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नेपाल भागे कमरू के सिमी से जुड़े होने का शक
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लखीमपुर खीरी। क्राइस्ट चर्च पर बम धमाके का मास्टरमाइंड बहराइच निवासी कमरू उर्फ कमरुद्दीन के स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से तार जुड़े होने का खुफिया एजेंसियों ने शक जताया है। वर्ष 2016 में पड़ोसी जिले बहराइच में प्रतिबंधित इस संगठन के 300 सदस्य बनाए जाने का खुलासा हुआ था। पुलिस और खुफिया एजेंसियां क्राइस्ट चर्च पर पांच महीने बाद ही हुए बम धमाके को इसी से जोड़कर देख रही हैं। ये तथ्य सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
बहराइच जिले के महसी तहसील क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन सिमी के नेटवर्क का नौ फरवरी 2016 को पुलिस ने खुलासा किया था। इस नेटवर्क को अलीगढ़ निवासी डॉ. एमएम शेख चला रहा था। उसने वर्ष 2015 में महसी की बौंडी बाजार में महफूज नाम के व्यक्ति के मकान में दो दुकानें किराए पर लेकर क्लीनिक खोल रखे थे। खुफिया एजेंसी के सूत्रों की माने तो उसने अपनी पहचान बाबा के नाम से बना रखी थी। हालांकि वह पुलिस के हाथ नहीं लगा था, लेकिन पुलिस ने जब पूरे मामले की जांच की तो यह बात साफ हो गई कि डॉ. एमएम शेख ने महसी, खैराघाट, जैतीपुर, बौंडी, मिहींपुरवा, नानपारा, खैरीघाट आदि क्षेत्र में 300 युवाओं को सिमी का सदस्य बनाया।
सिमी के इस क्षेत्र में नेटवर्क का खुलासा होने के पांच महीने बाद ही लखीमपुर शहर स्थित क्राइस्ट चर्च पर दो बम धमाके हुए थे। इन धमाकों का मास्टरमाइंड कमरू और उसका साथी गुड्डू भी बहराइच के ही रहने वाले हैं। खुफिया विभाग इस धमाके को सिमी की गतिविधियों से जोड़कर देख रही है। सूत्रों का कहना है कि तराई का इलाका नेपाल सीमा से जुड़ा है और इस पूरे इलाके में काफी संदिग्ध गतिविधियां होती हैं। खुफिया एजेंसियां पहले भी नेपाल सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों के 28 स्लीपिंग माड्यूल होने की आशंका जता चुकी हैं। एसपी पूनम भी कमरू और उसके साथी गुड्डू का कनेक्शन किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका पहले भी जता चुकी हैं। इससे उसके सिमी से कनेक्शन होने की आशंका बढ़ गई है।
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बहराइच जिले के महसी तहसील क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन सिमी के नेटवर्क का नौ फरवरी 2016 को पुलिस ने खुलासा किया था। इस नेटवर्क को अलीगढ़ निवासी डॉ. एमएम शेख चला रहा था। उसने वर्ष 2015 में महसी की बौंडी बाजार में महफूज नाम के व्यक्ति के मकान में दो दुकानें किराए पर लेकर क्लीनिक खोल रखे थे। खुफिया एजेंसी के सूत्रों की माने तो उसने अपनी पहचान बाबा के नाम से बना रखी थी। हालांकि वह पुलिस के हाथ नहीं लगा था, लेकिन पुलिस ने जब पूरे मामले की जांच की तो यह बात साफ हो गई कि डॉ. एमएम शेख ने महसी, खैराघाट, जैतीपुर, बौंडी, मिहींपुरवा, नानपारा, खैरीघाट आदि क्षेत्र में 300 युवाओं को सिमी का सदस्य बनाया।
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सिमी के इस क्षेत्र में नेटवर्क का खुलासा होने के पांच महीने बाद ही लखीमपुर शहर स्थित क्राइस्ट चर्च पर दो बम धमाके हुए थे। इन धमाकों का मास्टरमाइंड कमरू और उसका साथी गुड्डू भी बहराइच के ही रहने वाले हैं। खुफिया विभाग इस धमाके को सिमी की गतिविधियों से जोड़कर देख रही है। सूत्रों का कहना है कि तराई का इलाका नेपाल सीमा से जुड़ा है और इस पूरे इलाके में काफी संदिग्ध गतिविधियां होती हैं। खुफिया एजेंसियां पहले भी नेपाल सीमा पर विभिन्न आतंकी संगठनों के 28 स्लीपिंग माड्यूल होने की आशंका जता चुकी हैं। एसपी पूनम भी कमरू और उसके साथी गुड्डू का कनेक्शन किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका पहले भी जता चुकी हैं। इससे उसके सिमी से कनेक्शन होने की आशंका बढ़ गई है।
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