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डीटीआर में छोटे बिलाव के संरक्षण की कवायद
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दुधवा में स्माल कैट संरक्षण के लिए मंथन करते विशेषज्ञ।
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दुधवा में देश भर के विशेषज्ञों ने बैठक कर संरक्षण के उपायों पर किया मंथन
स्माल कैट संरक्षण के लिए चुने तीन टाइगर रिजर्व में पहला प्रयोग डीटीआर में
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में स्माल कैट (छोटे बिलाव) प्रजाति के जीवों के संरक्षण की कवायद की जा रही है। इसके लिए देश भर के विशेषज्ञ तीन दिन पहले दुधवा टाइगर रिजर्व में जुटे और मिल बैठकर गहन मंथन किया।
विशेषज्ञों ने पाया कि डीटीआर देश भर के अन्य टाइगर रिजर्व से काफी अलग और खास है। यहां वन्यजीवों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो दुनिया में दूसरी किसी जगह नहीं पाई जातीं। जैसे ट्री फ्राग, लाल कोरल, कुकरी सांप, हिस्पिड हेयर। इसके अलावा बंगाल फ्लोरिकन भी तेजी से यहां बढ़ रहे हैं। डीटीआर में साल के वन यहां की अनूठी जैव विविधता, जलीय क्षेत्र और घास के मैदान का बेजोड़ सम्मिश्रण है। लगातार किए गए संरक्षण के प्रयासों के परिणाम स्वरूप यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, बारासिंगा पाढ़ा आदि विभिन्न प्रजातियों का कुनबा फल-फूल रहा है।
राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन, मगरमच्छ और कछुओं की कई प्रजातियां भी यहां मिलती हैं। पक्षियों की 400 प्रजातियां केवल दुधवा में ही मिलती हैं। वर्ष 2020 में यहां ग्राउंड आर्किड नामक अनोखी प्रजाति की वनस्पति खोजी गई है। यूलोफिया आब्ट्यूजा नामक ऑर्किड की यह प्रजाति 118 साल बाद देखी गई है। खास बात यह है कि इसके फूलों के साथ-साथ बीज की तस्वीर पूरी दुनिया में पहली बार दुधवा टाइगर रिजर्व में ली गई है।
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कार्यशाला में मौजूद रहे यह अधिकारी और विशेषज्ञ
छोटे बिलाव संरक्षण के लिए आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) केपी दुबे, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) सुनील चौधरी, ग्लोबल टाइगर फोरम महासचिव डॉ. राजेश गोपाल, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी के अलावा अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला की मेजवानी दुधवा टाइगर रिजर्व ने की।
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स्माल कैट संरक्षण के लिए चुने तीन टाइगर रिजर्व में पहला प्रयोग डीटीआर में
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में स्माल कैट (छोटे बिलाव) प्रजाति के जीवों के संरक्षण की कवायद की जा रही है। इसके लिए देश भर के विशेषज्ञ तीन दिन पहले दुधवा टाइगर रिजर्व में जुटे और मिल बैठकर गहन मंथन किया।
विशेषज्ञों ने पाया कि डीटीआर देश भर के अन्य टाइगर रिजर्व से काफी अलग और खास है। यहां वन्यजीवों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो दुनिया में दूसरी किसी जगह नहीं पाई जातीं। जैसे ट्री फ्राग, लाल कोरल, कुकरी सांप, हिस्पिड हेयर। इसके अलावा बंगाल फ्लोरिकन भी तेजी से यहां बढ़ रहे हैं। डीटीआर में साल के वन यहां की अनूठी जैव विविधता, जलीय क्षेत्र और घास के मैदान का बेजोड़ सम्मिश्रण है। लगातार किए गए संरक्षण के प्रयासों के परिणाम स्वरूप यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, बारासिंगा पाढ़ा आदि विभिन्न प्रजातियों का कुनबा फल-फूल रहा है।
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राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन, मगरमच्छ और कछुओं की कई प्रजातियां भी यहां मिलती हैं। पक्षियों की 400 प्रजातियां केवल दुधवा में ही मिलती हैं। वर्ष 2020 में यहां ग्राउंड आर्किड नामक अनोखी प्रजाति की वनस्पति खोजी गई है। यूलोफिया आब्ट्यूजा नामक ऑर्किड की यह प्रजाति 118 साल बाद देखी गई है। खास बात यह है कि इसके फूलों के साथ-साथ बीज की तस्वीर पूरी दुनिया में पहली बार दुधवा टाइगर रिजर्व में ली गई है।
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कार्यशाला में मौजूद रहे यह अधिकारी और विशेषज्ञ
छोटे बिलाव संरक्षण के लिए आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव मनोज सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) केपी दुबे, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ( प्रोजेक्ट टाइगर) सुनील चौधरी, ग्लोबल टाइगर फोरम महासचिव डॉ. राजेश गोपाल, दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी के अलावा अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला की मेजवानी दुधवा टाइगर रिजर्व ने की।