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काले गेहूं की खेती किसानों को दे रही मुनाफा
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नाबार्ड के शरद मेला में लगा काला गेहूं का स्टाल।
जिले में मितौली ब्लॉक से शुरू हुई काले गेहूं की खेती, हाथोंहाथ बिक रहा गेहूं
पौष्टिक होने के साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है यह गेहूं ‘नाबी एमजी’
लखीमपुर खीरी। शायद काला गेहूं नाम पहली बार सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। काले गेहूं की खेती किसानों के लिए आम गेहूं की खेती से तीन से चार गुना फायेदमंद साबित हो रही है। पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में भी काले गेहूं की खेती कर किसान मोटी कमाई कर रहे हैं। यह गेहूं पौष्टिक होने के साथ अनेक औषधीय गुणों से भरपूर भी है।
बाजार में काला गेहूं 4,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बिकता है, जबकि आम गेहूं का मूल्य 2000 रुपये प्रति क्विंटल है। मितौली ब्लॉक के शिवपुरी गांव निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक उदय प्रकाश मिश्र बताते हैं कि चंडीगढ़ की कृषि वैज्ञानिक मोनिका गर्ग ने सात साल के लंबे प्रयास के बाद वर्ष 2017 में काले गेहूं का बीज विकसित करने में सफलता हासिल की। पंजाब के बाद मध्य प्रदेश और फिर खीरी जिले में काले गेहूं की खेती शुरू हुई है।
उदय प्रकाश मिश्र का कहना है वर्ष 2020 में पंजाब से बीज लाकर एक एकड़ खेत में काले गेहूं की बुवाई की। इसको तैयार करने में सिर्फ जैविक खादों का इस्तेमाल किया जाता है। रासायनिक खाद का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता। न ही कीटनाशक और खरपतवार नाशक दवाएं प्रयोग की जाती हैं। यही वजह है कि काला गेहूं पूरी तरह आर्गेनिक है। उनका कहना है कि काला गेहूं की मांग दिन पर दिन बढ़ रही है। अब वह खाने के लिए काला गेहूं बेचने के साथ ही उसका बीज भी बेच रहे हैं। विलोबी मैदान में नाबार्ड के तीन दिवसीय शरद मेले में शिव कृषक क्लब के माध्यम से काला गेहूं का प्रदर्शन स्टॉल लगाया है। इस स्टाल पर अच्छी भीड़ जुट रही है।
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एंथोसाएनिन से होता है काला
नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट या ‘नाबी’ मोहाली ने काला गेहूं तैयार किया है। इसका नाम नाबी एमजी रखा गया है। काले गेहूं कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग की रिसर्च है। कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल कहते हैं कि प्लांट पिगमेंट की वजह से फलों, सब्जियों और अनाजों में रंग आता है। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद है।
सामान्य गेहूं से अधिक होते हैं पोषक तत्व
कृषि वैैैज्ञानिक बताते हैं कि सामान्य गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 5 से 15 पीपीएम के बीच होती है, लेकिन काले गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 100 से 200 पीपीएम होती है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी अधिक आयरन होता है और जिंक की मात्रा भी कुछ अधिक पाई जाती है। हालांकि, प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में ही होते हैं।
12 बीमारियों में पहुंचाता है लाभ
ऐसा दावा किया जा रहा है कि काला गेहूं साधारण गेहूं से ज्यादा पौष्टिक है। काला गेहूं 12 बीमारियों में फायदेमंद है, जिनमें कैंसर, शुगर, मोटापा, कोलेस्ट्रोल, दिल की बीमारी, तनाव सहित कई बीमारियां हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल का कहना है कि यह तो तय है कि अपनी एंटीऑक्सीडेंट खूबियों की वजह से इंसानों के लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा।
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पौष्टिक होने के साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है यह गेहूं ‘नाबी एमजी’
लखीमपुर खीरी। शायद काला गेहूं नाम पहली बार सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। काले गेहूं की खेती किसानों के लिए आम गेहूं की खेती से तीन से चार गुना फायेदमंद साबित हो रही है। पंजाब के बाद अब उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में भी काले गेहूं की खेती कर किसान मोटी कमाई कर रहे हैं। यह गेहूं पौष्टिक होने के साथ अनेक औषधीय गुणों से भरपूर भी है।
बाजार में काला गेहूं 4,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बिकता है, जबकि आम गेहूं का मूल्य 2000 रुपये प्रति क्विंटल है। मितौली ब्लॉक के शिवपुरी गांव निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक उदय प्रकाश मिश्र बताते हैं कि चंडीगढ़ की कृषि वैज्ञानिक मोनिका गर्ग ने सात साल के लंबे प्रयास के बाद वर्ष 2017 में काले गेहूं का बीज विकसित करने में सफलता हासिल की। पंजाब के बाद मध्य प्रदेश और फिर खीरी जिले में काले गेहूं की खेती शुरू हुई है।
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उदय प्रकाश मिश्र का कहना है वर्ष 2020 में पंजाब से बीज लाकर एक एकड़ खेत में काले गेहूं की बुवाई की। इसको तैयार करने में सिर्फ जैविक खादों का इस्तेमाल किया जाता है। रासायनिक खाद का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता। न ही कीटनाशक और खरपतवार नाशक दवाएं प्रयोग की जाती हैं। यही वजह है कि काला गेहूं पूरी तरह आर्गेनिक है। उनका कहना है कि काला गेहूं की मांग दिन पर दिन बढ़ रही है। अब वह खाने के लिए काला गेहूं बेचने के साथ ही उसका बीज भी बेच रहे हैं। विलोबी मैदान में नाबार्ड के तीन दिवसीय शरद मेले में शिव कृषक क्लब के माध्यम से काला गेहूं का प्रदर्शन स्टॉल लगाया है। इस स्टाल पर अच्छी भीड़ जुट रही है।
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एंथोसाएनिन से होता है काला
नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट या ‘नाबी’ मोहाली ने काला गेहूं तैयार किया है। इसका नाम नाबी एमजी रखा गया है। काले गेहूं कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोनिका गर्ग की रिसर्च है। कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल कहते हैं कि प्लांट पिगमेंट की वजह से फलों, सब्जियों और अनाजों में रंग आता है। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद है।
सामान्य गेहूं से अधिक होते हैं पोषक तत्व
कृषि वैैैज्ञानिक बताते हैं कि सामान्य गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 5 से 15 पीपीएम के बीच होती है, लेकिन काले गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 100 से 200 पीपीएम होती है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी अधिक आयरन होता है और जिंक की मात्रा भी कुछ अधिक पाई जाती है। हालांकि, प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में ही होते हैं।
12 बीमारियों में पहुंचाता है लाभ
ऐसा दावा किया जा रहा है कि काला गेहूं साधारण गेहूं से ज्यादा पौष्टिक है। काला गेहूं 12 बीमारियों में फायदेमंद है, जिनमें कैंसर, शुगर, मोटापा, कोलेस्ट्रोल, दिल की बीमारी, तनाव सहित कई बीमारियां हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहेल का कहना है कि यह तो तय है कि अपनी एंटीऑक्सीडेंट खूबियों की वजह से इंसानों के लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा।