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डेढ़ साल पहले शुरू हुआ था कटहा में खूनी खेल
अमर उजाला ब्यूरो निघासन।
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:56 PM IST
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murder
- फोटो : amar ujala
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बच्चों के जीवित न बचने से नाराज थे आरोपी, तंत्र मंत्र के शक में 2015 में रामनाथ की हुई थी हत्या
गांव कटहा में पारिवारिक खूनी खेल डेढ़ साल पहले तंत्र मंत्र के शक में शुरू हुआ था। अवधेश रामनाथ को तांत्रिक समझता था। अवधेश का आरोप था कि उसकी पत्नी चुन्नी ने कई बच्चों को जन्म दिया, लेकिन रामनाथ ने उसके ऊपर तंत्र मंत्र विद्या कर दी थी, जिससे जिसके चलते उसके बच्चे मर जाते थे। इसी रंजिश में 15 अक्तूबर 2015 की सुबह करीब पांच बजे रामनाथ की उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह शौच के लिए गए थे।
रामनाथ का शव निघासन-ढखेरवा मार्ग पर कटहा जाने वाले रास्ते पर पड़ा मिला था। पहले तो दुर्घटना के चलते मृत्यु की बात कही गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद रामनाथ के बेटे रज्जन की तहरीर पर अवधेश के खिलाफ पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और उसे गिरफ्तार कर चालान भेजा था। रज्जन ने बताया कि अवधेश ने जेल से छूटने के बाद पूरे परिवार को जान से मारने की कसम खाई थी। उसके बाद 17 अप्रैल 2016 को अवधेश पक्ष के अजय कुमार की शादी थी। जब दुल्हन विदा होकर आई तो कसावल निवासी फौजी राजेंद्र सिंह ने तमंचे से हर्ष फायरिंग कर दी। गोली लगने से अवधेश पक्ष के कमलेश यादव की पांच वर्षीय पुत्री कुंती देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने राजेंद्र सिंह, रज्जन और जंत्री प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तीनों का चालान भेजा था। हाल ही में तीनों आरोपी जेल से छूटकर आए थे। रंजिश के चलते आरोपी अवधेश ने कटहा गांव में मौजूद अपनी करीब 25 बीघा जमीन और पैतृक मकान बेच दिया था और सिंगाही रोड पर निघासन कस्बे में मकान बनवाकर रह रहा था। दिव्यांग रामकुमार ने बताया कि अवधेश पूरे परिवार को मारने के लिए मौके की तलाश में था। रज्जन परिवार का मुखिया था, इसलिए आरोपी उसे रास्ते से हटाना चाहता था। जिसके चलते बुधवार रात उसने फूलकेसरी को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया और आरती, रज्जन, रजनी, सुभाषिनी को मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गए थे।
दोहरे हत्याकांड से थर्राया निघासन
21 दिसंबर को गांव हथियाबोझ में अगौला कटाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था, जिसके चलते शिवरतन तथा हरिश्चंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बाद गांव कटहा में मासूम फूलकेसरी और आरती की मौत से पूरा क्षेत्र थर्रा गया हैं।
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पैसों और जमीन की रंजिश भी हत्या का कारण
अवधेश और रज्जन के बीच भूमि विवाद भी बताया जाता हैं। रज्जन ने बताया कि करीब तीन साल पहले एक भूमि अवधेश ने खरीदी थी। भूमि खरीदने के लिए पांच लाख रुपये अवधेश ने उधार लिया था। पैसा न देने के कारण पहले उसने पिता रामनाथ, उसके बाद मुझे मारने का प्रयास किया हैं।
प्रसाद चढ़ाने के बहाने घर से निकले थे आरोपी
इंस्पेक्टर डीसी मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए आरोपी सत्यप्रकाश ने पूछताछ के दौरान बताया कि अवधेश और वह घर से यह कहकर निकले थे कि वह प्रसाद चढ़ाने के लिए मंदिर जा रहे हैं। उसके बाद वह लोग देर रात तक घर नहीं गए।
