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दुधवा में बाघों की मौत का मामला: साहब का खाना बना रहे वाचर... कौन रखे वन्यजीवों पर नजर

Tue, 13 Jun 2023 04:53 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 13 Jun 2023 04:53 PM IST
सार

दुधवा टाइगर रिजर्व में 10 दिन में तीन बाघों और एक तेंदुए की अस्वाभाविक मौत से वन विभाग में भूचाल आ गया है। कई अफसर और कर्मचारी नप चुके हैं। जांच में सामने आया कि पेट्रोलिंग में बरती गई कोताही बाघों की मौत का कारण बनीं।

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Case of death of three tigers in Dudhwa Subordinates kept on neglecting
जंगल में वन्यजीवों की निगरानी करते हैं वॉचर।

विस्तार

कहने को तो वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब 300 वाचर हैं, लेकिन अधिकांश साहबों की सेवा में लगे हैं। कोई साहब का खाना बना रहा है, तो कोई घर में झाड़ू-पोंछा कर रहा है। राजकीय सेवा के बजाय अफसरों के निजी नौकर बनकर रह गए। इसके चलते वन व वन्यजीवों की निगरानी नहीं हो पा रही है।   

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दुधवा नेशनल पार्क की 10 रेंज में 46 बीट हैं, जबकि बफरजोन की नौ रेंज में 57 बीट हैं। प्रत्येक में दो बीच वाचर और एक सीजनल वाचर तैनात किए गए हैं। इनका काम लगातार गश्त करते हुए जंगल में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना है। लेकिन, यह दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी केवल अफसरों के रहमोकरम पर हैं। 
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अफसर इनसे जंगल की सुरक्षा कराने की बजाय अपना निजी काम करा रहे हैं। कोई घर की साफ-सफाई कर रहा है तो कोई माली का काम कर रहा है। कई वाचर तो साहब के ड्राइवर बने हुए हैं। यह तब है, जब प्रोजेक्टर टाइगर से मिलने वाला अधिकांश बजट इनके वेतन पर खर्च हो रहा है। दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक डॉ. रंगाराजू टी. का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। इसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। पुष्टि होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

लोकेशन छिपाने को करते हैं एप का इस्तेमाल 

दुधवा टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीवों की निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम से युक्त खास एप एम स्ट्राइप्स के साथ पेट्रोलिंग प्रणाली शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में यह पेट्रोलिंग काफी प्रभावी रही मगर बाद में धीरे-धीरे सुस्त होती गई। कारण यह है कि इस प्रणाली में पेट्रोलिंग करने वाले अधिकारी-कर्मचारी की लोकेशन पता चलती है। इसलिए इस एप से की जाने वाली पेट्रोलिंग करने से कर्मचारी किसी न किसी बहाने बचते हैं। पिछले कई महीनों से एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग लगभग बंद चल रही थी।

11 अफसर और कर्मियों पर हुई कार्रवाई 

दुधवा टाइगर रिजर्व में 45 दिन के अंदर चार बाघों की मौत के बाद 11 अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई का शिकार हुए हैं। फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर को हटाकर उन्हें जैवविविधता बोर्ड भेज दिया गया। उपनिदेशक बफर जोन और डीएफओ सुंदरेश को हटाकर एटा का डीएफओ बनाया गया। 

मैलानी के रेंजर राज कुमार शर्मा, बेलरायां रेंजर बलवंत बहादुर सिंह, बफर जोन मैलानी के रेंजर साजिद हसन, डिप्टी रेंजर मैलानी वीपी सिंह, डिप्टी रेंजर मैलानी अनुज रंजन, मैलानी के फारेस्टर जगदीश प्रसाद राना, उत्तर निघासन के फारेस्टर सोनी भारती, पुष्कर सिंह और मुशीर अहमद को निलंबित कर दिया गया है। जांच पूरी होते होते कई और लोग कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

दशकों से दुधवा में जमे हैं कई डिप्टी रेंजर

दुधवा टाइगर रिजर्व में डिप्टी रेंजर स्तर के कई अधिकारी ऐसे भी हैं, जो दशकों से यहीं जमे हुए हैं। मैलानी के डिप्टी रेंजर शत्रोहन लाल ने यहीं से फॉरेस्ट गार्ड के रूप में नौकरी शुरू की और प्रोन्नत पाकर यहीं डिप्टी रेंजर के पद पर तैनात हैं। वनकटी के सुरेंद्र श्रीवास्तव, मझगईं के डिप्टी रेंजर सोबरन लाल, बेलरायां के डिप्टी रेंजर चंद्रभाल, पलिया के डिप्टी रेंजर रमेश मौर्या, गौरीफंटा के डिप्टी रेंजर रमेश यादव, संपूर्णानगर के डिप्टी रेंजर सरोज बाबू, पलिया के रेंजर विमलेश कुमार रेंजर पर्यटन का भी काम संभाल रहे हैं। 

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पहले मैलानी और फिर भीरा के डिप्टी रेंजर बने अनुज रंजन, आरएसपी के रेंजर रज्जन, कतर्नियाघाट के डिप्टी रेंजर राम कुमार और मनोज कश्यप दुधवा टाइगर रिजर्व में वर्षों से जमे हुए हैं। इनमें से कई डिप्टी रेंजर तो रेंजर का काम देख रहे हैं। कुछ ने अपनी पूरी नौकरी ही दुधवा टाइगर रिजर्व में काट डाली। यह डिप्टी रेंजर इतने दबंग हो चुके हैं कि अधिकारियों तक पर हावी हैं। अफसरों के आदेशों की अवहेलना करने में भी गुरेज नहीं करते।

दुधवा के नए फील्ड डायरेक्टर ने संभाला कार्यभार

दुधवा टाइगर रिजर्व के नए फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा ने सोमवार दोपहर अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। ललित वर्मा बरेली के मुख्य वन संरक्षक पद से स्थानांतरित होकर यहां आए हैं। ललित वर्मा वर्ष 1996 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह आगरा, ज्योतिबाफुले नगर, रायबेरली में डीएफओ, शिवालिक सहारनपुर में वन संरक्षक, मेरठ और बरेली मंडल में मुख्य वन संरक्षक रहे। 

वह कुछ समय के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभारी फील्ड डायरेक्टर भी रह चुके हैं। ललित वर्मा ने निवर्तमान फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर से कार्यभार ग्रहण किया। बी प्रभाकर को यहां से हटाकर जैव विविधता बोर्ड का सचिव बनाया गया है। नए फील्ड डायरेक्टर ने वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने की बात कही है।

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