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जिला अस्पताल की ओपीडी बंद
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जिला अस्पताल में कोरोना की वजह से बंद ओपीडी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने शनिवार से सामान्य ओपीडी बंद कर दी है, जिससे अब मरीज पर्चा बनवाकर आम दिनों की तरह डॉक्टरों को दिखाकर दवा नहीं ले सकेंगे। बदली व्यवस्था में अब मरीजों को फ्लू कॉर्नर में पर्चा बनवाकर दिखाना होगा। वहीं इमरजेंसी सेवा पहले की तरह जारी रहेंगी।
जिला अस्पताल में रोजाना 1200 से 1400 तक नए पर्चे और करीब इतने ही मरीज पुराने पर्चों पर मरीज देखे जाते हैं। इस कारण जांच और दवा काउंटर पर मरीजों की भीड़ उमड़ती है, जिससे संक्रमण फैलने का लगातार खतरा बना रहता है। मौजूदा समय मे अस्पताल के कई डॉक्टर और स्टाफ भी संक्रमण की चपेट में आ चुका है। ऐसे में अस्पताल में डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएमएस ने शासन के निर्देश पर ओपीडी बंद कर दी है।
फ्लू वार्ड में पर्चा बनवाकर डॉक्टर को दिखाएं
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को फ्लू वार्ड में पर्चा बनवाना होगा। इसके बाद जो मर्ज होगी वहीं से संबंधित डॉक्टर के पास इलाज के लिए भेज दिया जाएगा। ओपीडी बंद करने का उद्देश्य मरीज एवं उनके साथ आने वाले तीमारदारों को संक्रमण से बचाना है।
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24 घंटों में 17 लोगों की मौत
जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में करीब 17 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इनकी मौत कोरोना से हुई है या फिर किसी अन्य बीमारी से, यह कह पाना मुश्किल है। मगर, इसमें ज्यादातर मरीज सांस न ले पाने की समस्या से पीड़ित थे।
कोरोना की जांच का न होना बना मुसीबत
जिला अस्पताल में कोविड की जांच का इंतजाम नहीं है। ऐसे में मरीज सीधे इमरजेंसी में आकर भर्ती हो जाते हैं। बीमार व्यक्ति संक्रमित है कि नहीं, इसकी पहचान करना मुश्किल होता है। ऐसे में संक्रमित होने की दशा में पीड़ित का इलाज सामान्य तरीके से होता है। इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले स्टाफ का कहना है कि अस्पताल में कोविड जांच हो, भले ही एंटिजन की व्यवस्था हो, जिससे पीड़ित की तत्काल जांच कर बीमारी के अनुसार इलाज किया जा सके। पिछले दिनों तमाम संदिग्ध मरीज आए, जिनकी चपेट में आकर स्टाफ के कई लोग संक्रमित हो गए। यदि यहीं जांच की व्यवस्था होती तो स्टाफ को सुरक्षित रखा जा सकता था।
पिछले 24 घंटे में 17 मौतें र्हुइं है। कारण स्पष्ट नहीं है। इसमें कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत होना बताया जा रहा है। सामान्य ओपीडी बंद कर दी गई है। अस्पताल में भीड़ होने से संक्रमण फैलने का खतरा बन रहा था। डॉक्टर सहित स्टाफ के कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। बीमारी की स्थिति में मरीज फ्लू कॉर्नर में पर्चा बनवाकर संबंधित डॉक्टर को दिखा सकेंगे। अस्पताल में वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। - डॉ आरसी अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
मोहम्मदी सीएचसी में भी ओपीडी बंद, भटकते रहे मरीज
मोहम्मदी। कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए प्रशासन ने सीएचसी में ओपीडी बंद करवा दी है। शनिवार सुबह जब सीएचसी में रोज की तरह मरीज दवा लेने के लिए आए तो अस्पताल को बंद देखकर इधर-उधर भटकते रहे।
