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गेहूं खरीद के लिए एजेंसियों के पास बोरा ही उपलब्ध नहीं
अमित गुप्ता/लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:04 PM IST
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गेहूं
- फोटो : अमर उजाला
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...नियत में खोट किसानों की किस्मत पर हो रही चोट
- क्रय केंद्रों पर सिर्फ बैनर टांग कर रहे खानापूर्ति
- राज्य पूल की आठ एजेंसियों के 127 क्रय केंद्र ड्राई
एक अप्रैल से सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से सीधे गेहूं खरीद के दावे हवाई साबित हुए हैं। अभी कागजों पर ही खरीद का ताना-बाना बुना जा रहा है, लेकिन क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं हकीकत से कोसों दूर हैं। जिले भर में नौ एजेंसियों के 132 क्रय केंद्र खोले जाने के दावे अफसर कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ बैनर टांग कर किसानों को चिढ़ाया जा रहा है। खास बात यह है कि अभी एजेंसियों के पास बोरा ही उपलब्ध नहीं है, जिससे क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है। वहीं एफसीआई ने भी दो-टूक लहजे में राज्य सरकार की आठ एजेंसियों को चेताते हुए पुराने बोरा में गेहूं की डिलीवरी लेने से इंकार किया है।
पिछले वर्षों की तरह इस बार भी छोटे और मझोले किसान छले जाएंगे, जिसके लिए सरकारी एजेंसियों ने प्लेटफार्म तैयार कर दिया है। जरूरतमंद किसानों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर गेहूं बेचना पड़ रहा है, क्योंकि जिले भर में बनाए गए राज्य सरकार के 127 क्रय केंद्रों पर अभी गेहूं खरीद की शुरुआत नहीं हो सकी हैै। गेहूं खरीद शुरू न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण एजेंसियों के पास बोरा उपलब्ध नहीं होना माना जा रहा है, क्योंकि अधिकांश क्रय केंद्रों पर बोरा उपलब्ध नहीं है। तो कांटा-बांट भी नहीं हैै। हालांकि डीएम ने स्वयं कई क्रय केंद्रों का दौरा कर हकीकत जानी थी, जिसके बावजूद अधिकारी नहीं चेते हैं। इसके उलट राज्य की एजेंसियां विपणन शाखा, एसएफसी, पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, नैकाफ, एनसीसीएफ, एग्रो और यूपीएसएस ने क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने के दावे कर रहीं हैं और इसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों के पास भेजी जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि इन एजेंसियों पर अभी तक एक दाने की खरीद नहीं हो सकी है। राजापुर मंडी स्थित एक क्रय केंद्र के प्रभारी ने बताया कि अभी बोरा ही उपलब्ध नहीं है, जिससे खरीद शुरू नहीं हो पाई है। यही हाल जिले भर के क्रय केंद्रों का है, जहां बोरा उपलब्ध न होने के चलते खरीद नहीं की जा रही है।
सिर्फ केंद्रीय एजेंसी एफसीआई ने शुरू की खरीद
जिले भर में 132 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें पांच क्रय केंद्र एफसीआई ने खोले हैं। एफसीआई डिपो के मैनेजर विनोद खुन्नू ने बताया है कि पांच केंद्रों पर खरीद शुरू हो गई है। अब तक करीब 200 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है।
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पुराने बारदाना पर फंसा पेंच
क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाओं के नाम पर कई वर्ष पुराना बारदाना पहुंचाया गया है, लेकिन एफसीआई ने पुराने छापे के बोरों में गेहूं की डिलीवरी लेने से मना कर दिया हैै। हालांकि एफसीआई के डिपो मैनेजर विनोद खुन्नू ने इस तरह का कोई आदेश प्राप्त होने से इंकार किया है और उन्होंने कहा कि पुराने बारदाना की बाबत एजेंसियों की ओर से कोई पत्राचार नहीं किया है।
1500 गांठ बारदाना एलाट हो गया है, जिसमें सात लाख 50 हजार बोरियां हैैं। लखनऊ से डिलीवरी प्राप्त होते ही विपणन, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम को गांठें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा शेष एजेंसियों को स्वयं अपने स्तर से बोरा क्रय करने के निर्देश दिए गए हैैं। अभी गेहूं में मानक से नमी ज्यादा है, जिससे खरीद शुरू होने में देरी हो रही है।
- अर्जुन प्रसाद पाठक, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
क्रय केंद्रों पर खरीद के लिए समुचित व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बारदाना की उपलब्धता के बारे में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी है। खरीद शुरू न होने के मामले की जांच कराएंगे।
- आकाश दीप, डीएम
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- क्रय केंद्रों पर सिर्फ बैनर टांग कर रहे खानापूर्ति
- राज्य पूल की आठ एजेंसियों के 127 क्रय केंद्र ड्राई
एक अप्रैल से सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से सीधे गेहूं खरीद के दावे हवाई साबित हुए हैं। अभी कागजों पर ही खरीद का ताना-बाना बुना जा रहा है, लेकिन क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं हकीकत से कोसों दूर हैं। जिले भर में नौ एजेंसियों के 132 क्रय केंद्र खोले जाने के दावे अफसर कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ बैनर टांग कर किसानों को चिढ़ाया जा रहा है। खास बात यह है कि अभी एजेंसियों के पास बोरा ही उपलब्ध नहीं है, जिससे क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है। वहीं एफसीआई ने भी दो-टूक लहजे में राज्य सरकार की आठ एजेंसियों को चेताते हुए पुराने बोरा में गेहूं की डिलीवरी लेने से इंकार किया है।
पिछले वर्षों की तरह इस बार भी छोटे और मझोले किसान छले जाएंगे, जिसके लिए सरकारी एजेंसियों ने प्लेटफार्म तैयार कर दिया है। जरूरतमंद किसानों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर गेहूं बेचना पड़ रहा है, क्योंकि जिले भर में बनाए गए राज्य सरकार के 127 क्रय केंद्रों पर अभी गेहूं खरीद की शुरुआत नहीं हो सकी हैै। गेहूं खरीद शुरू न होने के पीछे सबसे बड़ा कारण एजेंसियों के पास बोरा उपलब्ध नहीं होना माना जा रहा है, क्योंकि अधिकांश क्रय केंद्रों पर बोरा उपलब्ध नहीं है। तो कांटा-बांट भी नहीं हैै। हालांकि डीएम ने स्वयं कई क्रय केंद्रों का दौरा कर हकीकत जानी थी, जिसके बावजूद अधिकारी नहीं चेते हैं। इसके उलट राज्य की एजेंसियां विपणन शाखा, एसएफसी, पीसीएफ, कर्मचारी कल्याण निगम, नैकाफ, एनसीसीएफ, एग्रो और यूपीएसएस ने क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने के दावे कर रहीं हैं और इसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों के पास भेजी जा रही है। जबकि हकीकत यह है कि इन एजेंसियों पर अभी तक एक दाने की खरीद नहीं हो सकी है। राजापुर मंडी स्थित एक क्रय केंद्र के प्रभारी ने बताया कि अभी बोरा ही उपलब्ध नहीं है, जिससे खरीद शुरू नहीं हो पाई है। यही हाल जिले भर के क्रय केंद्रों का है, जहां बोरा उपलब्ध न होने के चलते खरीद नहीं की जा रही है।
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सिर्फ केंद्रीय एजेंसी एफसीआई ने शुरू की खरीद
जिले भर में 132 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें पांच क्रय केंद्र एफसीआई ने खोले हैं। एफसीआई डिपो के मैनेजर विनोद खुन्नू ने बताया है कि पांच केंद्रों पर खरीद शुरू हो गई है। अब तक करीब 200 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है।
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पुराने बारदाना पर फंसा पेंच
क्रय केंद्रों पर व्यवस्थाओं के नाम पर कई वर्ष पुराना बारदाना पहुंचाया गया है, लेकिन एफसीआई ने पुराने छापे के बोरों में गेहूं की डिलीवरी लेने से मना कर दिया हैै। हालांकि एफसीआई के डिपो मैनेजर विनोद खुन्नू ने इस तरह का कोई आदेश प्राप्त होने से इंकार किया है और उन्होंने कहा कि पुराने बारदाना की बाबत एजेंसियों की ओर से कोई पत्राचार नहीं किया है।
1500 गांठ बारदाना एलाट हो गया है, जिसमें सात लाख 50 हजार बोरियां हैैं। लखनऊ से डिलीवरी प्राप्त होते ही विपणन, एसएफसी, कर्मचारी कल्याण निगम को गांठें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा शेष एजेंसियों को स्वयं अपने स्तर से बोरा क्रय करने के निर्देश दिए गए हैैं। अभी गेहूं में मानक से नमी ज्यादा है, जिससे खरीद शुरू होने में देरी हो रही है।
- अर्जुन प्रसाद पाठक, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
क्रय केंद्रों पर खरीद के लिए समुचित व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। बारदाना की उपलब्धता के बारे में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी नहीं दी है। खरीद शुरू न होने के मामले की जांच कराएंगे।
- आकाश दीप, डीएम