जरा सी भी दया नहीं आई कातिलों को
निघासन में परिवार पर हमला कर दो लोगों की हत्या का मामला
निघासन। हमलावर हाथों में हंसिया, बांका आदि धारदार हथियार लेकर घर मेें घुसे थे। सो रहे मासूमों पर ताबड़तोड़ प्रहार करते समय उन्हें जरा सी भी दया नहीं आई। सुशीला ने बताया कि बाएं करवट फूलकेसरी लेटी हुई थी।
पल्लू में छुपा लिया मासूम शोभित को
अजय की पत्नी सुशीला ने बताया कि उसका जेठ रज्जन घर का मुखिया है। हमलावर उसके पूरे परिवार को खत्म करने की नीयत से आए थे। रज्जन, उसकी पत्नी रजनी तथा बेटे चार वर्षीय शोभित को जान से मारना चाहते थे। जब हमलावर धारदार हथियार से प्रहार कर रहे थे, तब बेटे को बचाने के लिए रजनी ने साड़ी के पल्लू में उसे छिपा लिया। हमलावरों ने फूलकेसरी को उसका बेटा समझकर उसके ऊपर ताबड़तोड़ प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया।
वीभत्स कांड से परिवार के लोगों के नहीं थम रहे आंसू
रज्जन की मां गोमती देवी, दिव्यांग रामकुमार, अजय कुमार, उसकी पत्नी सुशीला, राहुल के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनका करुण रूदन सुनकर हर एक का दिल पसीज गया।
दादी के साथ जाती तो शायद बच जाती फूलकेसरी
रज्जन की मां गोमती अपने मायके मंझरा पूरब दो दिन पहले अपनी बीमार मां को देखने गई थी। उस समय उसकी लाडली पोती फूलकेसरी भी जाने की जिद कर रही थी। कम उम्र होने कारण गोमती उसे साथ लेकर नहीं गई थी। घटना के बारे में जानकर वह भोर में गांव आई थी। यदि वह फूलकेसरी को साथ ले जाती तो शायद उसकी जान बच जाती।
सोता हुआ समझकर फूलकेसरी को नहीं ले गए अस्पताल
घटना के बाद परिवार के लोग काफी खौफजदा थे। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। परिवार के लोग फूलकेसरी को सोता हुआ समझकर उसे घर के बाहर छप्पर वाले हिस्से में लिटा आए थे। घायलों को अस्पताल भिजवा दिया था। सुबह करीब पांच बजे दिव्यांग रामकुमार पैरों से खिसकता हुआ फूलकेसरी के पास पहुंचा। तब उसने गर्दन से खून बहता हुआ देखा। उसे जगाने का प्रयास किया, लेकिन वह मृत अवस्था में मिली।
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गांव कटहा में पारिवारिक खूनी खेल डेढ़ साल पहले तंत्र मंत्र के शक में शुरू हुआ था। अवधेश रामनाथ को तांत्रिक समझता था। अवधेश का आरोप था कि उसकी पत्नी चुन्नी ने कई बच्चों को जन्म दिया, लेकिन रामनाथ ने उसके ऊपर तंत्र मंत्र विद्या कर दी थी, जिससे जिसके चलते उसके बच्चे मर जाते थे। इसी रंजिश में 15 अक्तूबर 2015 की सुबह करीब पांच बजे रामनाथ की उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह शौच के लिए गए थे।
रामनाथ का शव निघासन-ढखेरवा मार्ग पर कटहा जाने वाले रास्ते पर पड़ा मिला था। पहले तो दुर्घटना के चलते मृत्यु की बात कही गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद रामनाथ के बेटे रज्जन की तहरीर पर अवधेश के खिलाफ पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और उसे गिरफ्तार कर चालान भेजा था। रज्जन ने बताया कि अवधेश ने जेल से छूटने के बाद पूरे परिवार को जान से मारने की कसम खाई थी। उसके बाद 17 अप्रैल 2016 को अवधेश पक्ष के अजय कुमार की शादी थी। जब दुल्हन विदा होकर आई तो कसावल निवासी फौजी राजेंद्र सिंह ने तमंचे से हर्ष फायरिंग कर दी। गोली लगने से अवधेश पक्ष के कमलेश यादव की पांच वर्षीय पुत्री कुंती देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने राजेंद्र सिंह, रज्जन और जंत्री प्रसाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तीनों का चालान भेजा था। हाल ही में तीनों आरोपी जेल से छूटकर आए थे। रंजिश के चलते आरोपी अवधेश ने कटहा गांव में मौजूद अपनी करीब 25 बीघा जमीन और पैतृक मकान बेच दिया था और सिंगाही रोड पर निघासन कस्बे में मकान बनवाकर रह रहा था। दिव्यांग रामकुमार ने बताया कि अवधेश पूरे परिवार को मारने के लिए मौके की तलाश में था। रज्जन परिवार का मुखिया था, इसलिए आरोपी उसे रास्ते से हटाना चाहता था। जिसके चलते बुधवार रात उसने फूलकेसरी को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया और आरती, रज्जन, रजनी, सुभाषिनी को मरणासन्न स्थिति में छोड़कर फरार हो गए थे।
