फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   BSP will declare candidates on caste basis for Kheri and Dhaurahra lok sabha seats

लोकसभा चुनाव 2024: इन दो सीटों पर जातीय समीकरण के सहारे चुनावी नैया पार करने की कोशिश में बसपा

Sun, 10 Mar 2024 04:39 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 10 Mar 2024 04:39 PM IST
सार

भाजपा और सपा ने खीरी और धौरहरा सीट पर अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। वहीं बसपा जातीय समीकरणों के आधार पर दोनों सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए मंथन कर रही है। 

विज्ञापन
BSP will declare candidates on caste basis for Kheri and Dhaurahra lok sabha seats
बसपा सुप्रीमो मायावती - फोटो : amar ujala

विस्तार

लखीमपुर खीरी जिले की दो संसदीय सीटों खीरी और धौरहरा पर उम्मीदवार तय करने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा जहां बूथ स्तर पर वोटों को  साधने  की कोशिश में जुटी है, वहीं बसपा जातीय समीकरणों के सहारे जीत की तलाश में है। दोनों सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए बसपा में मंथन जारी है। 

विज्ञापन


बसपा को उम्मीद है कि अगर जातीय गणित साध लिया जाए, तो सत्तारूढ़ दल को चुनौती दी जा सकती है। कांग्रेस और सपा के गठबंधन के तहत दोनों सीटों पर सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जिससे स्थानीय कांग्रेसी नेता नाराज हैं। उधर, तीसरी बार दोनों सीटों से प्रत्याशियों को दोबारा टिकट दिये जाने से भाजपा के नेताओं में भी असंतोष है। 
विज्ञापन


ऐसे में बसपा जातीय समीकरणों को साधते हुए सियासी नैया पार लगाने की तैयारी में है। धौरहरा में ब्राह्मण और खीरी सीट पर ओबीसी वोट ही अब तक जीत तय करता रहा है। बसपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस बार पार्टी ने धौरहरा सीट से ब्राह्माण व खीरी संसदीय सीट से ओबीसी चेहरे को उतारने का मन बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

खीरी लोकसभा सीट
खीरी सीट पर 2009 के लोकसभा चुनाव में जफर अली नकवी ने जीत हासिल की थी। मोदी लहर में ओबीसी बहुल खीरी संसदीय सीट पर अजय मिश्र टेनी को ज्यादा वोट मिले थे। ऐसे में सपा, कांग्रेस के अलावा अब बसपा भी ओबीसी वोटर की गोलबंदी करने के प्रयास में जुट गई है।

धौरहरा लोकसभा सीट
परिसीमन के बाद पहली बार 2009 में अस्तित्व में आई धौरहरा सीट पर ब्राह्मण चेहरे जितिन प्रसाद कांग्रेस के टिकट पर जीतकर केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। ब्राह्मण बहुल धौरहरा सीट पर भाजपा का माना जाने वाला ब्राह्मण वोट मोदी लहर में 2014 और 2019 के चुनावों में रेखा वर्मा को मिला। बसपा अब ब्राह्मणों को साधने में जुटी है, ताकि रेखा वर्मा का विजयरथ रोका जा सके। 

टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस-सपा में खींचतान  
हाल ही में सपा का राष्ट्रीय महासचिव का पद छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व सांसद रवि वर्मा सीट बंटवारे से खासे आहत हैं। स्थानीय कांग्रेसी नेता भी पसोपेश में हैं। कांग्रेसी नेता अपनी उम्मीदवारी को मजबूत बताते हुए अन्य राहें भी तलाश रहे हैं। 

पिछली बार रवि वर्मा की बेटी पूर्वी वर्मा सपा-बसपा गठबंधन की ओर से टेनी के खिलाफ चुनाव लड़ीं थीं। हालांकि, वह जीत नहीं सकीं। हाल ही में खबर आई कि उनकी बसपा के नेताओं से भी बातचीत हुई है लेकिन पूर्वी वर्मा ने इस खबर को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया। सूत्र बताते हैं कि पूर्वी को कांग्रेस ने खीरी से टिकट देने का आश्वासन दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed