियों ने इसके बाबत अनभिज्ञता तो जाहिर की, लेकिन उसे तलाश करने की कोई जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन
मंगलवार सुबह घासफाटा में जोगिंदर का अधखाया शव मिलने के बाद भी ग्रामीणों ने वन विभाग और पुलिस को एक साथ सूचित किया। पीलीभीत जिले के थाना सेहरामऊ उत्तरी की पुलिस तो आननफानन में मौके पर पहुंच गई, और शव को जंगल से बाहर लाकर पंचनामा कर भर उसे पोस्टमार्टम के लिए पीलीभीत भेज दिया, जबकि वन विभाग की टीम दो घंटे बाद मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर बाघिन के हमले की पुष्टि की।
विज्ञापन
किशनपुर सेंक्चुरी के डिप्टी रेंजर सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बाघिन के हमले की घटना निश्चित रूप से घास फाटा जंगल के अंदर फूस काटने के दौरान ही हुई है। क्योंकि काफी बारीकी से छानबीन के बाद भी जंगल के बाहर खेतों में किसी बाघ या बाघिन के पगचिन्ह नहीं मिले, जबकि घास फाटा घटनास्थल पर हमलावर हुई बाघिन के स्पष्ट पगचिन्ह कई जगह मिले हैं।
वन विभाग की लापरवाही से जंगल में हो रही घुसपैठ
वन कर्मियों की लापरवाही से किशनपुर जैसे संरक्षित वन क्षेत्र में घास-फूस, जलौनी लकड़ी आदि काटने के लिए अवैध रूप से घुसपैठ हो रही है। वन कर्मियों की लापरवाही का फायदा उठाकर जोगिंदर सिंह जंगल के अंदर फूस काटने के लिए गया और वहां बैठी बाघिन का निवाला बन गया।
मुआवजे के लिए गढ़ी जा रही कहानी
वन विभाग जंगल से बाहर बाघ-बाघिन के हमले में मारे जाने पर पांच लाख रुपये का मुआवजा देता है। जंगल के अंदर यदि घटना होती है, तब मुआवजा नहीं बनता है। वन विभाग से मुआवजे की राशि पाने के लिए जोगेंदर के परिवार वाले उसके जंगल से सटे खेत देखने जाने और खेत में ही बाघिन का हमला होने की बात कह रहे हैं, ताकि मुआवजा मिलने में कोई रुकावट न आए। इससे पहले भी मैलानी और महेशपुर रेंज में भी ऐसे ही दो मामले लटके हुए हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघिन के हमले में जोगिंदर सिंह की मौत मामले की जांच कराई जा रही है। देखा जा रहा है कि जोगेंदर पर बाघिन का हमला जंगल के अंदर हुआ या बाहर। तथ्यों का खुलासा और स्थित स्पष्ट होने पर ही मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ अनिल पटेल, प्रभारी डीडी, दुधवा नेशनल पार्क