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पुराने गन्ना मूल्य के आधार पर मिलें करेंगी भुगतान
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 28 Dec 2015 10:20 PM IST
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पेराई सत्र 2015-16 में एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी प्रदेश सरकार ने राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) की घोषणा नहीं की है, जिससे किसानों को तगड़ा झटका लगा है।
गन्ना मूल्य घोषित न होने से चीनी मिलें किसानों को समय से भुगतान नहीं कर रही हैं। जिले की नौ चीनी मिलों में से सिर्फ दो मिलें कुंभी और गुलरिया ने पुराने रेट और उसी व्यवस्था के आधार पर 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया है। जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) ने सभी चीनी मिल के अध्याशियों को नोटिस देकर पुरानी व्यवस्था के अनुसार किसानों को जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
इस बार पेराई सत्र के प्रारंभ में ही गन्ना मूल्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी, जो अभी तक बरकरार हैै। किसानों के साथ इससे भद्दा मजाक नहीं हो सकता कि एक माह से अपनी उपज गन्ना चीनी मिलों को बिक्री कर रहे हैं, लेकिन उसका रेट अभी तक घोषित नहीं है।
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वहीं चीनी मिलें भी बगैैर रेट के पर्चियां ही जारी कर रहीं हैै। तो गन्ना विभाग ने भी भुगतान संबंधी कालम खाली रखे हैं। किसानों के हितैषी होने का दावा करने वाले दल और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर मौन साध रखा है। एक माह से अधिक पेराई सत्र का समय बीतने के बावजूद भुगतान न होने से किसानों की हालत दयनीय हो गई है। जिले में पांच लाख से अधिक गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव के अनुसार अभी गन्ना मूल्य घोषित न होने से भुगतान में देरी हुई है। हालांकि पुरानी व्यवस्था के मुताबिक किसानों को भुगतान करने के लिए सभी मिल अध्याशियों को नोटिस जारी किया है। इस क्रम में दो मिलों ने भुगतान किया है। जल्द ही अन्य मिलें भी भुगतान करेंगी।
गन्ना मूल्य घोषित न होने से मिल मालिकों का फायदा
इस बार अभी तक गन्ना मूल्य घोषित न होने से चीनी मिलों को फायदा मिला है। किसानों को भुगतान के लाले हैं, तो गन्ना एक्ट भी उनकी कोई मदद नहीं कर सकता। खास बात यह भी है कि पिछले वर्षों में किसान संगठनों ने कोर्ट की शरण में जाकर चीनी मिलों और सरकार पर जल्द भुुगतान कराने के लिए दबाव बनाने में सफलता हासिल की थी। अब हालात यह हैं कि मिल मालिकों पर दबाव बनाना मुश्किल होगा, क्योंकि गन्ना मूल्य घोषित न होने की बात कहकर वह अपना बचाव बखूबी कर सकेंगे।
मौजूदा सत्र में 56.58 करोड़ का हुआ भुगतान
नए पेराई सत्र में नौ चीनी मिलों ने 27 दिसंबर तक 205 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर डाली है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 57 अरब 40 करोड़ (280 रुपये के आधार पर) है। अभी तक सिर्फ बलरामपुर ग्रुप की दो मिलों ने 56 करोड़ 58 लाख 89 हजार रुपये भुगतान किया है, जिसमें कुंभी मिल ने 25 करोड़ 26 लाख और गुलरिया ने 29 करोड़ 58 लाख 89 हजार रुपये भुगतान किया है।
पिछले पेराई सत्र का 70.34 करोड़ अटका
पिछले पेराई सत्र का अभी भी चार मिलों ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। बजाज ग्रुप की गोला मिल पर 14 करोड़ 99 लाख 86 हजार रुपये, पलिया पर 14 करोड़ 22 लाख 37 हजार रुपये, खंभारखेड़ा पर 11 करोड़ 34 लाख 58 हजार रुपये और ऐरा मिल पर सबसे अधिक 29 करोड़ 77 लाख 89 हजार रुपये किसानों का बकाया है। इसके अलावा आठ मिलों पर भुगतान में देरी के चलते बतौर ब्याज 79 करोड़ 56 लाख तीन हजार की देनदारी बनती है।
