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ओडिशा में फंसे खीरी के कामगारों ने मांगी मदद
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। लॉकडाउन के चलते खीरी जिले के ग्रंट नंबर तीन गांव के चार कामगार ओडिशा में फंस गए हैं। ओडिशा से फोन कर इन कामगारों ने अपने परिवार से मदद मांगी है।
ब्लॉक बांकेगंज की पंचायत ग्रंट नंबर तीन में बसे लोग मैकेनिक गिरी का काम करने बाहर जाते हैं। करीब चार कामगार पांच माह से आंध्र प्रदेश के पटना के बिसाखा में सटरिंग का काम कर रहा थे। अचानक लॉकडाउन के चलते यह कामगार घर आने के लिए एक ट्रक से वहां से चल दिए। इस बीच ओडिशा के जिला कोन्झर के टिकिरा गांव के ओडिशा आदर्श विद्यालय घाटगांव में क्वारंटीन कर दिए गए। घाटगांव से मोबाइल पर कुलवंत सिंह, सुखविंदर सिंह आदि ने बताया कि जब पहला लॉकडाउन खत्म हुआ तो उन्हें उम्मीद जगी कि अब घर आ जाएंगे, लेकिन बाद में वह फिर से लॉकडाडन में फंस कर रह गए। ओडिशा में करीब 28 दिन की क्वारंटीन अवधि बीत जाने के बाद ये अभी वहां से वापस घर नहीं आ पाए हैं। ऐसे में उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।
पैदल गोरखपुर जा रहे मजदूरों को बांटे फल
मैलानी उत्तराखंड में फंसे गोरखपुर के नौ मजदूर शुक्रवार को पैदल ही चार दिन बाद मैलानी पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से उत्तराखंड में काम न मिल पाने से उनके पास खाने की समस्या पैदा हो गई, लिहाजा वे वहां से पैदल ही अपने घरों को रवाना होकर यहां भूखे-प्यासे सुबह पहुंचे। इसकी जानकारी सलावतनगर के प्रधान प्रतिनिधि रमेश कुमार को हुई तो उन्होंने मजदूरों की खोज कर सबको केले और संतरे दिए। संवाद
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ब्लॉक बांकेगंज की पंचायत ग्रंट नंबर तीन में बसे लोग मैकेनिक गिरी का काम करने बाहर जाते हैं। करीब चार कामगार पांच माह से आंध्र प्रदेश के पटना के बिसाखा में सटरिंग का काम कर रहा थे। अचानक लॉकडाउन के चलते यह कामगार घर आने के लिए एक ट्रक से वहां से चल दिए। इस बीच ओडिशा के जिला कोन्झर के टिकिरा गांव के ओडिशा आदर्श विद्यालय घाटगांव में क्वारंटीन कर दिए गए। घाटगांव से मोबाइल पर कुलवंत सिंह, सुखविंदर सिंह आदि ने बताया कि जब पहला लॉकडाउन खत्म हुआ तो उन्हें उम्मीद जगी कि अब घर आ जाएंगे, लेकिन बाद में वह फिर से लॉकडाडन में फंस कर रह गए। ओडिशा में करीब 28 दिन की क्वारंटीन अवधि बीत जाने के बाद ये अभी वहां से वापस घर नहीं आ पाए हैं। ऐसे में उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।
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पैदल गोरखपुर जा रहे मजदूरों को बांटे फल
मैलानी उत्तराखंड में फंसे गोरखपुर के नौ मजदूर शुक्रवार को पैदल ही चार दिन बाद मैलानी पहुंचे। मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से उत्तराखंड में काम न मिल पाने से उनके पास खाने की समस्या पैदा हो गई, लिहाजा वे वहां से पैदल ही अपने घरों को रवाना होकर यहां भूखे-प्यासे सुबह पहुंचे। इसकी जानकारी सलावतनगर के प्रधान प्रतिनिधि रमेश कुमार को हुई तो उन्होंने मजदूरों की खोज कर सबको केले और संतरे दिए। संवाद
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