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Lakhimpur Kheri News: अव्यवस्थाओं का बोलबाला... बच्चों ने बालू में लड़ी कुश्ती
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बालू पर कुश्ती में साथी प्रतिभागी को चित्त करने का प्रयास करती खिलाड़ी छात्रा-संवाद
लखीमपुर खीरी। लालपुर स्टेडियम में चल रहे दो दिवसीय जनपदीय बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का दूसरा दिन भी अव्यवस्थाओं के नाम रहा। इंतजाम के अभाव में बेसिक शिक्षा विभाग ने जहां जगह मिली, वहां प्रतियोगिताएं करा दीं।
शुक्रवार को बालिका वर्ग की कुश्ती प्रतियोेगिता का आयोजन होना था। गद्दाें का इंतजाम न होने के कारण मैदान में बालू डालकर प्रतियोगिता कराई गई। छात्राओं के अंदर कुश्ती जीतने का जज्बा तो दिखा, लेकिन प्रतिद्वंद्वी को चित करने के दौरान बालू आंख और मुंह में जा रही थी, जिस कारण बच्चे सही ढंग से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर सके।
बालू लगने के कारण कपड़े भी गंदे हो रहे थे। वहीं लेमन रेस से नींबू ही गायब था। प्लास्टिक के चम्मच पर गोल आकार की वस्तु रखकर प्रतियोगिता कराई गई। दौड़ की कोई निश्चित दूरी भी तय नहीं थी। फिलहाल जिसने भी यह दौड़ देखी, खुद को हंसने से नहीं रोक सका।
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अब विभाग अव्यवस्थाओं के लिए बजट को भी दोष नहीं दे सकता। क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए बजट मिला था। वहीं स्कूलों तक से वसूली की गई थी। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हर विद्यालय से पांच सौ रुपये वसूले गए हैं। इसका जिम्मा संकुल शिक्षकों के कंधों पर था। स्कूल स्तर से लिए गए रुपये एनपीआरसी से ब्लाॅक और ब्लाॅक से जिला मुख्यालय तक भेजे गए। इसके बावजूद प्रतियोगिता में अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
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शुक्रवार को बालिका वर्ग की कुश्ती प्रतियोेगिता का आयोजन होना था। गद्दाें का इंतजाम न होने के कारण मैदान में बालू डालकर प्रतियोगिता कराई गई। छात्राओं के अंदर कुश्ती जीतने का जज्बा तो दिखा, लेकिन प्रतिद्वंद्वी को चित करने के दौरान बालू आंख और मुंह में जा रही थी, जिस कारण बच्चे सही ढंग से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर सके।
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बालू लगने के कारण कपड़े भी गंदे हो रहे थे। वहीं लेमन रेस से नींबू ही गायब था। प्लास्टिक के चम्मच पर गोल आकार की वस्तु रखकर प्रतियोगिता कराई गई। दौड़ की कोई निश्चित दूरी भी तय नहीं थी। फिलहाल जिसने भी यह दौड़ देखी, खुद को हंसने से नहीं रोक सका।
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अब विभाग अव्यवस्थाओं के लिए बजट को भी दोष नहीं दे सकता। क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए बजट मिला था। वहीं स्कूलों तक से वसूली की गई थी। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हर विद्यालय से पांच सौ रुपये वसूले गए हैं। इसका जिम्मा संकुल शिक्षकों के कंधों पर था। स्कूल स्तर से लिए गए रुपये एनपीआरसी से ब्लाॅक और ब्लाॅक से जिला मुख्यालय तक भेजे गए। इसके बावजूद प्रतियोगिता में अव्यवस्थाएं हावी रहीं।