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गन्ना मूल्य घोषित न होने से चीनी मिलें किसानों को समय से भुगतान नहीं कर रही हैं। जिले की नौ चीनी मिलों में से सिर्फ दो मिलें कुंभी और गुलरिया ने पुराने रेट और उसी व्यवस्था के आधार पर 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया है। जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) ने सभी चीनी मिल के अध्याशियों को नोटिस देकर पुरानी व्यवस्था के अनुसार किसानों को जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
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इस बार पेराई सत्र के प्रारंभ में ही गन्ना मूल्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी, जो अभी तक बरकरार हैै। किसानों के साथ इससे भद्दा मजाक नहीं हो सकता कि एक माह से अपनी उपज गन्ना चीनी मिलों को बिक्री कर रहे हैं, लेकिन उसका रेट अभी तक घोषित नहीं है।
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वहीं चीनी मिलें भी बगैैर रेट के पर्चियां ही जारी कर रहीं हैै। तो गन्ना विभाग ने भी भुगतान संबंधी कालम खाली रखे हैं। किसानों के हितैषी होने का दावा करने वाले दल और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर मौन साध रखा है। एक माह से अधिक पेराई सत्र का समय बीतने के बावजूद भुगतान न होने से किसानों की हालत दयनीय हो गई है। जिले में पांच लाख से अधिक गन्ना किसान चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई करते हैं।
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव के अनुसार अभी गन्ना मूल्य घोषित न होने से भुगतान में देरी हुई है। हालांकि पुरानी व्यवस्था के मुताबिक किसानों को भुगतान करने के लिए सभी मिल अध्याशियों को नोटिस जारी किया है। इस क्रम में दो मिलों ने भुगतान किया है। जल्द ही अन्य मिलें भी भुगतान करेंगी।
गन्ना मूल्य घोषित न होने से मिल मालिकों का फायदा
इस बार अभी तक गन्ना मूल्य घोषित न होने से चीनी मिलों को फायदा मिला है। किसानों को भुगतान के लाले हैं, तो गन्ना एक्ट भी उनकी कोई मदद नहीं कर सकता। खास बात यह भी है कि पिछले वर्षों में किसान संगठनों ने कोर्ट की शरण में जाकर चीनी मिलों और सरकार पर जल्द भुुगतान कराने के लिए दबाव बनाने में सफलता हासिल की थी। अब हालात यह हैं कि मिल मालिकों पर दबाव बनाना मुश्किल होगा, क्योंकि गन्ना मूल्य घोषित न होने की बात कहकर वह अपना बचाव बखूबी कर सकेंगे।
मौजूदा सत्र में 56.58 करोड़ का हुआ भुगतान
नए पेराई सत्र में नौ चीनी मिलों ने 27 दिसंबर तक 205 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर डाली है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 57 अरब 40 करोड़ (280 रुपये के आधार पर) है। अभी तक सिर्फ बलरामपुर ग्रुप की दो मिलों ने 56 करोड़ 58 लाख 89 हजार रुपये भुगतान किया है, जिसमें कुंभी मिल ने 25 करोड़ 26 लाख और गुलरिया ने 29 करोड़ 58 लाख 89 हजार रुपये भुगतान किया है।
पिछले पेराई सत्र का 70.34 करोड़ अटका
पिछले पेराई सत्र का अभी भी चार मिलों ने बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। बजाज ग्रुप की गोला मिल पर 14 करोड़ 99 लाख 86 हजार रुपये, पलिया पर 14 करोड़ 22 लाख 37 हजार रुपये, खंभारखेड़ा पर 11 करोड़ 34 लाख 58 हजार रुपये और ऐरा मिल पर सबसे अधिक 29 करोड़ 77 लाख 89 हजार रुपये किसानों का बकाया है। इसके अलावा आठ मिलों पर भुगतान में देरी के चलते बतौर ब्याज 79 करोड़ 56 लाख तीन हजार की देनदारी बनती है।