{"_id":"5f9c60038ebc3e9b9d118793","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly425257053","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्थायी पटाखा लाइसेंस जारी करने को प्रशासन के तेवर सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्थायी पटाखा लाइसेंस जारी करने को प्रशासन के तेवर सख्त
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लखीमपुर खीरी। दिवाली और आतिशबाजी का आपस में गहरा रिश्ता है। आज यह रिश्ता आबोहवा के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। कोरोना काल के कारण पटाखों के दाम इस बार काफी अधिक होने की संभावना है। वजह है कि कोरोना के कारण बाहर से पटाखों की खेप मांग के अनुरूप नहीं मिलने की उम्मीद है। अस्थायी लाइसेंस जारी करने को लेकर इस बार प्रशासन के तेवर काफी सख्त हैं।
दिवाली के महीने भर पहले ही बाजारों में पटाखों की दुकानें सजने लग जाती हैं। प्रतिवर्ष दीपावली पर करोड़ों रुपयों के पटाखों का व्यापार होता है। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है। पटाखा कारोबारी बताते हैं कि कोरोना काल के कारण मजदूरों के चले आने से ब्रांडेड कंपनियों के पटाखों की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई स्थायी लाइसेंसधारियों ने पटाखों का निर्माण तेजी से शुरू कर दिया है। इसमें तेज ध्वनि वाले पटाखे भी शामिल हैं। जिले में 225 स्थायी लाइसेंस धारक हैं। इनमें कई तो स्वत: ही पटाखों को बनाकर बेचते हैं। बाहर से ब्रांडेड पटाखों के न पहुंचने से इस बार पटाखा बाजार काफी महंगा होने का अनुमान है।
35 डेसिबल से अधिक ध्वनि पीड़ा दायक
जानकार बताते हैं कि पटाखे अथवा किसी अन्य चीज से निकलने वाली 35 डेसिबल से अधिक ध्वनि कानों के लिए पीड़ादायक होती है। 70 डेसिबल तक की ध्वनि कान के परदे को फाड़ सकती है।
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तीन दिन पहले जारी होंगे अस्थायी लाइसेंस
पटाखा बेचने के लिए प्रशासन लाइसेंस जारी करता है। पिछले वर्ष प्रशासन ने इस शर्त के साथ अस्थायी लाइसेंस दिए थे कि लाइसेंस धारक सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बेचेंगे। इस बार प्रशासन लाइसेंस जारी करने को लेकर और सख्त है। अस्थायी लाइसेंस दीपावली से तीन दिन पहले जारी होंगे।
पटाखे दगने से नुकसान
सांस रोगियों को अधिक दिक्कत होती है, आंखों को नुकसान पहुंचाता है प्रदूषित धुआं, वातावरण में प्रदूषण की मात्रा में बढ़ोतरी, जहरीली गैस होने से श्वांस रोगियों के लिए बढ़ता है खतरा, कानों पर पड़ता है प्रभाव
जिले में 225 स्थायी लाइसेंस हैं। अभी पटाखा बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन आने शुरू नहीं हुए हैं। यह लाइसेंस दीपावली से तीन दिन पूर्व जारी किए जाते हैं। स्थायी पटाखे की दुकानों पर विभाग कड़ी नजर रखे हुए है।
-मुकीमुलहक, सीएफओ लखीमपुर खीरी
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दिवाली के महीने भर पहले ही बाजारों में पटाखों की दुकानें सजने लग जाती हैं। प्रतिवर्ष दीपावली पर करोड़ों रुपयों के पटाखों का व्यापार होता है। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता है। पटाखा कारोबारी बताते हैं कि कोरोना काल के कारण मजदूरों के चले आने से ब्रांडेड कंपनियों के पटाखों की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई स्थायी लाइसेंसधारियों ने पटाखों का निर्माण तेजी से शुरू कर दिया है। इसमें तेज ध्वनि वाले पटाखे भी शामिल हैं। जिले में 225 स्थायी लाइसेंस धारक हैं। इनमें कई तो स्वत: ही पटाखों को बनाकर बेचते हैं। बाहर से ब्रांडेड पटाखों के न पहुंचने से इस बार पटाखा बाजार काफी महंगा होने का अनुमान है।
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35 डेसिबल से अधिक ध्वनि पीड़ा दायक
जानकार बताते हैं कि पटाखे अथवा किसी अन्य चीज से निकलने वाली 35 डेसिबल से अधिक ध्वनि कानों के लिए पीड़ादायक होती है। 70 डेसिबल तक की ध्वनि कान के परदे को फाड़ सकती है।
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तीन दिन पहले जारी होंगे अस्थायी लाइसेंस
पटाखा बेचने के लिए प्रशासन लाइसेंस जारी करता है। पिछले वर्ष प्रशासन ने इस शर्त के साथ अस्थायी लाइसेंस दिए थे कि लाइसेंस धारक सिर्फ ग्रीन पटाखे ही बेचेंगे। इस बार प्रशासन लाइसेंस जारी करने को लेकर और सख्त है। अस्थायी लाइसेंस दीपावली से तीन दिन पहले जारी होंगे।
पटाखे दगने से नुकसान
सांस रोगियों को अधिक दिक्कत होती है, आंखों को नुकसान पहुंचाता है प्रदूषित धुआं, वातावरण में प्रदूषण की मात्रा में बढ़ोतरी, जहरीली गैस होने से श्वांस रोगियों के लिए बढ़ता है खतरा, कानों पर पड़ता है प्रभाव
जिले में 225 स्थायी लाइसेंस हैं। अभी पटाखा बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन आने शुरू नहीं हुए हैं। यह लाइसेंस दीपावली से तीन दिन पूर्व जारी किए जाते हैं। स्थायी पटाखे की दुकानों पर विभाग कड़ी नजर रखे हुए है।
-मुकीमुलहक, सीएफओ लखीमपुर खीरी