मरीजों ने बताया कि पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि कोरोना की वजह से सरकार ने ओपीडी बंद करा दी है। एमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सीएमओ के आदेश के बाद शनिवार सुबह से ओपीडी बंद की गई हैं। जब तक जिला मुख्यालय से कोई आदेश नहीं आएगा तब तक ओपीडी बंद रहेगी और इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। संवाद
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जिला अस्पताल में रोजाना 1200 से 1400 तक नए पर्चे और करीब इतने ही मरीज पुराने पर्चों पर मरीज देखे जाते हैं। इस कारण जांच और दवा काउंटर पर मरीजों की भीड़ उमड़ती है, जिससे संक्रमण फैलने का लगातार खतरा बना रहता है। मौजूदा समय मे अस्पताल के कई डॉक्टर और स्टाफ भी संक्रमण की चपेट में आ चुका है। ऐसे में अस्पताल में डॉक्टर एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएमएस ने शासन के निर्देश पर ओपीडी बंद कर दी है।
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फ्लू वार्ड में पर्चा बनवाकर डॉक्टर को दिखाएं
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को फ्लू वार्ड में पर्चा बनवाना होगा। इसके बाद जो मर्ज होगी वहीं से संबंधित डॉक्टर के पास इलाज के लिए भेज दिया जाएगा। ओपीडी बंद करने का उद्देश्य मरीज एवं उनके साथ आने वाले तीमारदारों को संक्रमण से बचाना है।
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24 घंटों में 17 लोगों की मौत
जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में करीब 17 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इनकी मौत कोरोना से हुई है या फिर किसी अन्य बीमारी से, यह कह पाना मुश्किल है। मगर, इसमें ज्यादातर मरीज सांस न ले पाने की समस्या से पीड़ित थे।
कोरोना की जांच का न होना बना मुसीबत
जिला अस्पताल में कोविड की जांच का इंतजाम नहीं है। ऐसे में मरीज सीधे इमरजेंसी में आकर भर्ती हो जाते हैं। बीमार व्यक्ति संक्रमित है कि नहीं, इसकी पहचान करना मुश्किल होता है। ऐसे में संक्रमित होने की दशा में पीड़ित का इलाज सामान्य तरीके से होता है। इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले स्टाफ का कहना है कि अस्पताल में कोविड जांच हो, भले ही एंटिजन की व्यवस्था हो, जिससे पीड़ित की तत्काल जांच कर बीमारी के अनुसार इलाज किया जा सके। पिछले दिनों तमाम संदिग्ध मरीज आए, जिनकी चपेट में आकर स्टाफ के कई लोग संक्रमित हो गए। यदि यहीं जांच की व्यवस्था होती तो स्टाफ को सुरक्षित रखा जा सकता था।
पिछले 24 घंटे में 17 मौतें र्हुइं है। कारण स्पष्ट नहीं है। इसमें कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत होना बताया जा रहा है। सामान्य ओपीडी बंद कर दी गई है। अस्पताल में भीड़ होने से संक्रमण फैलने का खतरा बन रहा था। डॉक्टर सहित स्टाफ के कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। बीमारी की स्थिति में मरीज फ्लू कॉर्नर में पर्चा बनवाकर संबंधित डॉक्टर को दिखा सकेंगे। अस्पताल में वेंटिलेटर एवं ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। - डॉ आरसी अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
मोहम्मदी सीएचसी में भी ओपीडी बंद, भटकते रहे मरीज
मोहम्मदी। कोरोना के बढ़ते कहर को देखते हुए प्रशासन ने सीएचसी में ओपीडी बंद करवा दी है। शनिवार सुबह जब सीएचसी में रोज की तरह मरीज दवा लेने के लिए आए तो अस्पताल को बंद देखकर इधर-उधर भटकते रहे।
मरीजों ने बताया कि पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि कोरोना की वजह से सरकार ने ओपीडी बंद करा दी है। एमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सीएमओ के आदेश के बाद शनिवार सुबह से ओपीडी बंद की गई हैं। जब तक जिला मुख्यालय से कोई आदेश नहीं आएगा तब तक ओपीडी बंद रहेगी और इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। संवाद