{"_id":"d31fd4ad3dbcd002a5c9282cfa0b8f3b","slug":"compensation-to-farmers-will-not-get-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तो किसानों को नहीं मिल सकेगा मुआवजा!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तो किसानों को नहीं मिल सकेगा मुआवजा!
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 11 Mar 2015 07:00 PM IST
विज्ञापन
तेज हवा के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के एवज में मुख्यमंत्री ने मुआवजा देने का ऐलान किया था, जिस पर तहसीलों से आई रिपोर्ट ने पानी फेर दिया है। किसानों को राहत मिलने की उम्मीदें परवान चढ़ने से पहले ही टूटती नजर आ रहीं है। ज्यादातर तहसीलों ने अपने-अपने क्षेत्र के औसत नुकसान का आंकलन करते हुए रिपोर्ट जनपद मुख्यालय भेज दी है, जिसमें 15 से 40 फीसदी तक नुकसान दर्शाया गया है। जबकि मितौली तहसील ने तो जीरो फीसदी नुकसान की रिपोर्ट भेजकर इतिश्री कर ली है।
होली से ठीक एक सप्ताह पहले तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। इसको संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राहत आयुक्त को आदेश देते हुए पीड़ित किसानों के लिए मुआवजे का ऐलान किया था। इसके बाद तहसीलों से राजस्व ग्रामवार फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई थी। गरीब किसानों से जुड़े अहम मामले में तहसीलों ने अनुमानित आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट भेजकर खानापूर्ति कर डाली है, क्योंकि रिपोर्ट में पूरे क्षेत्र में औसत नुकसान की रिपोर्ट दी गई है। लिहाजा जिन किसानों को 50 फीसदी या इससे अधिक नुकसान हुआ भी है, तो उन्हें भी मुआवजा मिलने की उम्मीदें क्षीण हो गई हैं। खास बात यह है कि तहसीलों से भेजी गई रिपोर्ट में फसलों को क्षति का 15 से 40 फीसदी तक आंकलन किया गया है, साथ ही 50 फीसदी से कम नुकसान होने की बात भी कही गई है। जो इन रिपोर्ट की मंशा पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
तहसीलों से आई रिपोर्ट
सदर तहसीलदार ने लाही और मसूर की फसलों में 25 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट दी है। मोहम्मदी तहसीलदार ने क्षेत्र में ओलावृष्टि से इंकार किया है और गेहूं और लाही की फसलों को 30 से 40 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट दी है। धौरहरा तहसीलदार ने गेहूं, मटर, मसूर, लाही, आलू, चना और जौ की फसलों को मात्र 15 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट भेजी है, साथ ही किसी भी राजस्व ग्राम में 50 फीसदी से अधिक नुकसान को खारिज किया है। गोला तहसीलदार ने सभी फसलों को 20 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट दी है। पलिया के एसडीएम ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसके मुताबिक उनके क्षेत्र में फसलों को 50 फीसदी से अधिक नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह मितौली तहसील के एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में फसलों को क्षति शून्य दर्र्शाई है। जबकि निघासन तहसील से रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।
विज्ञापन
50 फीसदी से अधिक नुकसान पर मुआवजा
राजस्व विभाग के सूत्र बताते हैैं कि मुआवजा पाने के लिए कम से कम 50 फीसदी या इससे अधिक नुकसान होना जरूरी है। लिहाजा 50 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट होने पर किसानों को मुआवजा मिलना मुश्किल है।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि कुछ तहसीलों ने रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कुछ त्रुटियां रह गई हैं। अब नए फार्मेट पर रिपोर्ट मांगी जा रही है, जिसके बाद फसलों के नुकसान का आंकलन किया जाएगा।
विज्ञापन
होली से ठीक एक सप्ताह पहले तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। इसको संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राहत आयुक्त को आदेश देते हुए पीड़ित किसानों के लिए मुआवजे का ऐलान किया था। इसके बाद तहसीलों से राजस्व ग्रामवार फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई थी। गरीब किसानों से जुड़े अहम मामले में तहसीलों ने अनुमानित आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट भेजकर खानापूर्ति कर डाली है, क्योंकि रिपोर्ट में पूरे क्षेत्र में औसत नुकसान की रिपोर्ट दी गई है। लिहाजा जिन किसानों को 50 फीसदी या इससे अधिक नुकसान हुआ भी है, तो उन्हें भी मुआवजा मिलने की उम्मीदें क्षीण हो गई हैं। खास बात यह है कि तहसीलों से भेजी गई रिपोर्ट में फसलों को क्षति का 15 से 40 फीसदी तक आंकलन किया गया है, साथ ही 50 फीसदी से कम नुकसान होने की बात भी कही गई है। जो इन रिपोर्ट की मंशा पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
विज्ञापन
तहसीलों से आई रिपोर्ट
सदर तहसीलदार ने लाही और मसूर की फसलों में 25 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट दी है। मोहम्मदी तहसीलदार ने क्षेत्र में ओलावृष्टि से इंकार किया है और गेहूं और लाही की फसलों को 30 से 40 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट दी है। धौरहरा तहसीलदार ने गेहूं, मटर, मसूर, लाही, आलू, चना और जौ की फसलों को मात्र 15 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट भेजी है, साथ ही किसी भी राजस्व ग्राम में 50 फीसदी से अधिक नुकसान को खारिज किया है। गोला तहसीलदार ने सभी फसलों को 20 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट दी है। पलिया के एसडीएम ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसके मुताबिक उनके क्षेत्र में फसलों को 50 फीसदी से अधिक नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह मितौली तहसील के एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में फसलों को क्षति शून्य दर्र्शाई है। जबकि निघासन तहसील से रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।
विज्ञापन
50 फीसदी से अधिक नुकसान पर मुआवजा
राजस्व विभाग के सूत्र बताते हैैं कि मुआवजा पाने के लिए कम से कम 50 फीसदी या इससे अधिक नुकसान होना जरूरी है। लिहाजा 50 फीसदी से कम नुकसान की रिपोर्ट होने पर किसानों को मुआवजा मिलना मुश्किल है।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि कुछ तहसीलों ने रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कुछ त्रुटियां रह गई हैं। अब नए फार्मेट पर रिपोर्ट मांगी जा रही है, जिसके बाद फसलों के नुकसान का आंकलन किया जाएगा।