{"_id":"785b945c1d09a707acac6866375135d8","slug":"bharat-mata-ki-jai-both-hands-bowl-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘दोनों हाथ उठाकर भारत माता की जय बोल’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘दोनों हाथ उठाकर भारत माता की जय बोल’
गोला गोकर्णनाथ
Updated Sat, 11 Apr 2015 06:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने विभिन्न विधाओं मेें कविता पाठ कर शुक्रवार की रात को रंगीन कर दिया, जिसे सुनने के लिए श्रोता पूरी रात डटे रहे।
सांस्कृतिक मंच पर ओज कवि कनक तिवारी के संयोजन में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक विनय तिवारी, विशिष्ट अतिथि एसडीएम/ईओ विनोद कुमार गुप्ता और राजेश शुक्ल ने दीप जलाकर किया। अध्यक्षता नगर के वयोवृद्ध चिकित्सक मूलचंद मिश्र ने की। नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने अतिथियों के साथ मेले का भ्रमण किया। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए अतिथियों और क्षेत्रवासियाें का आभार व्यक्त कर कवियों और अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए।
कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि बलराम श्रीवास्तव ने वाणी वंदना से की- आपके प्यार का पात्र हो जाऊंगा, नयन के नीर से आग्र हो जाऊंगा।
लखीमपुर के फारुक सरल ने सामाजिक परिवेश पर कहा-निकम्मे काम करने से कभी शोहरत नहीं मिलती, किसी कायर को दुनिया में कभी इज्जत नहीं मिलती। करे जो मां से गद्दारी उसे दुनिया में भी जिल्लत, खुदा के घर भी ऐसे शख्स को जन्नत नहीं मिलती।
विज्ञापन
बाराबंकी के ओज कवि विनय शुक्ला ने कहा- मेरी कविता ज्ञान देगी राजा या सम्राटों को, हरित क्रांति अभियान न देगी नागफनी के कांटों को।
अखिलेश प्रेमी ने कहा-
नब्बे बरस में शादी यानी तेरहवीं की तैयारी, चली गई थी इश्क के चक्कर में नौकरी सरकारी।
मिर्जापुर की पूनम श्रीवास्तव ने कहा- मैं काशी की हूं बेटी प्रीति का उन्वस लिख दूंगी, मैं कांटे की कलम से फूल की मुस्कान लिख दूंगी।
लखनऊ के वेदव्रत वाजपेयी ने कहा- अब भी पाया जा सकता है, अपने सपनों का भूगोल, अपने दोनों हाथ उठाकर भारत माता की जय बोल।
संचालन करते हुए डॉ शिवओम अंबर ने कहा-
फाकों को भी मस्ती में जीते हैं, बस्ती-बस्ती फरियाद नहीं करते हैं। सच कहते हैं अथवा चुप रहते हैं, हम लफ्जों को बर्बाद नहीं करते हैं।
कमल पांडे ने कहा-
इस देश को नया जोश चाहिए, अशफाक, आजाद, और बोस चाहिए।
इस मौके पर लखनऊ के प्रख्यात मिश्रा और हाथरस के हास्य कवि पदम अलबेला ने अपनी रचनाएं पढ़ीं।
इस मौके पर नगर के कवि वंशीधर श्रीवास्तव द्वारा रचित कविताओं के संग्रह का अतिथियों ने विमोचन किया।
इनकी भी रही मौजूदगी
इस मौके पर समाजसेवी वरुण अग्रवाल, सीओ मधुवन कुमार सिंह, कोतवाल एके उपाध्याय, राममोहन सोनी, आदित्य कुमार पांडे, अवधेश मिश्र, विनोद मिश्र, अरुण अवस्थी, बेनीराम अंजान, रामकुमार गुप्ता, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, रफी अहमद, सुशील गिरि, मनोज श्रीवास्तव, मनोज रावत, पंकज गुप्ता, कफील, इमरान मलिक, भोली गिरि, रीता त्रिवेदी, रामजी रस्तोगी, आशा देवी, राजेश वर्मा, नरेश वर्मा, आलोक बाल्मीकि, काशी विश्वनाथ तिवारी, वैभव त्रिपाठी, रामजी वर्मा, उमाशंकर, अजय वर्मा, ओमप्रकाश गुप्ता, गोपालस्वरूप मिश्र, सुमित शुक्ला, अवधेश, रामसिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
