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मिलों की चीनी कस्टडी में फिर भी भुगतान में मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 11 Dec 2016 10:48 PM IST
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चीनी मिल
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बजाज की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा का मामला
किसानों के शोषण- उत्पीड़न पर प्रशासन हुआ लाचार
पलिया ने फिर बढ़ाई डिफर भुगतान की समय सीमा
इंडेंट करेंगे जारी ताकि किसानों का न हो नुकसान
जिला प्रशासन ने बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पर गन्ना मूल्य बकाया अधिक होने से नवंबर में ही चीनी स्टॉक को एसडीएम, सचिव और अध्यासी की संयुक्त कस्टडी में ले लिया था। इसके बावजूद किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति नाको चने चबाने जैसी बनी हुई है। चीनी मिलों के मालिकान गन्ना मूल्य भुगतान में मनमानी कर रहे हैं, तो अफसर भी खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि पलिया मिल ने पिछले वर्ष का बकाया डिफर मूल्य 30 नवंबर तक भुगतान करने की हामी भरने के बाद फिर से समय सीमा 25 दिसंबर तक बढ़ा दी है।
बता दें कि बजाज ग्रुप की पलिया मिल द्वारा पिछले साल का बकाया 26 करोड़ गन्ना मूल्य भुगतान (डिफर) नहीं किए जाने से किसान नेता और केन सोसायटी आंदोलित है। सोसायटी ने डिफर मूल्य भुगतान न होने तक इंडेंट जारी न होने देने का ऐलान किया है, जिससे नोकेन की स्थिति में मिल बंद हो सकती है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने इंडेंट जारी कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन भुगतान के मामले में उनके पास कोई ठोस जवाब या रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा है कि मिल की चीनी बिक्री न होने से भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। मिल प्रबंधन ने 25 दिसंबर तक भुगतान का आश्वासन दिया है। इंडेंट जारी कराया जा रहा है, ताकि किसानों का नुकसान न होने पाए। अब किसानों तक तोल के लिए पर्ची पहुंचाने पर गाड़ी अटक गई है, क्योंकि केन सोसायटी ने इंडेंट बंद रखने का निर्णय लेते हुए पर्चियां बांटने से इंकार कर दिया है। साथ ही प्रशासन और मिल प्रबंधन को सीधे किसानों को पर्ची पहुंचाने पर गंभीर परिणाम की चेतावनी दी है।
बजाज ग्रुप पर 140 करोड़ भुगतान ड्यू
गन्ना एक्ट के मुताबिक भुगतान के मामले में बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलें फिसड्डी हैं। गन्ने की खरीद से 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, जिसके बाद मिलों को ब्याज देना होगा। इसके बावजूद बजाज ग्रुप की तीनों मिलें भुगतान में मनमानी कर रही हैं। तीनों मिलों पर गन्ने की खरीद से 14 दिनों तक का करीब एक अरब 40 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसमें पलिया मिल ने चालू पेराई सत्र में एक पैसे का भुगतान नहीं किया है, तो पिछले वर्ष के बकाया भुगतान के लिए रार छिड़ी है।
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एसएमएस के जरिए किसानों को भेजेंगे पर्ची
गन्ने की तोल बंद होने से किसानों को दोहरा नुकसान होगा, क्योंकि पेड़ी का खेत खाली कर गेहूूं की बुआई की जानी है। किसानों में भी इस बात को लेकर राय अलग-अलग है। फिलहाल इंडेंट जारी करने पर विचार हुआ है, जिसमें किसानों को एसएमएस से पर्ची नंबर भेजा जाएगा। इस मैसेज की मदद से किसान गन्ने की तोल करा सकेंगे।
जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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किसानों के शोषण- उत्पीड़न पर प्रशासन हुआ लाचार
पलिया ने फिर बढ़ाई डिफर भुगतान की समय सीमा
इंडेंट करेंगे जारी ताकि किसानों का न हो नुकसान
जिला प्रशासन ने बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पर गन्ना मूल्य बकाया अधिक होने से नवंबर में ही चीनी स्टॉक को एसडीएम, सचिव और अध्यासी की संयुक्त कस्टडी में ले लिया था। इसके बावजूद किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान की स्थिति नाको चने चबाने जैसी बनी हुई है। चीनी मिलों के मालिकान गन्ना मूल्य भुगतान में मनमानी कर रहे हैं, तो अफसर भी खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि पलिया मिल ने पिछले वर्ष का बकाया डिफर मूल्य 30 नवंबर तक भुगतान करने की हामी भरने के बाद फिर से समय सीमा 25 दिसंबर तक बढ़ा दी है।
बता दें कि बजाज ग्रुप की पलिया मिल द्वारा पिछले साल का बकाया 26 करोड़ गन्ना मूल्य भुगतान (डिफर) नहीं किए जाने से किसान नेता और केन सोसायटी आंदोलित है। सोसायटी ने डिफर मूल्य भुगतान न होने तक इंडेंट जारी न होने देने का ऐलान किया है, जिससे नोकेन की स्थिति में मिल बंद हो सकती है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने इंडेंट जारी कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं, लेकिन भुगतान के मामले में उनके पास कोई ठोस जवाब या रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा है कि मिल की चीनी बिक्री न होने से भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। मिल प्रबंधन ने 25 दिसंबर तक भुगतान का आश्वासन दिया है। इंडेंट जारी कराया जा रहा है, ताकि किसानों का नुकसान न होने पाए। अब किसानों तक तोल के लिए पर्ची पहुंचाने पर गाड़ी अटक गई है, क्योंकि केन सोसायटी ने इंडेंट बंद रखने का निर्णय लेते हुए पर्चियां बांटने से इंकार कर दिया है। साथ ही प्रशासन और मिल प्रबंधन को सीधे किसानों को पर्ची पहुंचाने पर गंभीर परिणाम की चेतावनी दी है।
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बजाज ग्रुप पर 140 करोड़ भुगतान ड्यू
गन्ना एक्ट के मुताबिक भुगतान के मामले में बजाज ग्रुप की गोला, पलिया और खंभारखेड़ा मिलें फिसड्डी हैं। गन्ने की खरीद से 14 दिन के अंदर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य है, जिसके बाद मिलों को ब्याज देना होगा। इसके बावजूद बजाज ग्रुप की तीनों मिलें भुगतान में मनमानी कर रही हैं। तीनों मिलों पर गन्ने की खरीद से 14 दिनों तक का करीब एक अरब 40 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसमें पलिया मिल ने चालू पेराई सत्र में एक पैसे का भुगतान नहीं किया है, तो पिछले वर्ष के बकाया भुगतान के लिए रार छिड़ी है।
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एसएमएस के जरिए किसानों को भेजेंगे पर्ची
गन्ने की तोल बंद होने से किसानों को दोहरा नुकसान होगा, क्योंकि पेड़ी का खेत खाली कर गेहूूं की बुआई की जानी है। किसानों में भी इस बात को लेकर राय अलग-अलग है। फिलहाल इंडेंट जारी करने पर विचार हुआ है, जिसमें किसानों को एसएमएस से पर्ची नंबर भेजा जाएगा। इस मैसेज की मदद से किसान गन्ने की तोल करा सकेंगे।
जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी