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स्वच्छता सर्वेक्षण: सरकार ने दिखाया आइना, कहा-धरातल पर करो काम
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सौजन्या चौराहे के डलावघर में पड़ा कूड़ा। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। शहरों को साफ सुथरा रखने के लिए शुरू हुए स्वच्छ सर्वेक्षण का रिजल्ट गुरुवार को घोषित हुआ। इसमें लखीमपुर नगर पालिका को 167वीं रैंक मिली है। जबकि 2019 में 320 थी। नाले नालियां चोक, डलावघर से दोपहर में कूड़ा उठने के बावजूद नगर पालिका ने 153 पायदान की लंबी छलांग लगाकर 167 रैंक हासिल की है। वहीं एक से डेढ़ लाख की आबादी वाले शहरों में लखीमपुर को सूबे में 23वीं रैंक मिली है। जबकि पिछले साल 41वीं थी।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। सर्वेक्षण कुल चार बिंदुओं पर हुआ था। इस बार मिली रैंक को लेकर पालिका प्रशासन फूला नहीं समा रहा है। जबकि नगरवासियों से लेकर सभासद शहर की सफाई व्यवस्था के हालत बयां कर पिछले साल नगर पालिका की रैंक 320 थी, लेकिन इस बार 176 है, लेकिन जैसे हालात तब थे वैसे ही आज भी हैं। नालियों से लेकर नाले-नालियां तक चोक हैं। दोपहर तक डलावघरों से कूड़ा नहीं उठता। जरा सी बारिश में ही शहर की गलियों से लेकर प्रमुख सड़कें तालाब बन जाती हैं।
नगरवासी बोले-कूड़े और जलभराव से मिलेगी निजात, तभी शहर होगा स्मार्ट
लखीमपुर खीरी। स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की स्थिति भले की सुधरी हो, लेकिन गंदगी और जलभराव में सुधारा होना अभी बाकी है। सर्वेक्षण होने से पहले शहर की सफाई व्यवस्था के लिए लगाई गई सफाई कर्मियों की फौज और सिटीजन फीडबैक में पालिका एवं सफाई कर्मियों की सकारात्मक कराई गई फीडिंग से शहर की रैकिंग जरूर सुधरी। मगर, सफाई के मामले में अब भी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। गंदगी और जलभराव से नगरवासियों का बुरा हाल है। दोपहर तक शहर की प्रमुख सड़कों पर कूड़ा पड़ा रहता है। वहीं हल्की सी बारिश में गलियों से लेकर सड़कों पर पानी भर जाता है। शहरवासियों और सभासदों का कहना है कि शहर के लिए नाले, नालियों की सफाई, जलभराव बड़ी समस्या है। इन पर काम होने से ही शहर स्मार्ट होगा।
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पिछले सालों से सुधरी शहर की स्थिति
वर्ष रैंक निर्धारित अंक
2020 167 6000
2019 320 5000
2018 356 5000
2017 410 4000
सर्वेक्षण के बिंदु
सर्वेक्षण में सर्विस लेवल प्रोग्राम यानि नगर पालिका की ओर से दी जाने वाली सुविधा, शहर की स्वच्छता में सर्टिफिकेशन, स्वच्छता टीम ने शहर आकर गोपनीय जांच कर लोगों से सफाई व्यवस्था पर बात कर फीडबैक लिया, अप्रैल-2019 में सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें केंद्र सरकार की ओर से गठित स्वच्छता टीम निकायों से तय बिंदुओं पर डाटा और जानकारियां मांगती है। नगर पालिका की ओर से कराए गए कार्य, जनसुविधाओं के लिए किए जा रहे प्रयास की रिपोर्ट और फोटो मांगे जाते है। जनवरी माह में सर्वेक्षण टीम आकर जमीनी पड़ताल कर लोगों से बातचीत कर साफ सफाई की सच्चाई जानती है।
सर्वेक्षण=2020
नगर पालिका जोनल रैंक स्टेट रैंक मिले अंक
लखीमुपर 167 23 2725
गोला 14 11 2847
मोहम्मदी पांच चार 3087
पलिया 86 59 2286
----------
नगर पंचायत
खीरी 138 100 1877
ओयल 71 44 2633
धौरहरा 67 41 2645
सिंगाही 148 101 2436
बरवर 178 122 2366
मैलानी 313 213 2103
========
सर्वेक्षण-2019
पालिका और पंचायत, जोनल रैंक, स्टेट रैंक
मोहम्मदी- 2 1
गोला 607 367
लखीमपुर 320 41
पलिया 128 70
धौरहरा 130 72
ओयल 480 287
सिंगाही 312 181
बरवर 371 218
मैलानी 278 164
खीरी 499 300
......
शहरवासियों के लिए रोज मुसीबत बनता डलावघर में पड़ा कूड़ा
केंद्रीय शहरी एवं विकास मंत्रालय ने नगर पालिका को आइना दिखाया है कि कागजों पर करोड़ों रुपये फूंकने से शहर साफ सुथरा नहीं बनता और न ही सपने सच होते हैं। इसके लिए जरूरी है धरातल पर काम करने की। सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन ने पूरे साल भले ही करोड़ों रुपये फूंक दिए हों, लेकिन सफाई के मामले में शहर के हालात जस के तस हैं। आज भी डलावघर से कूड़ा दोपहर बाद ही उठता है। जरा सी बरसात से ही शहर की ऐसी कोई सड़क, गली एवं कॉलोनी नहीं बचती जिसमें पानी न भरता हो। सफाई को लेकर पालिका प्रशासन के दावों की पोल खोलती शहर की कुछ तस्वीरें।
पिछले साल से इस बार सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बहुत मेहनत की गई। इसी का परिणाम है कि 167 रैंक आई है। इसके लिए सफाई कर्मी बधाई के पात्र हैं। सफाई कर्मियों की मेहनत और नगरवासियों के सहयोग से अगली बार अपना शहर टॉप-50 में अवश्य शामिल होगा।
-आरआर अंबेष, अधिशाषी अधिकारी
पिछले साल की अपेक्षा इस बार रैंक काफी बेहतर रही है। यह सफाईकर्मियों की मेहनत और नगरवासियों के सहयोग से संभव हुआ। शहर के टॉप-100 में शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन कहीं न कहीं कुछ कम जरूर रह गई, जिससे मंशा पूरी नहीं हो सकी। लक्ष्य हांसिल करने में चूक कहां हुई। इसकी जानकारी उन्हें दूर किया जाएगा, जिससे 2021 में शहर टॉप-100 की वजह टॉप-50 में शामिल हो।
-निरूपमा बाजपेई, अध्यक्ष
शहर की सफाई व्यवस्था पर नगर पालिका ने सालभर करोड़ों रुपये खर्च किए। इसके बावजूद सफाईकर्मियों के पास संसाधन तक नहीं है। सफाई के नाम पर जिस तरह खजाना खर्च किया गया। उसके अनुसार रैंक नहीं मिली। सफाईकर्मियों को यदि पर्याप्त संसाधन मिले होते तो शहर टॉप-100 की सूची में होता।
-सुनील रावत सभासद, कपूरथला
शहर की सफाई व्यवस्था के हालत बहुत ही बदतर हैं। मोहल्ले में न तो समय से सफाई कर्मचारी आते हैं और न ही कूड़ा उठता है। नालियां साफ न होने की वजह से हल्की बरसात में शहर की सड़कों से लेकर मोहल्ले की गलियों में पानी भरने से निकलना मुश्किल होता है। सफाई के मामले में जमीनी हकीकत बहुत बदतर है।
-सुमन सिंह निवासी गोटैया बाग
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केंद्र सरकार ने गुरुवार को सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। सर्वेक्षण कुल चार बिंदुओं पर हुआ था। इस बार मिली रैंक को लेकर पालिका प्रशासन फूला नहीं समा रहा है। जबकि नगरवासियों से लेकर सभासद शहर की सफाई व्यवस्था के हालत बयां कर पिछले साल नगर पालिका की रैंक 320 थी, लेकिन इस बार 176 है, लेकिन जैसे हालात तब थे वैसे ही आज भी हैं। नालियों से लेकर नाले-नालियां तक चोक हैं। दोपहर तक डलावघरों से कूड़ा नहीं उठता। जरा सी बारिश में ही शहर की गलियों से लेकर प्रमुख सड़कें तालाब बन जाती हैं।
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नगरवासी बोले-कूड़े और जलभराव से मिलेगी निजात, तभी शहर होगा स्मार्ट
लखीमपुर खीरी। स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की स्थिति भले की सुधरी हो, लेकिन गंदगी और जलभराव में सुधारा होना अभी बाकी है। सर्वेक्षण होने से पहले शहर की सफाई व्यवस्था के लिए लगाई गई सफाई कर्मियों की फौज और सिटीजन फीडबैक में पालिका एवं सफाई कर्मियों की सकारात्मक कराई गई फीडिंग से शहर की रैकिंग जरूर सुधरी। मगर, सफाई के मामले में अब भी बहुत कुछ सुधार की जरूरत है। गंदगी और जलभराव से नगरवासियों का बुरा हाल है। दोपहर तक शहर की प्रमुख सड़कों पर कूड़ा पड़ा रहता है। वहीं हल्की सी बारिश में गलियों से लेकर सड़कों पर पानी भर जाता है। शहरवासियों और सभासदों का कहना है कि शहर के लिए नाले, नालियों की सफाई, जलभराव बड़ी समस्या है। इन पर काम होने से ही शहर स्मार्ट होगा।
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पिछले सालों से सुधरी शहर की स्थिति
वर्ष रैंक निर्धारित अंक
2020 167 6000
2019 320 5000
2018 356 5000
2017 410 4000
सर्वेक्षण के बिंदु
सर्वेक्षण में सर्विस लेवल प्रोग्राम यानि नगर पालिका की ओर से दी जाने वाली सुविधा, शहर की स्वच्छता में सर्टिफिकेशन, स्वच्छता टीम ने शहर आकर गोपनीय जांच कर लोगों से सफाई व्यवस्था पर बात कर फीडबैक लिया, अप्रैल-2019 में सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें केंद्र सरकार की ओर से गठित स्वच्छता टीम निकायों से तय बिंदुओं पर डाटा और जानकारियां मांगती है। नगर पालिका की ओर से कराए गए कार्य, जनसुविधाओं के लिए किए जा रहे प्रयास की रिपोर्ट और फोटो मांगे जाते है। जनवरी माह में सर्वेक्षण टीम आकर जमीनी पड़ताल कर लोगों से बातचीत कर साफ सफाई की सच्चाई जानती है।
सर्वेक्षण=2020
नगर पालिका जोनल रैंक स्टेट रैंक मिले अंक
लखीमुपर 167 23 2725
गोला 14 11 2847
मोहम्मदी पांच चार 3087
पलिया 86 59 2286
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नगर पंचायत
खीरी 138 100 1877
ओयल 71 44 2633
धौरहरा 67 41 2645
सिंगाही 148 101 2436
बरवर 178 122 2366
मैलानी 313 213 2103
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सर्वेक्षण-2019
पालिका और पंचायत, जोनल रैंक, स्टेट रैंक
मोहम्मदी- 2 1
गोला 607 367
लखीमपुर 320 41
पलिया 128 70
धौरहरा 130 72
ओयल 480 287
सिंगाही 312 181
बरवर 371 218
मैलानी 278 164
खीरी 499 300
......
शहरवासियों के लिए रोज मुसीबत बनता डलावघर में पड़ा कूड़ा
केंद्रीय शहरी एवं विकास मंत्रालय ने नगर पालिका को आइना दिखाया है कि कागजों पर करोड़ों रुपये फूंकने से शहर साफ सुथरा नहीं बनता और न ही सपने सच होते हैं। इसके लिए जरूरी है धरातल पर काम करने की। सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन ने पूरे साल भले ही करोड़ों रुपये फूंक दिए हों, लेकिन सफाई के मामले में शहर के हालात जस के तस हैं। आज भी डलावघर से कूड़ा दोपहर बाद ही उठता है। जरा सी बरसात से ही शहर की ऐसी कोई सड़क, गली एवं कॉलोनी नहीं बचती जिसमें पानी न भरता हो। सफाई को लेकर पालिका प्रशासन के दावों की पोल खोलती शहर की कुछ तस्वीरें।
पिछले साल से इस बार सफाई व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बहुत मेहनत की गई। इसी का परिणाम है कि 167 रैंक आई है। इसके लिए सफाई कर्मी बधाई के पात्र हैं। सफाई कर्मियों की मेहनत और नगरवासियों के सहयोग से अगली बार अपना शहर टॉप-50 में अवश्य शामिल होगा।
-आरआर अंबेष, अधिशाषी अधिकारी
पिछले साल की अपेक्षा इस बार रैंक काफी बेहतर रही है। यह सफाईकर्मियों की मेहनत और नगरवासियों के सहयोग से संभव हुआ। शहर के टॉप-100 में शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन कहीं न कहीं कुछ कम जरूर रह गई, जिससे मंशा पूरी नहीं हो सकी। लक्ष्य हांसिल करने में चूक कहां हुई। इसकी जानकारी उन्हें दूर किया जाएगा, जिससे 2021 में शहर टॉप-100 की वजह टॉप-50 में शामिल हो।
-निरूपमा बाजपेई, अध्यक्ष
शहर की सफाई व्यवस्था पर नगर पालिका ने सालभर करोड़ों रुपये खर्च किए। इसके बावजूद सफाईकर्मियों के पास संसाधन तक नहीं है। सफाई के नाम पर जिस तरह खजाना खर्च किया गया। उसके अनुसार रैंक नहीं मिली। सफाईकर्मियों को यदि पर्याप्त संसाधन मिले होते तो शहर टॉप-100 की सूची में होता।
-सुनील रावत सभासद, कपूरथला
शहर की सफाई व्यवस्था के हालत बहुत ही बदतर हैं। मोहल्ले में न तो समय से सफाई कर्मचारी आते हैं और न ही कूड़ा उठता है। नालियां साफ न होने की वजह से हल्की बरसात में शहर की सड़कों से लेकर मोहल्ले की गलियों में पानी भरने से निकलना मुश्किल होता है। सफाई के मामले में जमीनी हकीकत बहुत बदतर है।
-सुमन सिंह निवासी गोटैया बाग