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हाईकोर्ट के आदेश से खतरे में  हैं नगर पालिका की दुकानें

Tue, 03 Jan 2017 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ।
अमर उजाला ब्यूरो गोला गोकर्णनाथ। Updated Tue, 03 Jan 2017 11:17 PM IST
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By order of the High Court in danger Shops are municipality
court - फोटो : अमर उजाला
बोर्ड प्रस्ताव के अनुरूप न होने पर दिया ध्वस्तीकरण का आदेश
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अलीगंज मार्ग पर स्थित नगर पालिका परिषद की दुकानों के पीछे नाले पर हुए निर्माण और प्रथम तल की दुकानों को ध्वस्त किया जा सकता है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया निर्माण को बोर्ड प्रस्ताव के अनुरूप नहीं पाया। कोर्ट नगर पालिका से कहा है कि वह स्वयं सत्यापित करे निर्माण बोर्ड प्रस्ताव के अनुरूप है या नहीं। यदि नहीं तो अवैध निर्माण के विध्वंस करने की नियमानुसार कार्रवाई की जाए। आदेश से दुकानदारों में हड़कंप मच गया है।
मेला मैदान के दुकानदार हनीफ अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका प्रस्तुत की थी जिसमें नगर के अलीगंज मार्ग पर स्थित नगर पालिका परिषद की दुकानों के दुकानदारों द्वारा पीछे नाले पर अतिक्रमण कर उसके ऊपर अवैध निर्माण कराया जाना दर्शाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की मांग की थी। 
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हाईकोर्ट ने डीएम, एसडीएम, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा। हाईकोर्ट में नगर पालिका के वकील श्रेश कुमार ने बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव और शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया कि दुकानों के ऊपर प्रथम तल पर प्रति दुकानदार से 65 हजार रुपये प्रीमियम और 500 रुपये मासिक किराया निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि दुकानों के पीछे पालिका के नाले पर नाले के ऊपर दीवार से पांच फुट की ऊंचाई पर अधिकतम दो फुट छज्जा निकालने की अनुमति 20 हजार रुपये प्रीमियम के साथ प्रदान की जा सकेगी। नाले पर किसी भी दशा में कोई अवरोध नहीं उत्पन्न किया जाएगा। 
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नगर पालिका परिषद के वकील की बहस का वादी के वकील ज्ञान सिंह चौहान और रुसिदा फरहीन ने विरोध किया और नाले पर हुए निर्माण लोक न्यूसेंस क्रियेट करने वाला बताया। जिस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले, राजन राय ने आदेश दिया कि नाले की दीवार से पांच फुट ऊंचाई पर दो फुट का छज्जा निर्मित किया जाना था, रिट पिटीशन के साथ संलग्न फोटो के परिशीलन से हम प्रथम दृष्टया निर्माण कार्य को नगर पालिका के निर्णय के अनुरूप होना नहीं पाते हैं। इस स्थिति में यह उचित होगा कि नगर पालिका परिषद स्वयं सत्यापित करे कि निर्माण क्या बोर्ड के निर्णय के अनुरूप हुआ है अथवा नहीं, समुचित कार्रवाइयां 15 दिन में करें। यदि पाया जाता है कि निर्माण निर्णय के अनुरूप नहीं है तो उसे विध्वंस करने की नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए। 
 
एसडीएम कोर्ट में किया था मुकदमा
गोला गोकर्णनाथ। हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत करने वाले मोहम्मद हनीफ ने अक्तूबर माह में एसडीएम न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के अंतर्गत मुकदमा दायर कर सार्वजनिक नाले पर दुकानदारों द्वारा विधि विरुद्ध निर्माण कर लोक न्यूसेंस क्रियेट करने का आरोप लगाकर मौके पर यथास्थित कायम कर अवैध निर्माण हटाए जाने के लिए आदेश की मांग की थी, जिसमें एसडीएम ने कोतवाल को जांच के लिए लिखा था और सार्वजनिक नाले पर किए जा रहे अतिक्रमण को तत्काल रुकवाने का आदेश दिया था। यह मुकदमा अभी एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। 

  
नगर पालिका बोर्ड द्वारा जो प्रस्ताव पारित किया गया है उसके अलावा यदि कोई निर्माण पाया जाता है तो वह जांच कराकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप ध्वस्त किया जाएगा।
-घनश्याम त्रिपाठी, एसडीएम गोला
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