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दोहरे हत्याकांड से थर्राया निघासन
21 दिसंबर को गांव हथियाबोझ में अगौला कटाने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था, जिसके चलते शिवरतन तथा हरिश्चंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके बाद गांव कटहा में मासूम फूलकेसरी और आरती की मौत से पूरा क्षेत्र थर्रा गया हैं।
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अवधेश और रज्जन के बीच भूमि विवाद भी बताया जाता हैं। रज्जन ने बताया कि करीब तीन साल पहले एक भूमि अवधेश ने खरीदी थी। भूमि खरीदने के लिए पांच लाख रुपये अवधेश ने उधार लिया था। पैसा न देने के कारण पहले उसने पिता रामनाथ, उसके बाद मुझे मारने का प्रयास किया हैं।
प्रसाद चढ़ाने के बहाने घर से निकले थे आरोपी
इंस्पेक्टर डीसी मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए आरोपी सत्यप्रकाश ने पूछताछ के दौरान बताया कि अवधेश और वह घर से यह कहकर निकले थे कि वह प्रसाद चढ़ाने के लिए मंदिर जा रहे हैं। उसके बाद वह लोग देर रात तक घर नहीं गए।
जरा सी भी दया नहीं आई कातिलों को
निघासन में परिवार पर हमला कर दो लोगों की हत्या का मामला
निघासन। हमलावर हाथों में हंसिया, बांका आदि धारदार हथियार लेकर घर मेें घुसे थे। सो रहे मासूमों पर ताबड़तोड़ प्रहार करते समय उन्हें जरा सी भी दया नहीं आई। सुशीला ने बताया कि बाएं करवट फूलकेसरी लेटी हुई थी।
पल्लू में छुपा लिया मासूम शोभित को
अजय की पत्नी सुशीला ने बताया कि उसका जेठ रज्जन घर का मुखिया है। हमलावर उसके पूरे परिवार को खत्म करने की नीयत से आए थे। रज्जन, उसकी पत्नी रजनी तथा बेटे चार वर्षीय शोभित को जान से मारना चाहते थे। जब हमलावर धारदार हथियार से प्रहार कर रहे थे, तब बेटे को बचाने के लिए रजनी ने साड़ी के पल्लू में उसे छिपा लिया। हमलावरों ने फूलकेसरी को उसका बेटा समझकर उसके ऊपर ताबड़तोड़ प्रहार कर मौत के घाट उतार दिया।
वीभत्स कांड से परिवार के लोगों के नहीं थम रहे आंसू
रज्जन की मां गोमती देवी, दिव्यांग रामकुमार, अजय कुमार, उसकी पत्नी सुशीला, राहुल के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उनका करुण रूदन सुनकर हर एक का दिल पसीज गया।
दादी के साथ जाती तो शायद बच जाती फूलकेसरी
रज्जन की मां गोमती अपने मायके मंझरा पूरब दो दिन पहले अपनी बीमार मां को देखने गई थी। उस समय उसकी लाडली पोती फूलकेसरी भी जाने की जिद कर रही थी। कम उम्र होने कारण गोमती उसे साथ लेकर नहीं गई थी। घटना के बारे में जानकर वह भोर में गांव आई थी। यदि वह फूलकेसरी को साथ ले जाती तो शायद उसकी जान बच जाती।
सोता हुआ समझकर फूलकेसरी को नहीं ले गए अस्पताल
घटना के बाद परिवार के लोग काफी खौफजदा थे। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। परिवार के लोग फूलकेसरी को सोता हुआ समझकर उसे घर के बाहर छप्पर वाले हिस्से में लिटा आए थे। घायलों को अस्पताल भिजवा दिया था। सुबह करीब पांच बजे दिव्यांग रामकुमार पैरों से खिसकता हुआ फूलकेसरी के पास पहुंचा। तब उसने गर्दन से खून बहता हुआ देखा। उसे जगाने का प्रयास किया, लेकिन वह मृत अवस्था में मिली।