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घर में खाने की है मजबूरी, इसलिए करने आए मजदूरी
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लखीमपुर खीरी। कोई भी गरीब और जरूरतमंद भूखा न रहे, इसके लिए एक हजार रुपये देने से लेकर मुफ्त में चावल बंटवाए गए, लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े लोगों की लापरवाही के कारण तमाम परिवारों के आगे खाने का संकट खड़ा हो गया है। घरवालों को दो वक्त की रोटी मुहैया कराने के लिए घर से निकलकर मजदूरी करने को विवश हैं।
ऐसा ही हाल मोहल्ला बरखेरवा निवासी 60 साल के किशोर कुमार का है। मोची का काम करने वाले किशोर बताते हैं कि घर में पत्नी, सास, बेटा, बहू और तीन पोती हैं। दस किलो चावल मिले थे। मगर आठ लोगों के परिवार में सारा राशन कुछ ही दिन में खर्च हो गया। बेटा मजदूरी करता है। ऐसे में काम न मिलने के कारण वह भी घर पर बैठा है। किशोर बताते हैं कि एक हजार रुपये के लिए कई दिन पहले नगर पालिका में फॉर्म जमा किया था। मगर, अब तक खाते में पैसा नहीं आया। जो पैसे अब तक जोड़े थे वह भी खत्म हो गए। अब कोई व्यवस्था न होने के काम करने के लिए घर से बाहर आना पड़ा। किशोर ने बताया कि दिनभर में जो आमदनी होगी उसी से परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था होगी।
अधिशासी अधिकारी आरआर अंबेश का कहना है कि एक हजार से अधिक लोगों के खातों में धनराशि भेज दी गई है। कुछ के खाता नंबर व आईएफएससी कोड में त्रुटि होने से पैसा नहीं पहुंचा है। उनसे फोन पर संपर्क कर संशोधन किया जा रहा है।
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ऐसा ही हाल मोहल्ला बरखेरवा निवासी 60 साल के किशोर कुमार का है। मोची का काम करने वाले किशोर बताते हैं कि घर में पत्नी, सास, बेटा, बहू और तीन पोती हैं। दस किलो चावल मिले थे। मगर आठ लोगों के परिवार में सारा राशन कुछ ही दिन में खर्च हो गया। बेटा मजदूरी करता है। ऐसे में काम न मिलने के कारण वह भी घर पर बैठा है। किशोर बताते हैं कि एक हजार रुपये के लिए कई दिन पहले नगर पालिका में फॉर्म जमा किया था। मगर, अब तक खाते में पैसा नहीं आया। जो पैसे अब तक जोड़े थे वह भी खत्म हो गए। अब कोई व्यवस्था न होने के काम करने के लिए घर से बाहर आना पड़ा। किशोर ने बताया कि दिनभर में जो आमदनी होगी उसी से परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था होगी।
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अधिशासी अधिकारी आरआर अंबेश का कहना है कि एक हजार से अधिक लोगों के खातों में धनराशि भेज दी गई है। कुछ के खाता नंबर व आईएफएससी कोड में त्रुटि होने से पैसा नहीं पहुंचा है। उनसे फोन पर संपर्क कर संशोधन किया जा रहा है।
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