लोकसभा चुनाव 2024: इन दो सीटों पर जातीय समीकरण के सहारे चुनावी नैया पार करने की कोशिश में बसपा
भाजपा और सपा ने खीरी और धौरहरा सीट पर अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। वहीं बसपा जातीय समीकरणों के आधार पर दोनों सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए मंथन कर रही है।
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लखीमपुर खीरी जिले की दो संसदीय सीटों खीरी और धौरहरा पर उम्मीदवार तय करने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा जहां बूथ स्तर पर वोटों को साधने की कोशिश में जुटी है, वहीं बसपा जातीय समीकरणों के सहारे जीत की तलाश में है। दोनों सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए बसपा में मंथन जारी है।
बसपा को उम्मीद है कि अगर जातीय गणित साध लिया जाए, तो सत्तारूढ़ दल को चुनौती दी जा सकती है। कांग्रेस और सपा के गठबंधन के तहत दोनों सीटों पर सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जिससे स्थानीय कांग्रेसी नेता नाराज हैं। उधर, तीसरी बार दोनों सीटों से प्रत्याशियों को दोबारा टिकट दिये जाने से भाजपा के नेताओं में भी असंतोष है।
ऐसे में बसपा जातीय समीकरणों को साधते हुए सियासी नैया पार लगाने की तैयारी में है। धौरहरा में ब्राह्मण और खीरी सीट पर ओबीसी वोट ही अब तक जीत तय करता रहा है। बसपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बार पार्टी ने धौरहरा सीट से ब्राह्माण व खीरी संसदीय सीट से ओबीसी चेहरे को उतारने का मन बनाया है।
खीरी लोकसभा सीट
खीरी सीट पर 2009 के लोकसभा चुनाव में जफर अली नकवी ने जीत हासिल की थी। मोदी लहर में ओबीसी बहुल खीरी संसदीय सीट पर अजय मिश्र टेनी को ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में सपा, कांग्रेस के अलावा अब बसपा भी ओबीसी वोटर की गोलबंदी करने के प्रयास में जुट गई है।
धौरहरा लोकसभा सीट
परिसीमन के बाद पहली बार 2009 में अस्तित्व में आई धौरहरा सीट पर ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद कांग्रेस के टिकट पर जीतकर केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। ब्राह्मण बहुल धौरहरा सीट पर भाजपा का माना जाने वाला ब्राह्मण वोट मोदी लहर में 2014 और 2019 के चुनावों में रेखा वर्मा को मिला। बसपा अब ब्राह्मणों को साधने में जुटी है, ताकि रेखा वर्मा का विजयरथ रोका जा सके।
टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस-सपा में खींचतान
हाल ही में सपा का राष्ट्रीय महासचिव का पद छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व सांसद रवि वर्मा सीट बंटवारे से खासे आहत हैं। स्थानीय कांग्रेसी नेता भी पसोपेश में हैं। कांग्रेसी नेता अपनी उम्मीदवारी को मजबूत बताते हुए अन्य राहें भी तलाश रहे हैं।
पिछली बार रवि वर्मा की बेटी पूर्वी वर्मा सपा-बसपा गठबंधन की ओर से टेनी के खिलाफ चुनाव लड़ीं थीं। हालांकि, वह जीत नहीं सकीं। हाल ही में खबर आई कि उनकी बसपा के नेताओं से भी बातचीत हुई है लेकिन पूर्वी वर्मा ने इस खबर को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया। सूत्र बताते हैं कि पूर्वी को कांग्रेस ने खीरी से टिकट देने का आश्वासन दिया है।