{"_id":"5de401da8ebc3e54d4470376","slug":"civic-amenities-lakhimpur-news-bly386322183","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएमआर चावल की धीमी डिलीवरी पर डीएम सख्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएमआर चावल की धीमी डिलीवरी पर डीएम सख्त
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद में सीएमआर चावल की डिलीवरी धीमी होने पर डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी सख्त रुख अपनाया है। सभी एजेंसियों के प्रबंधकों को चेतावनी देकर जल्द से जल्द सीएमआर की डिलीवरी एफसीआई में कराने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले डीएम ने छह एजेंसियों के 102 क्रय केंद्र बंद करा दिए थे, जिससे सीएमआर की डिलीवरी पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
सभी आठ एजेंसियों को एक लाख 378 मीट्रिक टन सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई को देनी थी, अब तक 23, 408 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी की गई है। जबकि 76, 970 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी करना शेष है। एक चौथाई से भी कम डिलीवरी होने से अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि अब गेंद राइस मिलर्स के पाले में पहुंच चुकी है। करीब पांच दिन पहले जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने एजेंसी प्रबंधकों को नोटिस जारी कर सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई में कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। पिछले सालों में सीएमआर घोटाले के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई राइस मिलें सीएमआर चावल को बाजार में बेचकर अफसरों को छका चुकी हैं। इसलिए सीएमआर चावल की कम डिलीवरी होने से चौकन्ने हुए अधिकारी रिस्क लेना नहीं चाहते हैं।
सीएमआर चावल की डिलीवरी की धीमी गति होने के कारण पहले भी नोटिस दी गई थीं। छह एजेंसियों की खरीद पर इसलिए रोक लगाई गई है कि सीएमआर चावल के उतार में तेजी आ सके। वहीं किसानों के पास धान नहीं बचा है, जिससे आवक कम हो गई है।
विज्ञापन
-लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
विज्ञापन
सभी आठ एजेंसियों को एक लाख 378 मीट्रिक टन सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई को देनी थी, अब तक 23, 408 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी की गई है। जबकि 76, 970 मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी करना शेष है। एक चौथाई से भी कम डिलीवरी होने से अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि अब गेंद राइस मिलर्स के पाले में पहुंच चुकी है। करीब पांच दिन पहले जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने एजेंसी प्रबंधकों को नोटिस जारी कर सीएमआर चावल की डिलीवरी एफसीआई में कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। पिछले सालों में सीएमआर घोटाले के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई राइस मिलें सीएमआर चावल को बाजार में बेचकर अफसरों को छका चुकी हैं। इसलिए सीएमआर चावल की कम डिलीवरी होने से चौकन्ने हुए अधिकारी रिस्क लेना नहीं चाहते हैं।
विज्ञापन
सीएमआर चावल की डिलीवरी की धीमी गति होने के कारण पहले भी नोटिस दी गई थीं। छह एजेंसियों की खरीद पर इसलिए रोक लगाई गई है कि सीएमआर चावल के उतार में तेजी आ सके। वहीं किसानों के पास धान नहीं बचा है, जिससे आवक कम हो गई है।
विज्ञापन
-लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी