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बच्चों का सुरक्षा चक्र टूटा, छह माह में सिर्फ 33 फीसदी बच्चे हुए प्रतिरक्षित

Mon, 25 Oct 2021 12:02 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 12:02 AM IST
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Children's safety cycle broken, only 33% children were immunized in six months
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
कोरोना के कारण इस साल भी बेपटरी रहा दो बूंद जिंदगी का अभियान
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लखीमपुर खीरी। कोरोना के कारण बच्चों का रूटीन टीकाकरण प्रभावित हुआ है। इसे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या फिर कोरोना का असर कि अब तक मात्र 33 फीसदी बच्चे ही प्रतिरक्षित हुए हैं। वैक्सीनेशन के अभाव में हजारों नौनिहाल और किशोरों का सुरक्षा चक्र टूट गया है। इस कारण बच्चे टीबी, डायरिया, खसरा, हेपेटाइटिस सहित जापानी इंसेफलाइटिस जैसी कई जानलेवा बीमारियों के घेरे में हैं। हालांकि जिम्मेदारों का कहना है कि निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए टीकाकरण अभियान निरंतर जारी है।
बच्चों को जन्मजात सहित कई अन्य जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए मां को गर्भावस्था में और बच्चे के लेने के 24 घंटे के बाद से ही वैक्सीनेशन के साथ पोलियो ड्राप पिलाने की शुरूआत होती है। इसके बाद समय समय पर 16 साल तक टीकाकरण किया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए सुरक्षा कवच देना है। मगर, कोरोना के कारण पिछले साल से बेपटरी हुआ अभियान अब तक पटरी पर नहीं आ सका है। इसका उदाहरण स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट है, जिसके अनुसार पिछले छह माह में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 17 से 33 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण ही हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि बच्चों को सुरक्षा कवच देने के लिए महिला अस्पताल से रोजाना तो वहीं सीएचसी, सब सेंटर एवं नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर हर बुधवार और शनिवार को वैक्सीनेशन होता है।
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टीकाकरण से विकसित होती है बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रामविलास रावत का कहना है बच्चों का टीकाकरण होना बेहद जरूरी है। घरवाले भी जागरूक रहकर बच्चों का वैक्सीनेशन अवश्य कराएं, क्योंकि इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी। इससे बच्चे जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे।
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पोलियो अभियान भी हुआ प्रभावित
कोरोना के कारण पोलियो अभियान भी प्रभावित रहा, जबकि बच्चों को अपंगता से बचाने के लिए हर साल सात से आठ बार पोलियो ड्राप पिलाने की मुहिम चलती थी, लेकिन कोरोना के चलते पिछले साल से अब तक बूंद जिंदगी के अभियान पटरी पर नहीं लौट सका है।


ऐसे किए जाते हैं बच्चे प्रतिरक्षित
1. जन्म से 24 घंटे पर बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, पोलियो ड्राप (पीसीवी-0)
2. छह सप्ताह पर डीपीटी-1,पोलियो ड्राप(आईपीवी-1), ओपीवी-1,रोटावायरस-एक, न्यूमोकॉकल कॉंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी-1)
3. 10 सप्ताह पर डीपीटी-टू, ओपीवी-टू, रोटावायरस -टू
4. 14 हफ्ते पर डीपीटी, ओपीसी एवं रोटावायरस की तीसरी डोज, आईपीवी व पीसीवी की दूसरी डोज
5. नौ से 12 माह पर खसरा एवं रूबेला की पहली डोज
6. 16 से 24 माह पर खसरा-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर
7. पांच, दस एवं 16 साल पर टीडी वैक्सीन

कोरोना संक्रमण के कारण नियमित टीकाकरण प्रभावित रहा। मगर, अब महिला अस्पताल में रोजाना और सीएचसी, सब सेंटर सहित आंगनबाड़ी केंद्र पर हर बुधवार, शनिवार को टीकाकरण हो रहा है। बच्चों का शत प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने के लिए जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को निर्देशित  किया गया है। - डॉ. शैलेंद्र भटनागर, सीएमओ
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