{"_id":"5d8122b78ebc3e93a3342e46","slug":"cirame-gola-news-bly376598936","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोला में फिर उड़ने लगा चिप्पड़ का धुआं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोला में फिर उड़ने लगा चिप्पड़ का धुआं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोला गोकर्णनाथ। गोला में पुलिस की लापरवाही से चिप्पड़ का नशा फिर उड़ने लगा है। किशोर अवस्था के लोग नशे के आदी बन रहे हैं, लेकिन पुलिस राजनीति संरक्षण प्राप्त होने के कारण चिप्पड़ कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। न ही उस दुकान को सील किया, जहां चिप्पड़ बेचा जाता है।
17 अगस्त को राज्य बाल अधिकार आयोग की सदस्य डॉ. प्रीति वर्मा ने 16 वर्षीय किशोर के पिता की शिकायत पर कई जगहों पर छापे मारे थे। इस दौरान उन्होंने चिप्पड़ का नशा ले रहे किशोरों को पकड़ा था। एक धंधेबाज को चिप्पड़ बेचते हुए पकड़ कर पुलिस को सौंपा था। पुलिस ने उसका चालान कर जेल भेज दिया था। उसके बाद से राजनीतिक संरक्षण होने के कारण पुलिस चिप्पड़ के किसी दूसरे धंधेबाज को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यही वजह है कि गोला में चिप्पड़ का नशीला धुआं फिर उड़ने लगा है। एसपी ने चिप्पड़ कारोबार में संलिप्तता मिलने पर नानक चौकी इंचार्ज करुणेश चंद्र शुक्ला और नानक पुलिस चौकी के सिपाहियों को हटा भी दिया था। डॉ. प्रीति वर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने राकेश कनौजिया को पकड़कर पुलिस को दिया था, जिसे पुलिस ने भगा दिया। चिप्पड़ के मुख्य कारोबारी अखिलेश जायसवाल की दुकान भी पुलिस ने सील नहीं की। पुलिस अब तक इस मामले में लिप्त किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही है।
नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम से आता है चिप्पड़
चिप्पड़, गांजे की एक विशेष किस्म होती है, जो नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम में पाई जाती है। गांजे की इस विशेष किस्म की कलियों को तोड़कर दबाकर छांव में सुखाया जाता है जिससे वह परतदार होकर कड़ी हो जाती है। इस कड़ेपन के कारण ही लोग चिप्पड़ के नाम से पुकारते हैं। चिप्पड़ को सिगरेट, चिलम और हुक्के में रखकर पिया जाता है। इसका नशा काफी तेज होता है। इसके पीने वालों को आदत बन जाती है जिसे छुड़ाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
17 अगस्त को राज्य बाल अधिकार आयोग की सदस्य डॉ. प्रीति वर्मा ने 16 वर्षीय किशोर के पिता की शिकायत पर कई जगहों पर छापे मारे थे। इस दौरान उन्होंने चिप्पड़ का नशा ले रहे किशोरों को पकड़ा था। एक धंधेबाज को चिप्पड़ बेचते हुए पकड़ कर पुलिस को सौंपा था। पुलिस ने उसका चालान कर जेल भेज दिया था। उसके बाद से राजनीतिक संरक्षण होने के कारण पुलिस चिप्पड़ के किसी दूसरे धंधेबाज को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। यही वजह है कि गोला में चिप्पड़ का नशीला धुआं फिर उड़ने लगा है। एसपी ने चिप्पड़ कारोबार में संलिप्तता मिलने पर नानक चौकी इंचार्ज करुणेश चंद्र शुक्ला और नानक पुलिस चौकी के सिपाहियों को हटा भी दिया था। डॉ. प्रीति वर्मा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने राकेश कनौजिया को पकड़कर पुलिस को दिया था, जिसे पुलिस ने भगा दिया। चिप्पड़ के मुख्य कारोबारी अखिलेश जायसवाल की दुकान भी पुलिस ने सील नहीं की। पुलिस अब तक इस मामले में लिप्त किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही है।
विज्ञापन
नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम से आता है चिप्पड़
चिप्पड़, गांजे की एक विशेष किस्म होती है, जो नेपाल, मणिपुर, नागालैंड और आसाम में पाई जाती है। गांजे की इस विशेष किस्म की कलियों को तोड़कर दबाकर छांव में सुखाया जाता है जिससे वह परतदार होकर कड़ी हो जाती है। इस कड़ेपन के कारण ही लोग चिप्पड़ के नाम से पुकारते हैं। चिप्पड़ को सिगरेट, चिलम और हुक्के में रखकर पिया जाता है। इसका नशा काफी तेज होता है। इसके पीने वालों को आदत बन जाती है जिसे छुड़ाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन