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विकास भवन का गेट बंद होने से भड़कीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 24 Aug 2015 08:31 PM IST
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एक दिवसीय धरना प्रदर्शन के दौरान डीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां सोमवार की शाम डीपीओ को ज्ञापन देने के लिए विकास भवन पहुंच गईं, जहां कार्यकत्रियों को देखकर विकास भवन का गेट बंद कर दिया गया। इससे कार्यकत्रियां भड़क गईं और विकास भवन के गेट पर धरने पर बैठकर मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगीं। इससे विकास भवन में अफरा-तफरी मच गई। कार्यकत्रियों के आक्रोश को देखते हुए डीपीओ अखिलेंद्र दुबे वहां पहुंचे और दो प्रतिनिधियों को बुलाकर उनसे ज्ञापन लिया। जिसके बाद कार्यकत्रियों का गुस्सा शांत हुआ।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को उप्र राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने विलोबी हाल में धरना-प्रदर्शन किया। जिसमें मंडल अध्यक्ष सरन चंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि कार्यकत्रियों से अन्य विभागों का कार्य न लिया जाए, 2007 से अब तक पुष्टाहार की ढुलाई का शीघ्र भुगतान किया जाए। कार्यकत्री की एमपीआर रिपोर्ट और बायोडॉटा फीडिंग में वसूली पर रोक लगाई जाए। डीपीओ के प्रत्येक महासंघ की नियमित बैठक कराई जाए। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय प्रतिमाह भुगतान किया जाए। केंद्रों पर टाट-पट्टी, स्लेट, आदि साज-सज्जा सामग्री दी जाए। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को बीमा धनराशि प्राप्त कराई जाए। आरोप लगाया कि डीपीओ, सीडीपीओं और सेविकाओं द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और उत्पीड़न को रोका जाए और डीपीओ का स्थानांतरण कहीं और किया जाए। कार्यकत्रियों ने ग्रीष्मावकाश, शीतकालीन अवकाश देने की मांग की। इस तरह कार्यकत्रियों ने 14 बिंदुओं का ज्ञापन डीएम को सौंपा। विलोबी हाल में धरना-प्रदर्शन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां शाम के समय डीपीओ अखिलेंद्र दुबे को ज्ञापन देने के लिए विकास भवन पहुंचीं, जहां विकास भवन का गेट बंद कर दिया गया। इससे नाराज कार्यकत्रियों ने परिसर में ही धरना दे दिया और वाहनों को निकलने से रोकते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। शुरू में तो कार्यकत्रियों को यह कह कर वापस करने की कोशिश की गई कि डीपीओ दफ्तर में नहीं हैं, लेकिन उनके आक्रोश को देखते हुए कुछ देर बाद डीपीओ विकास भवन स्थित अपने कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि कार्यकत्रियों के दो प्रतिनिधियों को बुलाकर उनसे ज्ञापन लिया गया है और उनकी समस्याओं के संबंध में बात की गई है। इस दौरान मंडल संयोजक लाल प्रसाद वर्मा, जिलाध्यक्ष रामलक्ष्मी शुक्ला, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मोहन लाल सिंह समेत तमाम कार्यकत्रियां थीं।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को उप्र राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने विलोबी हाल में धरना-प्रदर्शन किया। जिसमें मंडल अध्यक्ष सरन चंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि कार्यकत्रियों से अन्य विभागों का कार्य न लिया जाए, 2007 से अब तक पुष्टाहार की ढुलाई का शीघ्र भुगतान किया जाए। कार्यकत्री की एमपीआर रिपोर्ट और बायोडॉटा फीडिंग में वसूली पर रोक लगाई जाए। डीपीओ के प्रत्येक महासंघ की नियमित बैठक कराई जाए। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय प्रतिमाह भुगतान किया जाए। केंद्रों पर टाट-पट्टी, स्लेट, आदि साज-सज्जा सामग्री दी जाए। कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को बीमा धनराशि प्राप्त कराई जाए। आरोप लगाया कि डीपीओ, सीडीपीओं और सेविकाओं द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार और उत्पीड़न को रोका जाए और डीपीओ का स्थानांतरण कहीं और किया जाए। कार्यकत्रियों ने ग्रीष्मावकाश, शीतकालीन अवकाश देने की मांग की। इस तरह कार्यकत्रियों ने 14 बिंदुओं का ज्ञापन डीएम को सौंपा। विलोबी हाल में धरना-प्रदर्शन के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां शाम के समय डीपीओ अखिलेंद्र दुबे को ज्ञापन देने के लिए विकास भवन पहुंचीं, जहां विकास भवन का गेट बंद कर दिया गया। इससे नाराज कार्यकत्रियों ने परिसर में ही धरना दे दिया और वाहनों को निकलने से रोकते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। शुरू में तो कार्यकत्रियों को यह कह कर वापस करने की कोशिश की गई कि डीपीओ दफ्तर में नहीं हैं, लेकिन उनके आक्रोश को देखते हुए कुछ देर बाद डीपीओ विकास भवन स्थित अपने कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि कार्यकत्रियों के दो प्रतिनिधियों को बुलाकर उनसे ज्ञापन लिया गया है और उनकी समस्याओं के संबंध में बात की गई है। इस दौरान मंडल संयोजक लाल प्रसाद वर्मा, जिलाध्यक्ष रामलक्ष्मी शुक्ला, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष मोहन लाल सिंह समेत तमाम कार्यकत्रियां थीं।
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