सांस्कृतिक मंच पर ओज कवि कनक तिवारी के संयोजन में हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक विनय तिवारी, विशिष्ट अतिथि एसडीएम/ईओ विनोद कुमार गुप्ता और राजेश शुक्ल ने दीप जलाकर किया। अध्यक्षता नगर के वयोवृद्ध चिकित्सक मूलचंद मिश्र ने की। नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल ने अतिथियों के साथ मेले का भ्रमण किया। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए अतिथियों और क्षेत्रवासियाें का आभार व्यक्त कर कवियों और अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए।
विज्ञापन
कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि बलराम श्रीवास्तव ने वाणी वंदना से की- आपके प्यार का पात्र हो जाऊंगा, नयन के नीर से आग्र हो जाऊंगा।
लखीमपुर के फारुक सरल ने सामाजिक परिवेश पर कहा-निकम्मे काम करने से कभी शोहरत नहीं मिलती, किसी कायर को दुनिया में कभी इज्जत नहीं मिलती। करे जो मां से गद्दारी उसे दुनिया में भी जिल्लत, खुदा के घर भी ऐसे शख्स को जन्नत नहीं मिलती।
विज्ञापन
बाराबंकी के ओज कवि विनय शुक्ला ने कहा- मेरी कविता ज्ञान देगी राजा या सम्राटों को, हरित क्रांति अभियान न देगी नागफनी के कांटों को।
अखिलेश प्रेमी ने कहा-
नब्बे बरस में शादी यानी तेरहवीं की तैयारी, चली गई थी इश्क के चक्कर में नौकरी सरकारी।
मिर्जापुर की पूनम श्रीवास्तव ने कहा- मैं काशी की हूं बेटी प्रीति का उन्वस लिख दूंगी, मैं कांटे की कलम से फूल की मुस्कान लिख दूंगी।
लखनऊ के वेदव्रत वाजपेयी ने कहा- अब भी पाया जा सकता है, अपने सपनों का भूगोल, अपने दोनों हाथ उठाकर भारत माता की जय बोल।
संचालन करते हुए डॉ शिवओम अंबर ने कहा-
फाकों को भी मस्ती में जीते हैं, बस्ती-बस्ती फरियाद नहीं करते हैं। सच कहते हैं अथवा चुप रहते हैं, हम लफ्जों को बर्बाद नहीं करते हैं।
कमल पांडे ने कहा-
इस देश को नया जोश चाहिए, अशफाक, आजाद, और बोस चाहिए।
इस मौके पर लखनऊ के प्रख्यात मिश्रा और हाथरस के हास्य कवि पदम अलबेला ने अपनी रचनाएं पढ़ीं।
इस मौके पर नगर के कवि वंशीधर श्रीवास्तव द्वारा रचित कविताओं के संग्रह का अतिथियों ने विमोचन किया।
इनकी भी रही मौजूदगी
इस मौके पर समाजसेवी वरुण अग्रवाल, सीओ मधुवन कुमार सिंह, कोतवाल एके उपाध्याय, राममोहन सोनी, आदित्य कुमार पांडे, अवधेश मिश्र, विनोद मिश्र, अरुण अवस्थी, बेनीराम अंजान, रामकुमार गुप्ता, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, रफी अहमद, सुशील गिरि, मनोज श्रीवास्तव, मनोज रावत, पंकज गुप्ता, कफील, इमरान मलिक, भोली गिरि, रीता त्रिवेदी, रामजी रस्तोगी, आशा देवी, राजेश वर्मा, नरेश वर्मा, आलोक बाल्मीकि, काशी विश्वनाथ तिवारी, वैभव त्रिपाठी, रामजी वर्मा, उमाशंकर, अजय वर्मा, ओमप्रकाश गुप्ता, गोपालस्वरूप मिश्र, सुमित शुक्ला, अवधेश, रामसिंह आदि मौजूद रहे।