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Lakhimpur Kheri News: आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम है भूतनाथ का मेला
Mon, 04 Aug 2025 12:04 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:04 AM IST
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गोला का भूतनाथ मंदिर।
- फोटो : कोतवाली में आत्मसमर्पण करने वाला आरोपी इब्राहिम।
गोला गोकर्णनाथ। भगवान शिव की नगरी छोटी काशी में कई शिवालय दर्शनीय सिद्ध स्थल हैं। इनमें भूतनाथ नाम से प्रसिद्ध अनोखा जुड़वां मंदिर और प्राचीन कुआं भी है।
भगवान शिव के मंदिर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर रेलवे लाइन किनारे वन क्षेत्र से यह सटा हुआ है। यहां भव्य मेला लगता है, जो आस्था और लोक संस्कृति का परिचायक है।
मेले में आए भक्त मंदिर व कुएं में गिटकी फेंककर हू-हू की आवाजें बोलते हैं और पतावर में मनोकामना लेकर गांठ बांधते हैं। जिनकी कामनाएं पूरी होती हैं, वह गांठ खोलते हैं।
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सावन माह में नाग पंचमी के बाद जो सोमवार पड़ता है, उस पर अतीतकाल से यहां भूतनाथ का मेला लगता है। यहां से जुड़ीं लोक कथा श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करती हैं। नगर निवासी गोला गोकर्णनाथ पर शोध प्रबंध लिख रहे साहित्यकार लोकेश कुमार गुप्त ने बताया कि सरस्वती तट पर शैव संप्रदाय के संत बाबा भूतनाथ का आश्रम था। बाबा सर्प विद्या के अद्भुत जानकार और विद्वान थे। उनके आश्रम में ही विभिन्न प्रजातियों के नाग व सर्प विचरण करते थे। महाभारत काल में महाराजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने देवकली तीर्थ पर करवाए गए नाग यज्ञ में बाबा ने अपनी सर्प विद्या के प्रभाव का प्रदर्शन किया था। बाबा के आश्रम में नाग पंचमी को मेला लगता था। इसमें हजारों की भीड़ एकत्र होती थी।
बाबा के पंचतत्व में विलीन होने के बाद मेला नाग पंचमी के बाद होने वाले सोमवार को शुरू हो गया, जो विशाल रूप ले चुका है। शिव जी के अनन्य भक्त बाबा भूतनाथ की कुटिया में स्थापित शिवलिंग उन्हीं के नाम से पूजी जाती है। शिव का जुड़वां मंदिर देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता है। समीप में ही स्थापित बाबा का कुआं है। संवाद
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भगवान शिव के मंदिर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर रेलवे लाइन किनारे वन क्षेत्र से यह सटा हुआ है। यहां भव्य मेला लगता है, जो आस्था और लोक संस्कृति का परिचायक है।
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मेले में आए भक्त मंदिर व कुएं में गिटकी फेंककर हू-हू की आवाजें बोलते हैं और पतावर में मनोकामना लेकर गांठ बांधते हैं। जिनकी कामनाएं पूरी होती हैं, वह गांठ खोलते हैं।
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सावन माह में नाग पंचमी के बाद जो सोमवार पड़ता है, उस पर अतीतकाल से यहां भूतनाथ का मेला लगता है। यहां से जुड़ीं लोक कथा श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करती हैं। नगर निवासी गोला गोकर्णनाथ पर शोध प्रबंध लिख रहे साहित्यकार लोकेश कुमार गुप्त ने बताया कि सरस्वती तट पर शैव संप्रदाय के संत बाबा भूतनाथ का आश्रम था। बाबा सर्प विद्या के अद्भुत जानकार और विद्वान थे। उनके आश्रम में ही विभिन्न प्रजातियों के नाग व सर्प विचरण करते थे। महाभारत काल में महाराजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने देवकली तीर्थ पर करवाए गए नाग यज्ञ में बाबा ने अपनी सर्प विद्या के प्रभाव का प्रदर्शन किया था। बाबा के आश्रम में नाग पंचमी को मेला लगता था। इसमें हजारों की भीड़ एकत्र होती थी।
बाबा के पंचतत्व में विलीन होने के बाद मेला नाग पंचमी के बाद होने वाले सोमवार को शुरू हो गया, जो विशाल रूप ले चुका है। शिव जी के अनन्य भक्त बाबा भूतनाथ की कुटिया में स्थापित शिवलिंग उन्हीं के नाम से पूजी जाती है। शिव का जुड़वां मंदिर देश में कहीं और देखने को नहीं मिलता है। समीप में ही स्थापित बाबा का कुआं है। संवाद